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सिवनी के लखनादौन परिषद अध्यक्ष समेत 23 पर FIR, घोटाला कर राज्य सरकार को दिया बड़ा झटका

Lakhnadon Municipal Council Scam: सिवनी जिले के लखनादौन नगर परिषद में बड़ा घोटाला सामने आया है. लखनादौन नगर में चट्टी से बस स्टैंड मार्ग पर बने शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की दुकानों का परिषद ने मनमाना आवंटन किया है, जिससे राज्य सरकार को 83 लाख रुपये का राजस्व का नुकसान पहुंचा है.

सिवनी के लखनादौन परिषद अध्यक्ष समेत 23 पर FIR, घोटाला कर राज्य सरकार को दिया बड़ा झटका

Seoni Hindi News: सिवनी जिले के लखनादौन नगर परिषद में बड़ा घोटाला सामने आया है. लखनादौन नगर में चट्टी से बस स्टैंड मार्ग पर बने शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की दुकानों का परिषद ने मनमाना आवंटन किया है, जिससे राज्य सरकार को 83 लाख रुपये का राजस्व का नुकसान पहुंचा है. जांच के बाद ईओडब्ल्यू (EOW) 23 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है. इसमें नगर परिषद लखनादौन की अध्यक्ष मीना बलराम गोल्हानी, दो पूर्व सीएमओ गजेंद्र पांडे, गीता वाल्मीक, वर्तमान राजस्व उपनिरीक्षक रवि गोल्हानी, पीआईसी सदस्यों देवकी शिवकुमार झारिया, संगीता संजय गोल्हानी, वर्षा श्रीकांत गोल्हानी, अनीता संदीप जैन, सविता गोलू कुमरे और 14 दुकानदार शामिल हैं.

बिना कॉन्ट्रैक्ट और बिना पैसे लिए दिया कब्जा

निकाय ने 8 शॉपिंग कॉन्पलेक्स में बनी 75 दुकानों की नीलामी प्रक्रिया कराई थी. नियम ये था कि दुकान लेने वाले को 21 दिन में 25 प्रतिशत की राशि भुगतान करनी थी और बाकी राशि 120 दिन के भीतर देनी थी. इसके बाद कॉन्ट्रैक्ट तैयार कर मासिक किराया तय होना था. जांच में पता चला कि 24 अगस्त 2020 से 18 अक्टूबर 2024 के बीच नीलामी राशि जमा कराए बिना और कॉन्ट्रैकट के बगैर दुकानों पर कब्ज दे दिया. जांच में पता चला कि 32 दुकानों से 13 दुकानदारों ने लगभग 79.82 लाख रुपये जमा नहीं किए. इसके अलावा 2.88 लाख रुपये किराया भी वसूल नहीं किया गया.

जबलपुर निवासी रविंद्र सिंह आनंद की शिकायत के बाद जांच शुरू हुई. आरोप है कि आरक्षित वर्ग के लिए तय दुकान को नियमों का पालन किए बिना सामान्य वर्ग के व्यक्ति को दे दिया गया.

बिना नीलामी कराए बिना फिर से आवंटित कर दी दुकान

दुकान क्रमांक 7, जो आरक्षित थी, वैभव दुबे को बिना दोबारा नीलामी कराए आवंटित कर दी गई. नियम के अनुसार किसी दुकान को अनारक्षित घोषित करने से पहले तीन बार नीलामी असफल होना जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. कहा जा रहा है कि पीआईसी की बैठक में प्रस्ताव पास कर उन्हें फायदा पहुंचाया गया.

जांच में पूर्व सीएमओ गजेंद्र पांडे, गीता वाल्मीक, राजस्व उपनिरीक्षक रवि गोल्हानी और 14 अन्य दुकानदारों पर मिलीभगत के आरोप लगे हैं. Economic Offences Wing के अनुसार इस मामले से सरकार को लगभग 83 लाख रुपये का नुकसान हुआ है.

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