- मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों के भोजन के लिए हर दिन लगभग 35 हजार रुपये बकरे का मांस खरीदा जा रहा
- वित्तीय वर्ष 2024-25 में चीतों के मटन पर कुल 1.27 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं, बजट अलग से नहीं है
- कूनो पार्क में वर्तमान में 35 चीतों की संख्या है, जिनका पोषण विशेषज्ञों की निगरानी में किया जा रहा है
Kuno National Park Cheetah Food Expense: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी चीतों के पुनर्वास का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अब अपने भारी-भरकम खर्चों को लेकर सुर्खियों में है. विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकार ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि पार्क में मौजूद चीतों को खिलाने के लिए हर दिन औसतन 35 हजार रुपये का बकरे का मांस खरीदा जा रहा है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सदन में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक 1.27 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सिर्फ मटन की आपूर्ति पर खर्च की जा चुकी है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस शाही भोजन के लिए सरकार के पास कोई अलग बजट प्रावधान नहीं है और अन्य मदों से फंड डायवर्ट कर इसकी भरपाई की जा रही है. एक तरफ जहां चीतों का कुनबा बढ़ने की तैयारी है, वहीं दूसरी तरफ इन पर होने वाले खर्च और आसपास के इलाकों में तेंदुओं द्वारा मवेशियों के शिकार की घटनाओं ने इस प्रोजेक्ट की आर्थिक और रणनीतिक चुनौतियों पर नई बहस छेड़ दी है.

मटन पर करोड़ों का खर्च और फंड की व्यवस्था
सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 के दौरान बकरे के मांस की खरीद पर कुल 1,27,10,870 रुपये खर्च हुए हैं. अगर इसे दैनिक आधार पर देखें, तो यह खर्च लगभग 34,825 रुपये प्रतिदिन आता है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि चीतों के भोजन के लिए कोई विशेष हेड नहीं बनाया गया है, बल्कि "आवश्यकतानुसार" अन्य बजट प्रावधानों से पैसा निकाला जाता है. फिलहाल कूनो में 35 चीते (वयस्क और भारत में जन्मे शावक मिलाकर) रह रहे हैं, जिनके स्वास्थ्य और पोषण की जिम्मेदारी एक समर्पित निगरानी टीम और पशु चिकित्सकों के कंधों पर है.
-
परजीवी, बोझ, फेल प्रोडक्ट... NDTV World Summit में PM मोदी ने कांग्रेस को घेरा -
PM Modi in NDTV World Summit : बदलते वर्ल्ड ऑर्डर में भारत की क्या भूमिका? PM मोदी ने बताया -
PM Modi Speech: Rahul Gandhi पर PM मोदी क्या-क्या बोले? | NDTV World Summit 2026 -
फेल प्रोडक्ट लॉन्च कर रही कांग्रेस, इतनी तो लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा से भी नहीं होती; NDTV वर्ल्ड समिट में PM मोदी -
NDTV World Summit के मंच से कौन से नए खेल का जिक्र कर गए मोदी...! -
'मत्स्य न्याय' के उदाहरण से पीएम मोदी ने UN पर क्या कुछ कह दिया? -
तब बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है... PM मोदी का NDTV वर्ल्ड समिट से दुनिया को संदेश -
PM Modi Speech: Covid-19 का जिक्र कर PM मोदी ने बताई भारत की ताकत! कही ये बातें | NDTV India -
'मौजूदा चुनौतियों के सामने संयुक्त राष्ट्र की सीमाएं साफ दिख रही हैं', NDTV World Summit में बोले PM मोदी -
भारत क्या पाकिस्तान से अच्छे संबंध चाहता है? NDTV World Summit में जयशंकर का जवाब
भोजन की कमी और वन्यजीव सुरक्षा पर सवाल
कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के तीखे सवालों का जवाब देते हुए सरकार ने उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि भोजन की कमी के कारण चीतों या अन्य वन्यजीवों को परेशानी हो रही है. 6 दिसंबर 2025 को हुई एक तेंदुए की मौत को सरकार ने महज एक सड़क दुर्घटना बताया और इसे भोजन की कमी से जोड़ने से इनकार कर दिया. हालांकि, सरकार ने यह स्वीकार किया कि जंगल के खुले क्षेत्रों में घूमते हुए तेंदुए कभी-कभी आसपास के गांवों में मवेशियों को अपना शिकार बनाते हैं, लेकिन प्रशासन ने इसके लिए अधिकारियों की लापरवाही मानने या उन पर कार्रवाई करने से मना कर दिया है.
नए मेहमानों की तैयारी और दूसरा घर
भारत का चीता प्रोजेक्ट अब विस्तार की दिशा में है. 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नामीबियाई चीतों को छोड़े जाने के साथ शुरू हुआ यह सफर अब बोत्सवाना तक पहुंच गया है. आगामी 28 फरवरी को 8 और नए चीते भारत लाए जाने की योजना है. इसके साथ ही, कूनो के बाद अब पश्चिमी मध्य प्रदेश का गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य चीतों के दूसरे घर के रूप में तैयार हो चुका है, जहां दक्षिण अफ्रीकी चीतों के लिए सुरक्षित माहौल विकसित किया गया है. सरकार का मानना है कि खर्च के बावजूद यह प्रोजेक्ट वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है.

मटन पर करोड़ों का खर्च
सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, साल 2024-25 में चीतों के भोजन के लिए कुल 1,27,10,870 रुपये का बकरे का मांस खरीदा गया है. अगर इस रकम को साल के 365 दिनों में बांटकर देखा जाए, तो हर दिन का औसतन खर्च करीब 34,825 रुपये बैठता है. दिलचस्प बात यह है कि चीतों के भोजन के लिए सरकार के पास कोई अलग से तय बजट नहीं है. मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि इसके लिए जरूरत पड़ने पर दूसरे मदों (हेड्स) से पैसा निकालकर खर्च किया जा रहा है.
भोजन का कोई निश्चित पैमाना नहीं
फिलहाल कूनो नेशनल पार्क में कुल 35 चीते हैं, जिनमें वयस्क, अर्ध-वयस्क और भारत में पैदा हुए शावक शामिल हैं. सरकार ने साफ किया है कि चीतों को हर दिन कितने बकरे खिलाए जाएंगे, इसका कोई तय मानक नहीं है. चीतों को मांस की आपूर्ति पूरी तरह से डॉक्टरों की सलाह और उनकी निगरानी टीम की रिपोर्ट के आधार पर की जाती है. विधायक ने सदन में यह भी सवाल उठाया था कि क्या भोजन की कमी की वजह से आसपास के इलाकों में तेंदुए मवेशियों का शिकार कर रहे हैं या किसी तेंदुए की मौत हुई है.
सरकार ने दावों को नकारा
6 दिसंबर 2025 को एक तेंदुए की सड़क हादसे में हुई मौत पर स्पष्टीकरण देते हुए सरकार ने कहा कि यह दुर्घटना थी और इसका भोजन की कमी से कोई लेना-देना नहीं है. साथ ही, सरकार ने उन आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि चीतों को पर्याप्त खाना नहीं मिल रहा है. प्रशासन का कहना है कि एक समर्पित टीम चौबीसों घंटे इनकी निगरानी कर रही है. हालांकि, सरकार ने यह माना कि खुले जंगल में घूमते हुए तेंदुए कभी-कभी ग्रामीण इलाकों में मवेशियों का शिकार कर लेते हैं, लेकिन इसके लिए अधिकारियों पर किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है.
कूनो से गांधी सागर तक बढ़ता कुनबा
भारत में चीतों के पुनर्वास की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से आए 8 चीतों को कूनो में छोड़ा था. इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते लाए गए. अब यह प्रोजेक्ट एक नए चरण में पहुंच रहा है. आने वाली 28 फरवरी को बोत्सवाना से 8 और चीते (2 नर और 6 मादा) भारत लाए जाने वाले हैं. वहीं, मध्य प्रदेश का गांधी सागर अभयारण्य भी अब चीतों का दूसरा घर बन चुका है, जहां वर्तमान में दक्षिण अफ्रीकी चीते मौजूद हैं.
ये भी पढ़ें: ब्रिटिश सरकार से कर्ज वसूली नोटिस को लेकर चर्चा में आए सीहोर के रुठिया परिवार ने अब भारत सरकार से मांगा जवाब
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं