विज्ञापन

झीरम घाटी नरसंहार के 13 साल : उस खौफनाक दिन की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी, चश्मदीदों की जुबानी

Jheeram Ghati Massacre: झीरम घाटी नरसंहार के 13 साल बाद भी उस दिन की खौफनाक यादें जिंदा हैं. जानिए इस भीषण हमले में बाल-बाल बचे राजीव नारंग और मलकीत सिंह गैदू की जुबानी, उस दिन के खौफ और महेंद्र कर्मा के आखिरी पलों की पूरी अनकही कहानी.

झीरम घाटी नरसंहार के 13 साल : उस खौफनाक दिन की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी, चश्मदीदों की जुबानी
  • छत्तीसगढ़ की झीरम घाटी में 25 मई 2013 को नक्सलियों ने एक भीषण हमले में कई शीर्ष नेताओं की हत्या कर दी थी
  • हमले में राजीव नारंग और उनके साथी गंभीर रूप से घायल हुए लेकिन वे घटना स्थल से सुरक्षित निकलने में सफल रहे
  • मलकीत सिंह गैदू ने बताया कि महेंद्र कर्मा ने अपनी जान जोखिम में डालकर अन्य लोगों को बचाने का प्रयास किया था
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

Jhiram Ghati Naxal Attack: छत्तीसगढ़ की झीरम घाटी के उस खौफनाक मंजर को बीते 13 साल हो चुके हैं, लेकिन उस दिन की कहानी सिर्फ सरकारी फाइलों या बयानों में ही दर्ज नहीं है. वह आज भी उन लोगों के जेहन में जिंदा है जो मौत के मुंह से बचकर लौटे थे.  गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद खत्म करने की समयसीमा तय की है और बस्तर एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है. लेकिन इस डेडलाइन के बीच उस नरसंहार का दर्द आज भी गहरा है. इस विशेष रिपोर्ट में पढ़िए, झीरम हमले के चश्मदीदों- राजीव नारंग और मलकीत सिंह गैदू की जुबानी उस दिन की रोंगटे खड़े कर देने वाली पूरी कहानी.

 सामान्य दिन और अचानक हुआ धमाका

वह दिन था  25 मई 2013. ये कोई इतिहास नहीं बल्कि एक-एक पल की ऐसी याद है जो हिंसक और कभी न भूलने वाली वारदात थी. राजीव नारंग को याद है कि वो दिन उनके लिए एक सामान्य राजनीतिक कार्यक्रम की तरह शुरू हुआ था. वह और उनके साथी केशलूर में ‘परिवर्तन यात्रा' से लौट रहे नेताओं का इंतजार कर रहे थे. भीषण गर्मी के चलते उन्होंने अपनी एसी गाड़ी से बीच रास्ते में ही नेताओं को लेने निकलने का फैसला किया. लेकिन दरभा, झीरम के पास पहुंचते ही सब कुछ पल भर में बदल गया.

आंखों के सामने हवा में उड़ती गाड़ी

अचानक एक जोरदार धमाका हुआ. नारंग बताते हैं कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने एक गाड़ी को हवा में उड़ते देखा. उन्होंने तुरंत ब्रेक लगाया और गाड़ी मोड़ने की कोशिश की, लेकिन इससे पहले कि वह निकल पाते, गोलियां चलनी शुरू हो गईं. पहाड़ियों की तरफ से लगातार फायरिंग हो रही थी.

Latest and Breaking News on NDTV

ये भी पढ़ें: जवान बेटे की हत्या, लाखों का कर्ज और ब्लड कैंसर... नक्सलियों के अत्याचार और परिवार के तबाह होने की कहानी

खून से लथपथ होकर भी नहीं रोकी गाड़ी

गाड़ी चला रहे नारंग को तीन गोलियां लगीं, और पीछे बैठे उनके साथी गोपी माधवानी भी घायल हो गए. खून से लथपथ होने के बावजूद उन्होंने गाड़ी नहीं रोकी बस किसी तरह उस हमले से बाहर निकलते रहे. करीब 4:15 बजे वे दरभा पहुंचे और पुलिस को घटना की जानकारी दी. हालात की गंभीरता साफ थी नेता अभी भी फंसे हुए थे. घायल होने के कारण नारंग के साथी ने गाड़ी संभाली. वे पहले स्थानीय अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां कोई व्यवस्था नहीं थी. फिर वे सीधे जगदलपुर पहुंचे, जहां प्राथमिक इलाज के बाद नारंग को रायपुर एयरलिफ्ट किया गया.

झीरम की सबसे बड़ी राजनीतिक त्रासदी

नारंग के लिए यह घटना सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राजनीतिक और भावनात्मक त्रासदी भी है. वे बताते हैं कि- हमने उस दिन अपना पूरा शीर्ष नेतृत्व खो दिया. जिसमें महेंद्र कर्मा, नंद कुमार पटेल और विद्याचरण शुक्ल जैसे नेता शामिल हैं. यही झीरम की सबसे बड़ी त्रासदी है.” आज जब नक्सलवाद खत्म होने की बात हो रही है तो नारंग भी ऐसी ही उन्मीद है. लेकिन साथ में वे एक मांग भी रखते हैं. “हम नहीं चाहते कि बस्तर फिर कभी वैसा बने पर उस दिन क्या हुआ, पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए. जिन्होंने सरेंडर किया है, वे सच जानते हैं. देश को भी यह जानना चाहिए.”

हमले के बिल्कुल केंद्र में थे मलकीत 

जहां नारंग की कहानी हमले से बच निकलने की है, वहीं मलकीत सिंह गैदू की कहानी उस हमले के बिल्कुल केंद्र से आती है. महेंद्र कर्मा के करीबी रहे मलकीत उस गाड़ी को चला रहे थे, जिसमें कर्मा खुद बैठे थे. झीरम पहुंचने से पहले ही उन्हें कुछ गड़बड़ी का एहसास हुआ था. उन्होंने देखा कि रास्ते में रोड ओपनिंग पार्टी नजर नहीं आ रही है. उन्होंने यह बात कर्मा से कही, लेकिन उन्होंने इसे सामान्य बताया. लेकिन कुछ ही मिनटों बाद उनकी आशंका सच साबित हो गई. जैसे ही काफिला झीरम घाटी में पहुंचा, जंगल की तरफ से अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई. गोलियां चारों तरफ से बरस रही थीं. एक गोली गाड़ी के शीशे को तोड़ते हुए मलकीत की गर्दन के पास से निकल गई. कर्मा ने तुरंत स्थिति को समझ लिया और कहा “गाड़ी तेज चलाओ.” लेकिन अब निकलने का कोई रास्ता नहीं था.
 

Latest and Breaking News on NDTV

कवासी लखमा की गोंडी में बात

कुछ ही देर में पूरा काफिला घिर चुका था. कर्मा ने सभी को गाड़ी से उतरकर जमीन पर लेटने को कहा. करीब एक घंटे तक लगातार गोलीबारी होती रही. एक समय ऐसा भी आया जब कवासी लखमा ने गोंडी में बात की और कुछ देर के लिए फायरिंग रुकी, लेकिन यह ज्यादा देर नहीं चली. नक्सली लगातार नजदीक आते गए और सरेंडर करने को कहने लगे.उस अफरा-तफरी में पहचान छिपाना ही बचने का तरीका था. मलकीत और अन्य लोगों ने अपने नाम बदल लिए, खुद को सामान्य कार्यकर्ता बताया. उन्हें उल्टा लिटा दिया गया. चारों तरफ नेताओं को पहचानकर निशाना बनाया जा रहा था.

महेंद्र कर्मा का वो ऐतिहासिक बलिदान

मलकीत को आज भी वह पल याद है, जब महेंद्र कर्मा खड़े हो गए. अपने लोगों को मरते देख उन्होंने खुद को सामने कर दिया “मैं महेंद्र कर्मा हूं… गोली चलाना बंद करो.” जिसके बाद कुछ क्षण के लिए गोलियां थमीं… लेकिन हिंसा नहीं रुकी.

'महेंद्र कपूर के गाने' और कर्मा की आखिरी बातें

मलकीत कहते हैं, उस दिन की सबसे गहरी याद सिर्फ हमला नहीं है… बल्कि उससे पहले के पल हैं. गाड़ी में बैठे हुए कर्मा ने उनसे महेंद्र कपूर के गाने चलाने को कहा था. राजनीति और निजी जिंदगी की बातें हो रही थीं. “वही उनके आखिरी गीत थे,” मलकीत धीमी आवाज में कहते हैं. “हम उन्हें कभी नहीं भूल पाएंगे.”

सिहराने वाली तस्वीर और अधूरे सवाल 

इन दोनों कहानियों एक जो गोलियों के बीच बचकर निकल आई, और दूसरी जो हमले के केंद्र में फंसी रही मिलकर झीरम की एक सिहराने वाली तस्वीर बनाती हैं. यह सिर्फ हमले की क्रूरता नहीं दिखातीं, बल्कि उस दिन इंसानी प्रतिक्रिया भी दिखाती हैं डर, साहस, वफादारी और नुकसान. आज जब बस्तर के बदलने की बात हो रही है, ये आवाजें याद दिलाती हैं कि अतीत पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इन बचे हुए लोगों के पास सिर्फ जख्म नहीं हैं… सवाल भी हैं और जब तक उन सवालों के जवाब नहीं मिलते… झीरम सिर्फ एक त्रासदी नहीं रहेगा… वह एक अधूरी कहानी बना रहेगा.
ये भी पढ़ें: झीरम घाटी हमला: 13 साल बाद भी जांच अधूरी, नक्सलियों की हिंसा के सबूत आज भी मौजूद

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com