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इंदौर-ओंकारेश्वर के बीच 'डेथ घाट' का अंत ! पहाड़ चीरकर बन रही है 33Km लंबी सड़क,3 टनल भी होंगे

MP Road Projects 2026: इंदौर से ओंकारेश्वर के बीच 'डेथ घाट' के नाम से मशहूर भेरूघाट अब इतिहास बनने वाला है. 33 किमी लंबे तेजाजीनगर-बलवाड़ा फोरलेन प्रोजेक्ट में बन रही तीन आधुनिक टनल न सिर्फ सफर के समय को 1 घंटा कम करेंगी, बल्कि सिंहस्थ 2028 से पहले श्रद्धालुओं को सुरक्षित सफर का तोहफा भी देंगी.

इंदौर-ओंकारेश्वर के बीच 'डेथ घाट' का अंत ! पहाड़ चीरकर बन रही है 33Km लंबी सड़क,3 टनल भी होंगे
  • इंदौर से ओंकारेश्वर और खंडवा जाने वाले मार्ग पर 33.40 किलोमीटर लंबा फोरलेन प्रोजेक्ट सड़क बनेगी
  • प्रोजेक्ट में तीन आधुनिक टनल बन रही हैं जो दुर्घटनाग्रस्त मोड़ों को सुरक्षित बनाएंगी
  • भेरूघाट, बाईग्राम और चौरल घाट में तीन टनलों का निर्माण नवीनतम तकनीकों से किया जा रहा है
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Indore Omkareshwar Highway: इंदौर से ओंकारेश्वर और खंडवा की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है. मध्यप्रदेश का सबसे खतरनाक माना जाने वाला 'डेथ घाट' अब इतिहास बनने जा रहा है. इंदौर-इच्छापुर कॉरिडोर के तहत तेजाजीनगर से बलवाड़ा तक बन रहा 33.40 किलोमीटर लंबा फोरलेन प्रोजेक्ट प्रदेश की सड़क कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला है. इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसमें बन रही तीन आधुनिक टनल हैं, जो न सिर्फ सफर का समय घटाएंगी बल्कि मौत के मोड़ों को भी सुरक्षित सफर में बदल देंगी.

पहाड़ चीरकर बन रही नई लाइफलाइन

इंदौर को ओंकारेश्वर, खंडवा, बुरहानपुर और महाराष्ट्र से जोड़ने वाला यह पुराना रास्ता हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है. पातालपानी जलप्रपात और चौरल घाटी के खूबसूरत नजारों के बीच तीखे मोड़ और गहरी ढलान वाहन चालकों के लिए बड़ी मुसीबत साबित होते थे. भारी ट्रैफिक और कम विजिबिलिटी के कारण यहां अक्सर जाम और हादसों की स्थिति बनी रहती थी. इन्हीं समस्याओं को देखते हुए एनएचएआई (NHAI) ने करीब 33 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को आधुनिक बनाने का काम शुरू किया है, जिसके इस साल दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है.

इन खतरनाक मोड़ों से अब लोगों को राहत मिलेगी और सफर सुरक्षित होगा.

इन खतरनाक मोड़ों से अब लोगों को राहत मिलेगी और सफर सुरक्षित होगा.

तीन टनल और आधुनिक इंजीनियरिंग का कमाल

इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण हिस्सा पहाड़ियों के बीच बनाई जा रही तीन टनल हैं. पहली टनल भेरूघाट में बन रही है, जिसकी लंबाई करीब 575 मीटर है. दूसरी टनल बाईग्राम में 480 मीटर लंबी है, जहां चुनौतीपूर्ण मिट्टी और चट्टानों के बीच वॉटरप्रूफिंग और कंक्रीट लाइनिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है. वहीं तीसरी टनल चौरल घाट में 550 मीटर लंबी बनाई जा रही है. इन टनलों के निर्माण में 'न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड' (NATM) और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल्ड ब्लास्टिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है ताकि पहाड़ों को न्यूनतम नुकसान पहुंचे और टनल बेहद मजबूत बनें.

ब्लैक स्पॉट और हादसों से मिलेगी मुक्ति

भेरूघाट और चौरल घाट का इलाका बरसों से 'डेथ घाट' के रूप में कुख्यात रहा है. इंदौर ग्रामीण क्षेत्र के 15 सबसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट्स में से कई इसी हाईवे पर स्थित हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में इन ब्लैक स्पॉट्स पर हुए 170 हादसों में 112 लोगों ने अपनी जान गंवाई है. अक्सर ब्रेक फेल होने या तीखे मोड़ों पर नियंत्रण खोने की वजह से बसें और ट्रक 50 फीट गहरी खाइयों में गिर जाते थे. अब टनल बनने के बाद ये खतरनाक घाट सेक्शन खत्म हो जाएंगे, जिससे हादसों की संभावना लगभग शून्य हो जाएगी.
 

33 किमी लंबी इस सड़क प्रोजेक्ट में तीन आधुनिक टनल होंगे. जो न सिर्फ सफर को आरामदायक बनाएंगे बल्कि सेफ भी रखेंगे.

33 किमी लंबी इस सड़क प्रोजेक्ट में तीन आधुनिक टनल होंगे. जो न सिर्फ सफर को आरामदायक बनाएंगे बल्कि सेफ भी रखेंगे.

सिंहस्थ 2028 और श्रद्धालुओं को बड़ा बूस्ट

यह प्रोजेक्ट धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी मील का पत्थर साबित होगा. उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 से पहले इस मार्ग का तैयार होना करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए वरदान साबित होगा. अभी उज्जैन से इंदौर होते हुए ओंकारेश्वर जाने में करीब 3.5 घंटे का समय लगता है, लेकिन फोरलेन और टनल तैयार होने के बाद यह सफर महज 2 से 2.5 घंटे में पूरा हो जाएगा. यानी श्रद्धालु अब एक ही दिन में आसानी से महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर दोनों ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर सकेंगे.

विकास की नई दिशा और सुगम सफर

सिर्फ टनल ही नहीं, इस 33 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट में 1 मेजर ब्रिज, एक रेलवे ओवरब्रिज, 2 वायडक्ट, और दर्जनों अंडरपास व कल्वर्ट बनाए जा रहे हैं. यह मार्ग सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के व्यापार, पर्यटन और उद्योग के लिए एक नई लाइफलाइन साबित होगा. पहाड़ों को चीरकर बनाई जा रही ये टनलें आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश की सबसे अहम सड़क कनेक्टिविटी का हिस्सा होंगी, जो सफर को सुरक्षित, सुगम और तेज बनाएंगी.
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