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वैभव सूर्यवंशी पर अब IIM इंदौर में की जाएगी केस स्टडी, 15 की उम्र में मिली सफलता के राज किए जाएंगे डिकोड

महज 15 साल की उम्र में क्रिकेट जगत में धमाल मचाने वाले राजस्थान रॉयल्स के ओपनर बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर अब इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) इंदौर केस स्टडी करेगा. इसके साथ ही वैभव मॉडल पर होने वाली यह देश की पहली मल्टीडिसीप्लिनरी स्टडी होगी.

  • IIM इंदौर में वैभव सूर्यवंशी की क्रिकेट सफलता पर पहली मल्टीडिसीप्लिनरी केस स्टडी की जाएगी
  • वैभव सूर्यवंशी ने राजस्थान रॉयल्स के लिए इस सीजन सबसे ज्यादा छक्के लगाकर क्रिस गेल का रिकॉर्ड तोड़ा है
  • स्टडी में वैभव की उपलब्धि के साथ सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, पारिवारिक व संस्थागत कारकों का भी गहराई से अध्ययन होगा
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IIM Indore Study on Vaibhav Suryavanshi success secret: 15 साल की उम्र में क्रिकेटर की दुनिया में धमाल मचाने वाले वैभव सूर्यवंशी को लेकर अब इंदौर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में केस स्टडी किया जाएगा. यानी वैभव मॉडल पर यह देश की पहली मल्टीडिसीप्लिनरी स्टडी होगी, जिसमें खेल मनोविज्ञान और प्रबंधन एक्सपोर्ट साथ मिलकर इतनी छोटी उम्र में हासिल किए गए सफलता के फॉर्मूले पर रिसर्च किया जाएगा.

गौरतलब है कि वैभव सूर्यवंशी राजस्थान रॉयल्स के ओपनर बल्लेबाज हैं. उन्होंने इस सीजन में सबसे ज्यादा 72 छक्के मार कर क्रिस गेल के 14 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. यही वजह है कि अपनी हैरतअंगेज बैटिंग से पूरी दुनिया के क्रिकेट जगत से जुड़े लोगों को कायल करने वाले सूर्यवंशी पर अब इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट सक्सेस फॉर्मूला डिकोड करेगा. इसका ऐलान करते हुए संस्थान के डायरेक्टर हिमांशु रॉय ने एक वीडियो बनाकर बताया इस पूरी स्टडी के दौरान वैभव की उपलब्धि का विश्लेषण और उसके साथ सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, पारिवारिक व संस्थागत कारकों को भी गहराई से समझने का प्रयास किया जाएगा.

वैभव के प्रदर्शन को डायरेक्टर ने सराहा

इस संबंध में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के डायरेक्टर हिमांशु रॉय ने अपने वीडियो में बताया कि वैभव की पूरी क्रिकेट जर्नी काफी अद्भुत है, जिसके पीछे समर्पण, मेंटर का योगदान और कड़ी मेहनत भी शामिल है. उन्होंने आगे कहा कि मात्र 15 वर्ष की उम्र में जिस आत्मविश्वास और कौशल के साथ वैभव ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है, वह दिखाता है कि असाधारण प्रतिभा को अगर वातावरण और मार्गदर्शन के अवसर प्राप्त हो, तो वह असाधारण प्रमाण दे सकती है.

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डायरेक्टर रॉय ने कहा कि इसी के साथ असाधारण क्षमता रखने वाले युवा अपेक्षाओं के अत्यधिक बोझ और मानसिक थकान के कारण अपनी पूर्ण क्षमता तक नहीं पहुंच पाते हैं. पहले ही बर्न आउट हो जाते हैं. इसीलिए प्रतिभा का संरक्षण और मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और पूर्ण विकास को उतनी ही प्राथमिकता देनी चाहिए, जितनी उनकी उपलब्धि को .

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