- MP के हरदा जिले के केंद्रीय विद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हो रही.
- अभिभावकों का आरोप है कि सात पीरियड वाले दिन में कई बार केवल एक पीरियड ही प्रभावी रूप से संचालित होता है.
- 11वीं कक्षा के विद्यार्थियों को मोबाइल के माध्यम से होमवर्क भेजा जाता है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
केंद्रीय विद्यालयों को देश में बेहतर शिक्षा व्यवस्था और अनुशासित शैक्षणिक माहौल के लिए जाना जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के हरदा जिले से सामने आई एक शिकायत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां केंद्रीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षकों की कमी की वजह से पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है. हालात ऐसे हैं कि बच्चों को कक्षा में पढ़ाने के बजाय मोबाइल पर होमवर्क भेजा जा रहा है. पालकों का कहना है कि स्कूल में नियमित पढ़ाई नहीं हो पा रही, जिससे विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होने लगा है.
हरदा के केंद्रीय विद्यालय में शिक्षकों की कमी को लेकर अभिभावकों की नाराजगी खुलकर सामने आई है. मंगलवार को बड़ी संख्या में पालक जिला पंचायत की जनसुनवाई में पहुंचे और कलेक्टर तथा जिला पंचायत सीईओ अंजलि जोसेफ को ज्ञापन सौंपा. उन्होंने शिकायत करते हुए कहा कि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई का स्तर लगातार गिर रहा है.
सात में से केवल एक पीरियड में पढ़ाई
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल में नियमित कक्षाएं नहीं लग पा रही हैं. उनका कहना है कि सात पीरियड वाले शैक्षणिक दिन में कई बार केवल एक पीरियड ही प्रभावी रूप से संचालित होता है, जबकि बाकी समय बच्चों को पढ़ाई से वंचित रहना पड़ता है. ऐसे में विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम समय पर पूरा होना भी बड़ी चुनौती बन गया है.
मोबाइल पर भेजा जा रहा होमवर्क
पालकों के अनुसार, शिक्षकों की कमी का सबसे ज्यादा असर ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों पर पड़ रहा है. उनका कहना है कि कई विषयों का होमवर्क मोबाइल के माध्यम से भेजा जाता है. आरोप है कि छोटे अक्षरों में भेजी गई अध्ययन सामग्री को समझने में छात्रों को परेशानी होती है. इसके लिए उन्हें यूट्यूब और अन्य ऑनलाइन स्रोतों का सहारा लेना पड़ता है. अभिभावकों का मानना है कि इससे बच्चों का मोबाइल स्क्रीन टाइम बढ़ रहा है, जिसका असर उनकी पढ़ाई के साथ-साथ आंखों की सेहत पर भी पड़ सकता है.
शिकायत पर स्कूल बदलने की सलाह देने का आरोप
कुछ अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने स्कूल प्रबंधन से पढ़ाई की स्थिति को लेकर शिकायत की, तो उन्हें बच्चों का दूसरे विद्यालय में प्रवेश कराने की सलाह दी गई. इस बात को लेकर पालकों में और ज्यादा नाराजगी है. उनका कहना है कि समस्या का समाधान करने के बजाय जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जा रही है.
अभिभावकों ने मांग की है कि स्कूल में जल्द से जल्द पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की जाए. उनका कहना है कि बच्चों को कक्षा में नियमित और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई मिले, होमवर्क की सही तरीके से जांच हो और पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान शिक्षण व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित की जाए.
स्कूल में 21 शिक्षक, फिर भी उठ रहे सवाल
जानकारी के अनुसार हरदा केंद्रीय विद्यालय में पहली से ग्यारहवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है और यहां कुल 21 शिक्षक पदस्थ हैं. इसके बावजूद अभिभावकों द्वारा शिक्षकों की कमी और पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायतें की जा रही हैं. ऐसे में अब जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत सीईओ अंजलि जोसेफ ने जांच के निर्देश दिए हैं. उन्होंने बताया कि केंद्रीय विद्यालय संगठन को स्कूल की समस्याओं के संबंध में पत्र भेजा जा रहा है. साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी डीएस रघुवंशी को विद्यालय भेजकर पालकों की शिकायतों की जांच करने और स्कूल प्रबंधन से चर्चा के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं.
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