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भोजशाला के गेट पर लगाया “गैर हिंदुओं का प्रवेश निषेध” लिखा पोस्टर, विवाद की सूचना पर पहुंची पुलिस

Dhar Bhojshala Poster Controversy: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के मुख्य गेट पर “गैर हिंदुओं का प्रवेश निषेध” का पोस्टर लगाए जाने से हड़कंप मच गया है. विवाद की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और विवादित पोस्टर को हटा दिया.  

भोजशाला के गेट पर लगाया “गैर हिंदुओं का प्रवेश निषेध” लिखा पोस्टर, विवाद की सूचना पर पहुंची पुलिस
Dhar Bhojshala "Non-Hindus Entry Prohibited" Poster on Gate.

Dhar Bhojshala "Non-Hindus Entry Prohibited" Poster on Gate: धार की ऐतिहासिक भोजशाला में संध्या आरती के बाद उस समय विवाद की स्थिति बन गई, जब भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने “गैर हिंदुओं का प्रवेश निषेध” लिखा पोस्टर मुख्य गेट पर लगा दिया. सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और पोस्टर हटवा दिया. 

संयोजक शर्मा बोले- हिंदू रीति के अनुसार ही प्रवेश दिया जाए  

जानकारी के अनुसार, भोजशाला परिसर में संध्या आरती के बाद भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा हाथ में पोस्टर लेकर मुख्य द्वार पर पहुंचे. उन्होंने “गैर हिंदुओं का प्रवेश निषेध” लिखा पोस्टर गेट पर लगाया. इसके बाद मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि अब भोजशाला में गैर हिंदुओं का प्रवेश पूर्ण रूप से प्रतिबंधित होना चाहिए. गोपाल शर्मा ने कहा कि अगर, कोई गैर हिंदू भोजशाला में प्रवेश करना चाहता है तो उसे हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार ही प्रवेश दिया जाना चाहिए. इस घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे.

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पुलिस ने पोस्टर हटवाया 

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने गेट पर लगाए गए पोस्टर को हटाया और स्थिति को शांत कराया. घटना के दौरान परिसर में मौजूद लोगों की भीड़ के बीच कुछ देर तक हलचल का माहौल बना रहा. प्रशासन ने लोगों से शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है. 

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15 मई को हाईकोर्ट ने भोजशाला को मंदिर करार दिया था

बता दें कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का धार भोजशाला को लेकर  15 मई को फैसला आया था. जिसमें कोर्ट ने इसे मंदिर करार दिया था. कोर्ट के आदेश के अनुसार, भोजशाला एएसआई के संरक्षण में ही रहेगी. कोर्ट के फैसले के बाद शनिवार 16 मई को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने एक आदेश जारी कर भोजशाला को देवी वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर और एक संरक्षित स्मारक बताया था.

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