भोजशाला- कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में इंदौर हाईकोर्ट में मंगलवार यानी आज अंतिम बहस होगी. सोमवार को मुस्लिम पक्ष ने ASI सर्वे रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए. साथ ही मुस्लिम पक्ष ने कहा कि भोजशाला स्थल पर मंदिर होने के ठोस प्रमाण नहीं हैं.
दरअसल, सोमवार को इंदौर हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और शोभा मेनन ने पैरवी करते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट पर कई गंभीर सवाल उठाए. मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और अन्य वकीलों ने ASI सर्वे प्रक्रिया को गलत बताते हुए रिपोर्ट की वैधता पर सवाल उठाए. मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि भोजशाला स्थल पर मंदिर होने के ठोस प्रमाण नहीं हैं और 1935 के गजट नोटिफिकेशन के आधार पर यहां नमाज की अनुमति पहले से मान्य है. इस बीच जैन समाज ने भी भोजशाला को अपना प्राचीन गुरुकुल और तीर्थ स्थल बताते हुए दावा पेश किया है.
2022 में दायर हुई थी याचिका
बता दें कि साल 2022 में हिंदू फ्रंट ऑफ जस्टिस ने धार स्थित भोजशाला को लेकर एक याचिका दायर की थी. इसमें कहा गया था कि यह हिंदू राजा द्वारा बनवाया गया यह मंदिर है. याचिका में भोजशाला में नमाज की अनुमति निरस्त कर सरस्वती देवी की मूर्ति फिर स्थापित करने की मांग की गई थी. इसके बाद हाईकोर्ट ने ASI को वैज्ञानिक सर्वे कराने के निर्देश दिए थे. बाद में अन्य पक्षकार भी इस मामले में शामिल हुए.
मुस्लिम पक्ष ने रिपोर्ट को ले कर क्या कहा?
धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से पेश वकीलों ने कोर्ट में कहा कि एएसआई ने अपनी पूरी रिपोर्ट में 'भोजशाला मंदिर' शब्द का इस्तेमाल किया, जबकि ऐसा साबित करने वाला कोई ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद नहीं है. मुस्लिम पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि ASI की रिपोर्ट हिंदू पक्ष के दावों को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार की गई और इसके निष्कर्षों का कोई कानूनी आधार नहीं है. मुस्लिम पक्ष ने यह भी कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि विवादित परिसर मंदिर है, मस्जिद है या जैन शाला... यदि यह मंदिर होता तो वहां मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होती, जबकि परिसर में ऐसी कोई स्थिति नहीं है.
भोजशाला का इतिहास
इतिहासकार के अनुसार, भोजशाला को परमार कालीन माना जाता है. दरअसल, परमार राजवंश के सबसे बड़े शासक राजा भोज (Raja Bhoj) शिक्षा और साहित्य के अनन्य उपासक थे. वहीं राजा भोज ने 1034 ईं. में धार में सरस्वती सदन के रूप में भोजशाला रूपी महाविद्यालय की स्थापना की थी. यहां देश-विदेश से छात्र शिक्षा ग्रहण करने आते थे. वहीं भोजशाला में मां सरस्वती वाग्देवी की मूर्ति भी स्थापित की गई थी.
1456 में भोजशाला को ढाह दिया गया
13वीं और 14वीं सदी में मुगल शासन के दौरान भोजशाला को मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया था. 1456 ईं. में महमूद खिलजी ने भोजशाला में मौलाना कमालुद्दीन (Maulana Kamaluddin) के मकबरे और दरगाह का निर्माण कराया.
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