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Dhar Bhojshala Controversy: पूजा या नमाज... SC करेगा फैसला, बसंत पंचमी से पहले भोजशाला में सत्याग्रह, आगे क्या?

Dhar Bhojshala Controversy: बसंत पंचमी 2026 शुक्रवार को पड़ने से धार की भोजशाला एक बार फिर विवाद में है. हिंदू पक्ष पूरे दिन सरस्वती पूजा चाहता है, जबकि मुस्लिम समाज जुमे की नमाज की बात कर रहा है. प्रशासन अलर्ट है और दोनों पक्षों से बातचीत चल रही है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 22 जनवरी को तय की है.  

Dhar Bhojshala Controversy: पूजा या नमाज... SC करेगा फैसला, बसंत पंचमी से पहले भोजशाला में सत्याग्रह, आगे क्या?
Dhar Bhojshala controversy: सुप्रीम कोर्ट बसंत पंचमी से पहले 22 जनवरी को करेगा सुनवाई.

Basant Panchami 2026: मध्य प्रदेश का धार जिला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इस बार बसंत पंचमी का पर्व (Basant Panchami 2026) 23 जनवरी शुक्रवार को पड़ रहा है. ऐसे में जिले के विवादित धार्मिक स्थल भोजशाला (कमाल मौला मस्जिद) को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. शुक्रवार का दिन मुस्लिम समाज के लिए खास होता है और इस दिन जुमे की नामज अदा की जाती है, लेकिन इस बार शुक्रवार को ही बसंत पंचमी पड़ने से मामला उलझ गया है. क्योंकि बसंत पंचमी पर हिंदू समाज को भोजशाला में पूरे दिन पूजा करने की इजाजत है. ऐसे में माहौल थोड़ा तनावपूर्ण बना हुआ है. आइए, विस्तार से जानते हैं क्या है मामला?  

दरअसल, धार स्थित भोजशाला में नियमित सत्याग्रह चल रहा है. आज बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग इसमें शामिल होने पहुंचे हैं. मंलगवार होने के कारण भी भक्तों की संख्या में इजाफा हुआ है. इस दौरान भोजशाला के गर्भगृह में मां वाग्देवी का चित्र स्थापित कर हनुमान चालीसा का पाठ किया गया और बसंत पंचमी पर अखंड पूजा का संकल्प लिया गया. इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद रही. नियमित सत्याग्रह में जिला भाजपा अध्यक्ष निलेश भारती, पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष राजीव यादव भी शामिल हुए. 

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Dhar Bhojshala: क्या भोजशाला के लिए समय नहीं?  

सत्याग्रह में शामिल होने आए देश के प्रसिद्ध कवि पंडित संदीप शर्मा ने कहा कि धार में कोई तनाव नहीं है, यहां भ्रम की स्थिति बनाकर रखी गई है. यह हमारा दुर्भाग्य है कि पिछले 50 साल से भोजशाला मुद्दे को लटकाया जा रहा है. जब एक आतंकवादी के लिए आधी रात को सुप्रीम कोर्ट खुलता है और डिसीजन दिया जाता है तो क्या धार की भोजशाला के लिए न्यायालय के पास समय नहीं है या फिर इस मुद्दे को लटकाए रखना है. 

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Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी को लेकर प्रशासन अलर्ट 

इस पूरे मामले को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट है. सत्याग्रह के दौरान भी पुलिस की व्यवस्था चाक-चौबंद रही. साथ ही पूरे परिसर में भी सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं. जिला प्रशासन की ओर से हिंदू और मुस्लिम पक्ष के साथ अलग-अजग बैठक भी की है. मुसलिम पक्ष शुक्रवार को सांकेतिक नामज करने की बात कह रहा है. यानी नमाज में सीमित लोग ही शामिल हों. वहीं, हिंदू पक्ष सिर्फ पूजा कराने की बात कही है.    

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सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार, तारीख दी 

इधर, भोजशाला विवाद को लेकर हिंदू पक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. कोर्ट की ओर से सुनवाई की तारीख 22 जनवरी तय की है, यानी बसंत पंचमी से एक दिन पहले. हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बसंत पंचमी पूजा को लेकर सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की थी. इसके बाद CJI सूर्यकांत ने गुरुवार को सुनवाई की तारीख तय की. याचिका में 23 जनवरी शुक्रवार को नमाज़ पर रोक लगाने की मांग की गई है. इस दिन सिर्फ हिंदुओं के लिए सरस्वती पूजा की इजाजत मांगी गई है. साथ मांग की गई है कि ASI और सरकार को कड़ी सुरक्षा देने के निर्देश भी दिए जाएं. 

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2003 से सत्याग्रह जारी 

बात दें कि भोजशाला की मुक्ति और मां वाग्देवी की स्थापना को लेकर साल 2003 से गर्भगृह में नियमित सत्याग्रह किया जा रहा है. हिंदू पक्ष का कहना है कि भोजशाला परिसर में मां वागदेवी यानी सरस्वती माता का मंदिर है, जिसे 11वीं सदी में परमार राजा ने बनवाया था. यहां हिंदू पूजा करते थे. लेकिन, अप्रैल 2003 में ASI ने एक आदेश जारी किया, जिसके तहत हिंदुओं को हर मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन पूजा की इजाजत दी गई. वहीं मुस्लिम समाज को शुक्रवार को दोपहर 1-3 बजे तक नमाज़ अदा करने की इजाजत दी गई् थी.  

धार भोजशाला का इतिहास 

  • 1034 में राजा भोज ने कराया भोजशाला निर्माण 
  • 1456 में महमूद खिलजी ने भोजशाला को ढहाकर मकबरा बनाया 
  • 1933 में राजा आनंद राव की तबीयत बिगड़ी तो मुस्लिम समाज को नजाम की अनुमति मिली 
  • 1902 में हुए सर्वे में भोजशाला में हिंदू चिन्ह, संस्कृत के शब्द आदि पाए गए, लॉर्ड कर्जन ने रखरखाव के लिए 50 हजार रुपये मंजूर किए 
  • 1951 में भोजशाला को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया   
  • 1997 में भोजशाला में आम नागरिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया 
  • 2003 में हिंदुओं को मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन पूजा और मुस्लिम समाज को शुक्रवार को दोपहर 1-3 बजे नमाज़ की इजाजत दी गई

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