Collector Namrata Jain reached Rekavaya village: अबूझमाड़ एक ऐसा इलाका जहां की पहेलियां अब सुलझने लगी हैं. कल तक जहां नक्सलियों का 'आतंकी सिलेबस' पढ़ाया जाता था, आज वहां गणतंत्र का परचम लहरा रहा है. नारायणपुर की कलेक्टर नम्रता जैन ने इतिहास रच दिया है. वो जिले के अंतिम छोर और इंद्रावती रिजर्व फॉरेस्ट के घने जंगलों में स्थित ग्राम रेकावाया पहुंचने वाली पहली जिलाधीश बन गई हैं. कभी नक्सलियों का अभेद्य किला रहा यह गांव, अब विकास की मुख्यधारा से हाथ मिला रहा है.
बीजापुर जिले की सीमा पर बसा नारायणपुर के अबूझमाड़ का रेकावाया गांव... आज से महज एक साल पहले तक यहां की हकीकत डराने वाली थी. नक्सली यहां बकायदा अपनी 'आतंकी पाठशाला' और 'भूमकाल छात्रावास' चलाते थे. अबूझमाड़ के मासूम बच्चों को जबरन भर्ती कर उन्हें बंदूक पकड़ना सिखाया जाता था. गांव में बने नक्सली स्मारक गवाही देते हैं कि यहां कभी लाल आतंक का एकछत्र राज था, लेकिन आज वक्त का पहिया घूम चुका है. जब कलेक्टर नम्रता जैन इस सुदूर अंचल में पहुंचीं, तो नजारा देखने लायक था.
पारंपरिक संस्कृति के साथ किया गया स्वागत
ग्रामीणों ने अपनी पारंपरिक संस्कृति के साथ, महुआ फूलों की माला पहनाकर उनका आत्मीय स्वागत किया. सालों से अलग-थलग रहे इन आदिवासियों के लिए यह सिर्फ एक प्रशासनिक दौरा नहीं, बल्कि 'लोकतंत्र' का उनके घर तक पहुंचना था. स्थानीय महिलाओं ने गोंडी भाषा में स्वागत गीत गाकर अपनी खुशी का इजहार किया. जहां कभी नफरत की विचारधारा बोई जाती थी, आज उसी जगह कलेक्टर ने 'नवीन आश्रम शाला भवन' का लोकार्पण किया.
बच्चों के भविष्य पर की चर्चा
कलेक्टर ने न केवल भवन का अवलोकन किया, बल्कि बच्चों के बीच बैठकर उनकी पढ़ाई और भविष्य के सपनों पर चर्चा की. आंगनवाड़ी के नन्हे बच्चों का अनुशासन देखकर कलेक्टर भी दंग रह गईं. युवाओं को खेल सामग्री और बच्चों को किताबें सौंपकर प्रशासन ने यह साफ कर दिया कि अब कलम, बंदूक पर भारी पड़ेगी.
ग्रामीणों ने रायपुर घूमने की जताई इच्छा
जन चौपाल के दौरान ग्रामीणों की आंखों में विकास की भूख दिखी. उन्होंने सीधे कलेक्टर से सड़क, मोबाइल नेटवर्क, राशन और 'महतारी वंदन योजना' का लाभ दिलाने की मांग की, लेकिन सबसे चौंकाने वाली और सुखद मांग वह थी, जब ग्रामीणों ने अपनी 'पुश्तैनी सरहद' से बाहर निकलकर राजधानी रायपुर घूमने और 'विधानसभा भवन' देखने की इच्छा जताई. कलेक्टर ने भी बिना देर किए अधिकारियों को ग्रामीणों के रायपुर भ्रमण की तैयारी करने के निर्देश दे दिए.
रेकावाया की ये तस्वीरें गवाही दे रही हैं कि अबूझमाड़ अब नक्सलवाद के काले अध्याय को अलविदा कह चुका है. जब एक ग्रामीण राजधानी देखने की इच्छा जताता है, तो समझ लीजिए कि नक्सलवाद की दीवारें ढह चुकी हैं. कलेक्टर नम्रता जैन की यह पहल नारायणपुर की बदलती तस्वीर का सबसे सशक्त हस्ताक्षर है.
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