lithium tin mining: नक्सलियों के साए से निकलकर छत्तीसगढ़ आज देश का प्रमुख खनिज उत्पादक राज्य बन गया है. गैर-ईंधन खनिजों के उत्पादन में ओडिशा के बाद छत्तीसगढ़ देश के शीर्ष राज्यों में शामिल हो चुका है. यह भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां टिन अयस्क का व्यावसायिक उत्पादन हो रहा है.
अब यहां जल्द ही देश का पहला लिथियम ब्लॉक भी चालू होने जा रहा है. नीलाम किए गए 65 खनिज ब्लॉकों से छत्तीसगढ़ को आगामी 50 साल में ₹4 लाख करोड़ का भारी-भरकम राजस्व मिलने का अनुमान सरकार की ओर से जताया गया है.
चीन और मलेशिया जैसे देशों पर निर्भरता होगी कम

chhattisgarh lithium tin mining: छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र टिन उत्पादक राज्य, यहां अब लिथियम खदान भी चालू होने जा रही है.
देश की जरूरत और प्रदेश का विकास
दरअसल, छत्तीसगढ़ अपनी प्राकृतिक संपदा की दम पर देश की अर्थव्यवस्था और खनिज जरूरतों को पूरा कर खुद का विकास कर रहा है. कोयला और लोहा ही नहीं, सेमीकंडक्टर और ईवी इंडस्ट्री के लिए जरूरी 'क्रिटिकल मिनरल्स' तक प्रदेश की धरती से निकलता है.
डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) के तहत प्रदेश की हर खदान से मिलने वाली रॉयल्टी के एक हिस्से का उपयोग स्थानीय प्रभावित क्षेत्रों के विकास में लगाया जाता है. यह कानूनी रूप से जरूरी है कि कम से कम 60 फीसदी डीएमएफ फंड का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और वनीकरण जैसी अन्य जरूरतों पर खर्च किया जाए.
Shri Vishnu Deo Sai, Chief Minister of Chhattisgarh, at the 8th Tranche of Critical & Strategic Mineral Blocks Roadshow in Raipur, highlighted Chhattisgarh's growing role in India's critical mineral ecosystem.
— Ministry of Mines (@MinesMinIndia) August 31, 2026
He emphasised that strengthening domestic supply chains for critical… pic.twitter.com/megfk22upy
प्रदेश के किस जिले से निकल रहा कौन सा खनिज?

Critical Minerals in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में छोटी-बड़ी 200 से अधिक खदानें और माइनिंग ब्लॉक हैं.
सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए टिन जरूरी
दंतेवाड़ा, कांकेर, बालोद और राजनांदगांव जिले की खदानें लौह अयस्क के लिए जानी जाती हैं. दंतेवाड़ा की बैलाडीला और बालोद की दल्ली-राजहरा खदान से उच्च क्वालिटी का लोह अयस्क मिलता है, जिसका निर्यात जापान तक होता है. दंतेवाड़ा और सुकमा में टिन अयस्क का व्यावसायिक खनन-उत्पादन किया जा रहा है, जो देश की एकमात्र जगह है. टिन का उपयोग सोल्डरिंग और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में होता है.
बलरामपुर में ग्रेफाइट और वैनेडियम मौजूद
बलरामपुर में ईवी बैटरी और सेमीकंडक्टर के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स ग्रेफाइट व वैनेडियम मौजूद है. महासमुंद में निकेल व क्रोमियम के नए ब्लॉक मिले हैं. महासमुंद की सोनखान ब्लॉक में सोने का खनन भी होता है. साथ ही, जशपुर की इब नदी की रेत छानकर सोना निकाला जाता है.

Chhattisgarh Mines: बलरामपुर में ईवी बैटरी और सेमीकंडक्टर के लिए जरूरी ग्रेफाइट व वैनेडियम मौजूद है.
हीरे और लिथियम का भंडार
खनिज से छत्तीसगढ़ को कितना फायदा हो रहा?
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक सितंबर 2026 को नवा रायपुर में आयोजित स्टेट माइनिंग कॉन्क्लेव में 65 खनिज ब्लॉकों के नीलामी की जानकारी दी थी. उन्होंने कहा था कि इससे प्रदेश को 50 साल में करीब 4 लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा. इससे पहले खनिज विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ ने ₹16,625 करोड़ का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त किया था, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 14 फीसदी अधिक था.
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