Chhattisgarh KCC Loan Fraud: शराब घोटाला... कोल घोटाला... DMF घोटाला... भारतमाला प्रोजेक्ट में मुआवजा घोटाला... बड़े पैमाने पर पैसों की हेरा फेरी के इन मामलों के बाद अब छत्तीसगढ़ में एक और बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है. किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के नाम पर सहकारी बैंकों से फर्जी लोन जारी कर करोड़ों की हेराफेरी की गई. शुरुआती जांच में 150 करोड़ रुपए से ज्यादा की गड़बड़ी का अंदेशा जताया गया है. यह मामला सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और जांच की तैयारी शुरू हो गई है.
कैसे हुआ घोटाला?
छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) की जांच में खुलासा हुआ कि अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों के नाम पर फर्जी लोन जारी किए गए. नियम के अनुसार, किसान को केसीसी लोन के लिए आवेदन करना होता है, लेकिन गड़बड़ी करने वालों ने बिना आवेदन के ही लोन स्वीकृत कर दिया और रकम को ‘म्यूल अकाउंट' में ट्रांसफर कर दिया. यह हेराफेरी रायपुर, भिलाई, सारंगढ़, रायगढ़ और अंबिकापुर जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर हुई.
कितनी बड़ी है गड़बड़ी?
रायपुर जिले की 17 समितियों में अनियमितता पाई गई. बरमकेला ब्लॉक में 9 महीने की जांच में ही 10 करोड़ रुपए का गबन सामने आया. बताया जा रहा है कि यह घोटाला 1 अप्रैल 2024 से दिसंबर 2025 के बीच हुआ. जिन किसानों ने कभी लोन नहीं लिया या जो अशिक्षित थे, उन्हें निशाना बनाया गया. राज्य में कुल 2058 सहकारी समितियां हैं, जिनके जरिए किसानों का रजिस्ट्रेशन होता है.
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बैंक प्रबंधन की कार्रवाई और जांच
बैंक प्रबंधन ने घोटाले की पुष्टि करते हुए कहा कि जांच ईओडब्ल्यू (EOW) को सौंपी जाएगी. बैंक के अध्यक्ष केदार गुप्ता ने बताया कि ई-केसीसी जैसी नई व्यवस्था लागू कर दी गई है ताकि फर्जी लोन पर रोक लगाई जा सके. उन्होंने दावा किया कि अब बैंकिंग प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जा रहा है. सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है.
राजनीतिक विवाद भी तेज
इस घोटाले ने सियासी तकरार को हवा दे दी है. कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि केसीसी लोन एक साल के लिए जारी होता है और राज्य में पिछले दो साल से भाजपा की सरकार है. यानी यह घोटाला भाजपा सरकार में ही हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के शासन में ऐसे घोटाले आम हो गए हैं और इसकी जांच जल्द होनी चाहिए.
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