Fraud Case: पिछले 3 साल में 39% भारतीय परिवार के साथ हुई ऑनलाइन पैसे की ठगी: सर्वे रिपोर्ट

online Financial Frauds In India: लोकलसर्किल्स के इस सर्वे में देश के 331 जिलों के 32,000 लोगों की राय ली गई. इनमें 66 प्रतिशत पुरुष और 34 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं.

Fraud Case: पिछले 3 साल में 39% भारतीय परिवार के साथ हुई ऑनलाइन पैसे की ठगी: सर्वे रिपोर्ट

online Financial Frauds In India: सर्वे में शामिल 30 प्रतिशत परिवारों में से हर परिवर का कोई एक सदस्य वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार बना है.

नई दिल्ली:

देश में एक तरफ जहां डिजिटलाइजेशन (Digitization) के दौर में ऑनलाइन पेमेंट का चलन काफी बढ़ गया है. वहीं, इसके साथ ही ऑनलाइन फ्रॉड (Online Fraud Case) के मामले भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं. देश में आए दिन ऑनलाइन धोखाधड़ी की खबरें आती रहती हैं. लोकलसर्किल्स द्वारा मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट आपको चौंका देगा. दरअसल, इस  रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि पिछले तीन साल के दौरान करीब 39 प्रतिशत भारतीय परिवार ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी (Online Financial Fraud) का शिकार बने हैं. इनमें से सिर्फ 24 प्रतिशत को ही उनका पैसा वापस मिल पाया है. 

लोकलसर्किल्स के सर्वे में 23 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे क्रेडिट या डेबिट कार्ड धोखाधड़ी का शिकार बने. वहीं 13 प्रतिशत का कहना था कि उन्हें ऑनलाइन खरीद-बिक्री साइट उपयोगकर्ताओं द्वारा धोखा दिया गया. सर्वे के अनुसार, 13 प्रतिशत लोगों का कहना था कि वेबसाइट द्वारा उनसे पैसा ले लिया गया, लेकिन प्रोडक्ट नहीं भेजा गया. जबकि 10 प्रतिशत ने कहा कि वे एटीएम कार्ड धोखाधड़ी का शिकार बने. वहीं, अन्य 10 प्रतिशत ने कहा कि उनके साथ बैंक खाता धोखाधड़ी की गई.  इसके अलावा 16 प्रतिशत ने बताया कि उन्हें कुछ अन्य तरीके से चूना लगाया गया.

आंकड़ों से पता चलता है कि सर्वे में शामिल 30 प्रतिशत परिवारों में से हर परिवर का कोई एक सदस्य वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार बना है. वहीं, नौ प्रतिशत ने कहा कि उनके परिवार के कई सदस्य इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार बने हैं. इसके अलावा 57 प्रतिशत का कहना था कि वे और उनके परिवार का कोई भी सदस्य इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार बनने से बच गए.  इस बारे में  सर्वे में शामिल चार प्रतिशत ने स्पष्ट रूप से अपनी राय नहीं बताई.

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सर्वे में देश के 331 जिलों के 32,000 लोगों की राय ली गई. इनमें 66 प्रतिशत पुरुष और 34 प्रतिशत महिलाएं थीं. सर्वे में शामिल 39 प्रतिशत लोग पहली श्रेणी के शहरों से, 35 प्रतिशत दूसरी श्रेणी और 26 प्रतिशत तीसरी और चौथी श्रेणी के शहरों और ग्रामीण जिलों के थे.