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धीरेंद्र शास्त्री का छलका दर्द, बोले-यहां हमसे फल-फूल रहा होटल कारोबार, तो हमसे क्यों लेते हो पूरे बिल?

Pandit Dhirendra Shartri: बागेश्वर धाम में कथा के दौरान पं. धीरेद्र शास्त्री ने दिल का गुबार निकालते हुए खजुराहो के कुछ होटल कारोबारियों पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए. होटल कारोबारियों से सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की अपील करते हुए उन्होंने कहा,' हम नहीं चाहते कि कोई मुफ्त में सुविधा दे, पर जिनका धंधा हमसे चलता है, तो उन्हें भी समाज के लिए कुछ करना चाहिए.

धीरेंद्र शास्त्री का छलका दर्द, बोले-यहां हमसे फल-फूल रहा होटल कारोबार, तो हमसे क्यों लेते हो पूरे बिल?
PANDIT DHIRENDRA SHASHTRI EXPRESSED PAIN OVER KHAJURAHO HOTEL OWNERS

Bageshwar Dham Sarkar: बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने गुरुवार को खजुराहो होटल कारोबारियों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने खजुराहो के होटल व्यवसायों को संबोधित करते हुए अपनी पीड़ा जताई और कारोबारियों से सामाजिक सहयोग करने की अपील की. उन्होंन कहा कि बागेश्वर धाम में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के कारण उनका होटलों का व्यवसाय फल-फूल रहा है, बावजूद इसके जब धाम से जुड़े लोग उनके होटलों में जाते हैं, तो उन्हें पूरा बिल थमा दिया जाता है और किसी प्रकार की सहायता या सहयोग नहीं किया जाता है. 

बागेश्वर धाम में कथा के दौरान पं. धीरेद्र शास्त्री ने दिल का गुबार निकालते हुए खजुराहो के कुछ होटल कारोबारियों पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए. होटल कारोबारियों से सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की अपील करते हुए उन्होंने कहा,' हम नहीं चाहते कि कोई मुफ्त में सुविधा दे, पर जिनका धंधा हमसे चलता है, तो उन्हें भी समाज के लिए कुछ करना चाहिए.

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होटल कारोबारियों से कन्याओं के विवाह में सहयोग की अपील

पं.धीरेंद्र शास्त्री ने होटल संचालकों से व्यक्तिगत निवेदन करते हुए कहा कि अगर वे कन्याओं के विवाह में सहयोग करें, तो यह एक बड़ा सामाजिक पुण्य होगा. उन्होंने सुझाव दिया कि, हर होटल यदि कम से कम एक कन्या के विवाह की जिम्मेदारी ले या विवाह प्रबंधन में सहयोग करे, तो इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और जरूरतमंद परिवारों को बड़ा सहारा मिलेगा.

300 कन्याओं का सामूहिक विवाह करवा रहे हैं धीरेंद्र शास्त्री

गौरतलब है बागेश्वर धाम सरकार का यह बयान उस समय आया है जब पं. धीरेंद्र शास्त्री 300 कन्याओं का सामूहिक विवाह का आयोजन करवा रहे हैं. माना जा रहा है कि उनका यह बयान किसी विवाद के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता और संवेदनशीलता की भावना से दिया गया है. बाबा बागेश्वर ने स्पष्ट किया कि धर्म और आस्था से जुड़े स्थलों से लाभ उठाने वालों को समाज के कमजोर वर्गों के लिए भी आगे आना चाहिए.

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धीरेंद्र शास्त्री ने युवाओं से हिंदुत्व की रक्षा के लिए युवाओं को सनातन के सिपाही बनने और जरूरत पड़ने पर धर्म की रक्षा के लिए तैयार रहने को कहा. वहीं, भाले का महत्व समझाते हुए कहा कि "भाला" आत्मरक्षा और धर्म की रक्षा के प्रतीक है, जिसका अर्थ है अन्याय के खिलाफ खड़ा होना, क्योंकि केवल भक्ति पर्याप्त नहीं है, रक्षा के लिए शक्ति भी जरूरी है.

"माला और भाला" दोनों साथ में रखने का मंत्र दिया

बागेश्वर धाम सरकार ने शुक्रवार को दिए एक और बयान में साफ-साफ कहा कि सनातन धर्म की रक्षा और हिंदुत्व को मजबूती देने के लिए "माला और भाला" दोनों साथ में रखने का मंत्र दिया. उनका कहना है कि जब भक्तों के हाथ में आध्यात्मिक ज्ञान (माला) के साथ-साथ दुष्टों के विनाश के लिए रक्षात्मक शस्त्र (भाला) होगा, तभी देश और धर्म सुरक्षित रह सकते हैं. 

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