- राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य में अवैध रेत खनन रोकते समय वन आरक्षक की ट्रैक्टर चालक ने कुचलकर हत्या कर दी.
- चंबल नदी के लगभग चार सौ पैंतीस किलोमीटर क्षेत्र में रेत और मिट्टी का खनन और परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित है.
- रेत खनन रोकने के बाद पुलिस ने दो वाहन मालिकों को गिरफ्तार कर मुख्य आरोपी चालक की तलाश जारी रखी है.
Supreme Court Notice Sand Mining: राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य में अवैध रेत खनन रोकते समय एक वन आरक्षक ने अपनी जान की आहुति दे दी. इस घटना के सामने आते ही मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने के बाद मध्यप्रदेश में पुलिस और वन विभाग में हड़कंप मच गया है. प्रशासन ने जिम्मेदारों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है और अवैध रेत कारोबार पर कार्रवाई तेज की गई है.
अवैध रेत खनन रोकते हुए शहीद हुआ वन आरक्षक
यह घटना मुरैना जिले की चंबल नदी से जुड़ी है. 8 अप्रैल की सुबह वन विभाग की गश्ती टीम ने कुथियाना घाट से अवैध रूप से रेत ले जा रहे एक ट्रैक्टर‑ट्रॉली को राष्ट्रीय राजमार्ग 552 के रानपुर तिराहे पर रोकने की कोशिश की थी. इसी दौरान ट्रैक्टर चालक ने वन आरक्षक हरिकेश गुर्जर को कुचल दिया और वाहन लेकर फरार हो गया. गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.
कानूनन प्रतिबंध के बावजूद जारी अवैध कारोबार
राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य के करीब 435 किलोमीटर क्षेत्र में रेत और मिट्टी का खनन व परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित है. इस पर ग्वालियर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश भी लागू हैं. इसके बावजूद मुरैना जिले में चंबल नदी के एक दर्जन से ज्यादा घाटों पर रसूखदार और बाहुबली लोग खुलेआम अवैध रेत कारोबार कर रहे थे.
पुलिस ने दो वाहन मालिकों को किया गिरफ्तार
वन आरक्षक की मौत के बाद मामले में हत्या का केस दर्ज किया गया. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ट्रैक्टर‑ट्रॉली के मालिक सोनू चौहान और पवन तोमर को भी आरोपी बनाया गया. पुलिस ने तीसरे दिन सोनू चौहान और पांचवें दिन पवन तोमर को गिरफ्तार कर लिया है. मुख्य आरोपी चालक की तलाश में पुलिस के कई दल लगातार दबिश दे रहे हैं.
टास्क फोर्स ने रेत घाटों पर शुरू की कार्रवाई
घटना के बाद चंबल नदी के कई रेत घाटों पर टास्क फोर्स की कार्रवाई तेज कर दी गई है. जहां‑जहां नदी किनारे अवैध रूप से रेत जमा की गई थी, वहां उसका नष्टिकरण किया जा रहा है. कुछ घाटों पर अब अवैध रेत कारोबारी नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे साफ है कि कार्रवाई का असर दिखने लगा है.
रेत माफिया से जलीय जीवों को भी गंभीर नुकसान
अवैध खनन ने चंबल नदी की पारिस्थितिकी को भारी नुकसान पहुंचाया है. कई घाटों पर हजारों ट्रॉली रेत निकाले जाने से नदी की तलहटी में गहरे गड्ढे बन गए हैं. जलीय जीवों, खासकर घड़ियाल और डाल्फिन जैसे दुर्लभ जीवों के प्राकृतिक आवास लगातार नष्ट हुए हैं. इससे पर्यटकों को भी इन जीवों के दर्शन मुश्किल से हो पा रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद प्रशासन सतर्क
वन आरक्षक की हत्या का मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में आने के बाद राज्य प्रशासन हरकत में आ गया है. चंबल क्षेत्र में बीते 45 वर्षों के घटनाक्रम की जानकारी राज्य मुख्यालय भेजी गई है. पुलिस जांच की रफ्तार तेज कर दी गई है और अधिकांश अधिकारी इस मामले को प्राथमिकता पर लेते दिख रहे हैं. वन विभाग ने माना है कि अवैध रेत कारोबारियों के सामने मौजूदा संसाधन नाकाफी साबित हो रहे हैं. विभाग ने शासन से अतिरिक्त बल और जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.
ये भी पढ़ें-
15 हजार पत्नी को देते रहिए और खुश रहिए... सुप्रीम कोर्ट ने तलाक मांग रहे पति को दी सलाह
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं