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This Article is From Mar 13, 2026

अरावली के बाद चंबल में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, स्वत: संज्ञान लेकर जताई चिंता

चंबल अभयारण्य एक लंबे अरसे से रेत माफियाओं और अवैध खनन की गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है, जिसे रोकने में अब तक की चुनौतियां चिंताजनक रही हैं.

अरावली के बाद चंबल में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, स्वत: संज्ञान लेकर जताई चिंता

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में धड़ल्ले से हो रहे अवैध रेत खनन के मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है. कोर्ट ने इस संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र और वहां रहने वाले दुर्लभ वन्यजीवों पर मंडराते खतरे को देखते हुए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है. चंबल का यह संरक्षित क्षेत्र लंबे समय से अवैध खनन की गंभीर समस्या से जूझ रहा है. 


जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने स्पष्ट किया कि बड़े पैमाने पर हो रहा अवैध खनन वहां के लुप्तप्राय और दुर्लभ वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है. कोर्ट के अनुसार, चंबल क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र अत्यंत संवेदनशील है, और अवैध खनन की गतिविधियां इसे स्थाई नुकसान पहुंचा रही हैं. चंबल अभयारण्य एक लंबे अरसे से रेत माफियाओं और अवैध खनन की गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है, जिसे रोकने में अब तक की चुनौतियां चिंताजनक रही हैं.

बेंच ने कहा, "हमने आज राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और खतरे में पड़ी जलीय वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर संज्ञान लिया है. हमने हाल की कुछ अख़बारों की रिपोर्टों और CSR द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर गौर किया है. ⁠इन रिपोर्टों में बताया गया है कि जिन पूरे संरक्षित क्षेत्रों में घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम चल रहा है."


बेंच ने आगे कहा कि ⁠वहां बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है. इस खनन के कारण घड़ियालों को अपनी जगह बदलनी पड़ रही है. यहां तक कि जिन क्षेत्रों में मुख्यमंत्री ने घड़ियालों को छोड़ा था, वे क्षेत्र भी अब अवैध खनन की चपेट में आ गए हैं. ⁠इस मामले को आवश्यक निर्देशों के लिए माननीय मुख्य न्यायाधीश (CJI) के समक्ष रखा जाएगा.
 

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