Bhopal Slaughterhouse Beef Controversy: भोपाल नगर निगम (BMC) परिषद की बैठक की शुरुआत होते ही स्लॉटर हाउस का मामला गूंज उठा. कांग्रेस पार्षदों ने भोपाल निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी की आसंदी घेरते हुए महापौर के इस्तीफे की मांग तेज कर दी. अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने आश्वासन दिया कि “कोई भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा. सभी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी.” सूर्यवंशी ने कहा कि संबंधित फर्म को लाइफ टाइम ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और निगम के किसी काम में भागीदारी नहीं करने दी जाएगी. इस मामले से जुड़े 11 निगम कर्मचारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए गए. उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की बात कही. साथ ही राजधानी भोपाल से सभी स्लॉटर हाउस स्थायी रूप से बंद करने के निर्देश आयुक्त को दिए गए.
भोपाल को मांस की मंडी नहीं बनने देंगे : किशन सूर्यवंशी
इस बीच भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने परिषद हॉल में अपना इस्तीफ़ा सौंपते हुए कहा, “यह मेरी नैतिक ज़िम्मेदारी है. भोपाल निगम में इतनी गौ हत्या हमारे नाक के नीचे कैसे हुई? जब तक जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई पूरी नहीं होगी, मैं इस्तीफ़ा वापस नहीं लूंगा.” उन्होंने 30 मिनट का समय देते हुए वॉकआउट किया और मीडिया से बात करते हुए भावुक हो गए. “ऐसा कृत्य भोपाल में हुआ, मैं शर्मिंदा हूँ.” वहीं सूर्यवंशी ने स्पष्ट किया कि राजधानी भोपाल को मास की मंडी नहीं बनने देंगे. राजधानी भोपाल से सभी स्लॉटर हाउस स्थाई रूप से बंद हो इसे आयुक्त सुनिश्चित करें. गौ मांस को भैंस का मांस बताने वाले नगर निगम के डॉक्टर बेनी प्रसाद गौर पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए.
मंत्री ने क्या कहा?
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने निगम को आदेश दिए कि डॉक्टर को तत्काल निलंबित कर जांच की जाए.
मंत्री ने कहा “इस मामले में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी.”
विपक्ष ने क्या कहा?
भोपाल नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष साबिस्ता ने कहा कि "भाजपा पार्षद ने आज उठाया मुद्दा हमने पिछली परिषद की बैठक में उठाया था ये मुद्दा. बिना परिषद में संकल्प लाएं कैसे पारित किया? लेकिन इस बात को मेयर ने हवा में उड़ा दिया. लेकिन आज इतना बड़ा कांड हो गया इन सब के पीछे उनकी यही साजिश थी. मेयर इन काउंसिल की जिम्मेदारी बनती थी कि उनको फाइल पढ़ना चाहिए थी. उन्होंने बिना पार्षदों के कैसे 20 साल की लीज पर दे दी? आज सभी पार्षद एक ज़ुबान हैं. अध्यक्ष जी ने आसान दी से व्यवस्था दी है लेकिन इसमें उन्होंने पार्शियल्टी की है. उन्होंने सभी के नाम लिए जिसमें अधिकारी और कर्मचारियों को निलंबित करने की बात कही गई. लेकिन एमआईसी के बारे में नहीं बोला. वह शहर सरकार के मंत्री है उनकी जिम्मेदारी बनती है. कोई भी फाइल आती है तो उसका अध्ययन करें उसके बाद यह संकल्प पारित करें. महापौर के पास कोई जवाब नहीं इसीलिए चर्चा से किया महापौर ने माना. सबसे बड़ी दोषी महापौर है एमआईसी की अध्यक्ष महापौर होती हैं. उदित गर्ग की सील के नीचे उनकी सील लगी है. महापौर को अपनी गलती स्वीकार करना चाहिए और इस्तीफा देना चाहिए. अगर आसंदी से एमआईसी को बचाया गया तो विपक्ष करेगा वॉकआउट."
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