मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के जिंसी इलाके में स्थित बंद पड़े नगर निगम के स्लॉटर हाउस को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. करीब छह महीने पहले सील किए गए इस विवादित स्लॉटर हाउस को दोबारा शुरू करने की प्रशासनिक तैयारियों की भनक लगते ही दक्षिणपंथी हिंदूवादी संगठन बजरंग दल ने नगर निगम और जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया, जब भोपाल नगर निगम ने इस कांड के मुख्य आरोपी असलम चमड़ा की कंपनी से ही इस विषय पर आधिकारिक अभिमत मांग लिया. निगम के इस कदम का बजरंग दल समेत तमाम हिंदूवादी संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इसे दोबारा खोलने की कोशिश की गई, तो राजधानी की सड़कों पर उग्र आंदोलन किया जाएगा.
हाईकोर्ट के आदेश का सच
दरअसल, भोपाल का यह जिंसी स्लॉटर हाउस जनवरी 2026 से ही पूरी तरह सील है. आरोपी कंपनी संचालक असलम चमड़ा ने इस सीलबंदी के खिलाफ और स्लॉटर हाउस को दोबारा संचालित करने की अनुमति के लिए हाईकोर्ट जबलपुर में एक याचिका दायर की थी. याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नगर निगम भोपाल के कमिश्नर को निर्देश जारी किए हैं कि वे आगामी 15 दिनों के भीतर इस संवेदनशील विषय पर अपना अंतिम फैसला लें. इसी अदालती आदेश को आधार बनाकर नगर निगम ने आरोपी पक्ष की कंपनी से राय मांगी है, जो अब गले की फांस बन गई है.
हिंदूवादी संगठन के लगाए ये गंभीर आरोप
इस खबर के सामने आते हैं बजरंग दल के संयोजक अभिजीत सिंह राजपूत ने उग्र रुख इख्तियार कर लिया है. राजपूत कहा कि असलम चमड़ा की कंपनी 'लाइव स्टॉक फूड प्रोसेसर प्राइवेट लिमिटेड' की याचिका पर 10 जून को जारी अदालती आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि निगम की तरफ से पेश हुए वकील ने याचिकाकर्ता की प्रार्थना पर कोई मजबूत आपत्ति नहीं जताई. यह रवैया साफ तौर पर स्लॉटर हाउस को दोबारा खोलने के लिए प्रशासन की 'मौन सहमति' को दर्शाता है, जिसे हम किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे.
संत समाज भी उतरा विरोध में
इस विवाद की गूंज अब धर्म संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सुनाई दे रही है. मध्य प्रदेश संत समाज ने भी इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए मोहन यादव सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है. मप्र संत समाज के मुख्य प्रवक्ता महामंडलेश्वर अनिलानंद ने कहा है कि इस पवित्र भूमि पर गोवंश के गुनहगारों को दोबारा पैर पसारने की अनुमति नहीं दी जा सकती. शासन प्रशासन को इस पर तुरंत रोक लगानी चाहिए.
कांग्रेस ने लगाया 'मिलीभगत' का आरोप
वहीं, स्लॉटर हाउस को फिर से खोलने की अटकलों के बीच कांग्रेस ने भी आक्रामक रुख इख्तियार कर लिया है. मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी इस मुद्दे को लेकर सरकार और स्थानीय प्रशासन पर हमलावर हो गई है. कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को रसूखदार आरोपियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच की अंदरूनी सांठगांठ बताया है. कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता अभिनव बरौलिया ने कहा कि मुख्य आरोपी की कंपनी से ही अभिमत मांगना यह साबित करता है कि असलम चमड़ा और भोपाल नगर निगम के अधिकारियों के बीच परदे के पीछे बड़ी मिलीभगत चल रही है. जनता के गुस्से और आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.
निगम अधिकारी ने साधी चुप्पी
इस पूरे चौतरफा विवाद और भारी हंगामे के बीच नगर निगम कमिश्नर ने पूरी तरह चुप्पी साध ली है. NDTV की टीम ने जब इस गंभीर मुद्दे पर उनका पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने या किसी भी सवाल का जवाब देने से साफ इंकार कर दिया.
जानें- इस मामले में कब क्या हुआ था
भोपाल का यह जिंसी स्लॉटर हाउस विवाद कोई नया नहीं है. इसकी शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई थी, जिसने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया था.
- दिसंबर 2025: जिंसी स्थित नगर निगम स्लॉटर हाउस के पास से एक संदिग्ध ट्रक पकड़ा गया था, जिसमें करीब 26 टन कथित गोमांस लदा हुआ था. हिंदू संगठनों के भारी हंगामे और विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने मांस के सैंपल जब्त किए.
- लैब रिपोर्ट में पुष्टि: जब्त किए गए मांस के नमूनों को पहले मथुरा लैब भेजा गया था, जहां प्राथमिक जांच में 'गोमांस' होने की आधिकारिक पुष्टि हुई. इसके बाद, पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य के लिए नमूनों को दोबारा परीक्षण के लिए हैदराबाद लैब भी भेजा गया था.
- जनवरी 2026 में सीलबंदी: लैब रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि होने के बाद पूरे भोपाल में तीखा जन आक्रोश देखने को मिला. चौतरफा दबाव के बाद प्रशासन ने जनवरी 2026 में इस स्लॉटर हाउस को पूरी तरह से सील कर दिया.
अधिकारियों पर गाज और जमानत का खेल
इस पूरे मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य संचालक असलम चमड़ा और ट्रक ड्राइवर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. साथ ही, लापरवाही बरतने के आरोप में नगर निगम के 12 जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था. हालांकि, मुख्य आरोपी असलम चमड़ा को अप्रैल 2026 में अदालत से जमानत मिल गई.
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फिलहाल, भोपाल का यह स्लॉटर हाउस अब भी प्रशासनिक रूप से सील है, लेकिन इसे दोबारा चालू करने की प्रशासनिक सुगबुगाहट की खबर भर से ही शहर का सांप्रदायिक और राजनीतिक माहौल बेहद गरमा गया है. भले ही नगर निगम कमिश्नर कोर्ट के आदेश की औपचारिकता का हवाला देकर राय मांग रहे हों, लेकिन बजरंग दल, संत समाज और कांग्रेस के तीखे तेवरों ने प्रशासन को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया है.
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