विज्ञापन

बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का नाम अब 'मां वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी' होगा, जानें क्यों रखा गया ये नाम

बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी भोपाल का नाम बदलने जा रहा है. इसका नाम बदलकर 'मां वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' किया जाएगा. विवि कार्यपरिषद ने नाम बदलने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का नाम अब 'मां वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी' होगा, जानें क्यों रखा गया ये नाम

मध्य प्रदेश के भोपाल के बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने बुधवार, 3 जून को विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय (Maa Vagdevi Bhojpal University)' करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. इसके अलावा विश्वविद्यालय के अकादमिक ढांचे में भी बदलाव तय किए गए हैं. कार्य परिषद से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव को राज्यपाल मंगुभाई पटेल के पास भेजा गया. प्रस्ताव में राजा भोज और स्वतंत्रता सेनानी बरकतउल्ला भोपाली की तुलना भी की गई.

राजा भोज की विरासत का दिया गया हवाला

प्रस्ताव में राजा भोज के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक योगदान का उल्लेख किया गया. प्रस्ताव में कहा गया, 'राजा भोज की तुलना में बरकतउल्ला भोपाली के भोपाल निवासी होने से अधिक इस क्षेत्र के लिए किसी प्रकार का योगदान नजर नहीं आता है'. इसी तर्क के आधार पर विश्वविद्यालय का नाम बदलने की सिफारिश की. प्रस्ताव में ये भी कहा गया कि भोपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए विश्वविद्यालय का नाम "वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय" किया जाना अधिक उपयुक्त होगा.

दरअसल, वर्ष 1988 में भोपाल विश्वविद्यालय का नाम बदलकर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय रखा गया था, ताकि मौलाना बरकतउल्ला के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान का सम्मान किया जा सके.

कौन थे बरकतउल्ला भोपाली?

बता दें कि मौलाना मोहम्मद बरकतउल्ला भोपाली भोपाल में जन्मे भारत के प्रमुख क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानियों में से थे. उन्होंने भारत के बाहर रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को वैश्विक समर्थन दिलाने का प्रयास किया. इसके अलावा गदर आंदोलन से जुड़े और भारतीय क्रांतिकारियों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बने. वहीं 1927 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में उनका निधन हुआ था.

राजा भोज ने लिखे थे 80 ग्रंथ

राजा भोज द्वारा लगभग अस्सी ग्रंथ लिखे गए, जिनमें से 27 ग्रंथ आज भी उपलब्ध है. राजा भोज ने केवल स्वयं ग्रंथ नहीं लिखे, बल्कि अपनी राजधानी धारा (धार) को ज्ञान का सबसे बड़ा केंद्र बनाया था. उन्होंने वहां 'भोजशाला' (सरस्वती मंदिर) की स्थापना की, जो उस दौर का एक महान विश्वविद्यालय था. भोज शाला में उनके द्वारा स्थापित की गई वाग देवी की प्रतिमा जो आज इंग्लैंड के संग्रहालय में रखी गई है. उन्हें विद्या की आराध्य देवी सरस्वती के रूप में 1000 वर्ष तक पूजी गई.

ये भी पढ़ें: अमित लाहोटी बनेंगे MP हाई कोर्ट के जज; सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश, कई राज्यों के लिए भी नाम मंजूर

ये भी पढ़ें: कूनो में जन्मी मादा चीता KGP-11 घायल मिली; मुरैना में रेस्क्यू, पालपुर में इलाज जारी

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com