मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले से गिरफ्तार फर्जी आईएएस तृप्ति राजपूत और उसका भाई सुधांशु राजपूत कोई छोटी ठग नहीं, बल्कि एक महाठग है. उसके कारनामे जानकर आपके होश उड़ जाएंगे. जब से वह गिरफ्तारी हुई है, उसके बारे में पुलिस को होश उड़ाने वाली कई जानकारियां मिली हैं. महाठग तृप्ति को लेकर खुलासा हुआ है कि उसने खुद को फर्जी आईएएस अफसर बताकर बिजनेसमैन से शादी तक कर ली थी, लेकिन उसका यह झूठ ज्यादा दिन तक छिपा नहीं और उसके पति को पता चल गया. इसके बाद तृप्ति ने उसे छोड़ दिया.
वहीं, तृप्ति का भाई सुधांशु राजपूत खुद को पत्रकार बताता था. उन्होंने कई लोगों को नौकरी लगवाने का झांसा देकर ठग चुके थे और काली कमाई से खूब ऐश की. फिलहाल दोनों भाई पुलिस की रिमांड पर हैं. अब इन चंदेरी के हाई-प्रोफाइल ठगों की कुंडली खंगाली जा रही है.
इसके अलावा तृप्ति का भोपाल कनेक्शन भी सामने आया है, जिसके बाद चंदेरी पुलिस आरोपी भाई-बहन को लेकर भोपाल रवाना हो गई है. फिलहाल जांच में ये भी पता चला है कि फर्जी IAS तृप्ति किराये की इनोवा कार से धाक जमाती थी, जिस पर 'भारत सरकार' लिखा हुआ था. जांच में उसके पास से फर्जी सीबीआई कार्ड और 1.5 लाख रुपये के आईफोन बरामद हुए हैं.
तृप्ति काली कमाई के बलबूते पूरे ठाठ-बाट के साथ रहती थी, जहां भी जाती 'भारत सरकार' लिखी गाड़ी और आईफोन लेकर जाती थी. इस दौरान वह महंगे होटल में रुकती थी. दोनों ठग भाई-बहन आत्मविश्वास के साथ ऐसा रुतबा दिखाते थे कि लोग झांसे में आ जाते.
2025 में करके गए थे ठगी, फिर ऐसे बिछा पकड़ने का जाल
एसपी राजीव मिश्रा ने बताया कि तृप्ति और सुधांशु अपने दो अन्य साथियों तनुज वैश्य अंजली सिंह के साथ अप्रैल 2025 को चंदेरी घूमने आए थे, जो किला कोठी में ठहरे थे. उन्होंने वहां के लोगों को प्रभावित करने अपने झांसे में ले लिया. पीड़ितों में किला कोली का एक मैनेजर, गाइड, एक शिक्षक और एक बेरोजगार शख्स शामिल है.
नौकरी लगवाने के बदले उन्होंने इनसे कुल 9 लाख 80 हजार रुपये लिए थे. प्रति व्यक्ति तीन लाख रुपये की मांग की गई. इसके अलावा बचे हुए रुपये बाद में लेने की बात हुई थी. तृप्ति ने खुद को मध्य प्रदेश टूरिज्म विभाग की एडिशनल डायरेक्टर बताया और कहा था कि वह मानव संसाधन विकास मंत्रालय में उन लोगों की सरकारी नौकरी लगवा देगी.

फिर इन लोगों को नौकरी के बारे कुछ अपडेट नहीं मिला. तृप्ति पीड़ितों को नौकरी को लेकर टहलाती रही थी. उसने इस दौरान नौकरी का एक फर्जी ऑफर लैटर भी भेज दिया था. जब एक साल हो गया तो पीड़ितों ने अप्रैल-मई माह में एसपी से मिलकर शिकायत की.
इस दौरान एसपी राजीव मिश्रा ने बताया कि उनके पास अभी सबूतों का अभाव है, इसलिए उन्होंने पीड़ितों को तृप्ति से बातचीत करते रहने के लिए कहा. साथ ही उनसे कहा कि वह तृप्ति को यह झांसा दें कि उनके पास और भी लोग हैं, जो सरकारी नौकरी चाहते हैं. इसके बदले में रुपये देने को तैयार हैं. ऐसा कहकर पीड़ितों ने तृप्ति को 'दीदी' कहकर पुकारना शुरू कर दिया और बातचीत की.
एसपी ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत और प्लानिंग के तहत चल रही कार्वाही की ढाई महीने तक मॉनिटरिंग की. फिर 24 अगस्त को तृ्प्ति और सुधांशु उन लोगों के बुलावे पर चंदेरी आ गए. दोनों भाई-बहन यहां फिर से लोगों को नौकरी का झांसा देकर पैसे ठगने आए थे, लेकिन पुलिस यहां उनकी गिरफ्तारी के लिए तैयार थी. जैसे ही वह जीप कार से चंदेरी पहुंचे, दोनों महाठगों को दबोच लिया.
एसपी ने बताया कि एक महीने पहले पुलिस ने पीड़ितों के साथ तृप्ति के घर जाकर रेकी भी की थी, जहां पता किया था कि वह कैसे रहती है और घर कैसा है. पुलिस को जो अभी जीप कार बरामद हुई है, वह उसके ससुराल वालों के नाम है, लेकिन तृप्ति का कहना है कि इसके पैसे उसने खुद ही दिए थे.
दोनों भाई-बहन फिलहाल पुलिस रिमांड पर हैं और भोपाल में है, जो यहीं की रहने वाली है. वहां उनसे अन्य जानकारियां जुटाने की कोशिश की जा रही है.
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