गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव के रहने वाले विशेष यादव दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में संयुक्त सचिव (JS) पद के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं. उनके पिता सरकारी शिक्षक हैं, जबकि मां गृहिणी हैं. विशेष ने अपनी स्कूली शिक्षा गुरुग्राम से की और फिलहाल दिल्ली विश्वविद्यालय के बुद्धिस्ट स्टडी विभाग में पढ़ाई कर रहे हैं. विशेष यादव जब निर्दलीय मैदान में उतरे तो उनके नाम की चर्चा जमकर हुई थी, क्योंकि वह NSUI की तरफ से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला, ऐसे में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया, जहां बाद में उन्हें सपा ने समर्थन दिया था.
NSUI से टिकट की उम्मीद, रात में मिला टिकट
विशेष यादव ने कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI से टिकट की उम्मीद की थी. उनके मुताबिक उन्हें संयुक्त सचिव (JS) पद के लिए टिकट दिए जाने की जानकारी रात में मिली थी और इसके बाद उनका आधिकारिक पोस्टर भी सामने आ गया था. हालांकि, अगले दिन उन्हें बताया गया कि टिकट वापस ले लिया गया है. विशेष के समर्थकों का दावा है कि कांग्रेस के एक सीनियर नेता ने इस संबंध में गोपाल चौधरी से फोन पर बात की थी.
टिकट कटा तो निर्दलीय उतरे सपा का समर्थन
टिकट कटने के बाद विशेष ने NSUI से अलग होकर संयुक्त सचिव पद पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. NSUI छोड़ने के बाद उन्होंने कहा था,'भाई निर्दलीय लड़ेगा.' इसके बाद समाजवादी पार्टी ने उनसे संपर्क किया और उनके चुनाव अभियान को समर्थन देने की बात कही. अब विशेष निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि समाजवादी पार्टी उन्हें समर्थन दे रही है.
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पहले भी आजमाया था चुनावी मैदान
विशेष ने कॉलेज के दौरान भी छात्र राजनीति में सक्रिय होने की कोशिश की थी. वह शहीद भगत सिंह कॉलेज से जुड़े रहे, लेकिन उस समय उनका नामांकन रद्द हो गया था. उनके परिवार की खेती भी है और वह गुरुग्राम के अपने गांव से जुड़े रहे हैं.
दीपांशु शौकीन से पुरानी दोस्ती
विशेष यादव की दीपांशु शौकीन से भी पुरानी दोस्ती है. विशेष, दीपांशु से जूनियर हैं, लेकिन दोनों के बीच लंबे समय से दोस्ती है. विशेष ने 2025 में राहुल जसला को भी समर्थन दिया था. पिछले साल पार्टी की ओर से उन्हें सीट देने का आश्वासन दिया गया था इस बार भी टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. इस सिलसिले में उनकी विनोद जाखड़ से भी बातचीत हुई थी. लेकिन टिकट नहीं मिली.
मतगणना में लगातार कड़ी टक्कर
मतगणना के दौरान संयुक्त सचिव पद पर विशेष यादव लगातार मुकाबले में बने हुए हैं. रुझानों में वह कभी पहले तो कभी दूसरे स्थान पर आते-जाते दिख रहे हैं. इससे चुनाव में उनकी मजबूत चुनौती सामने आई है और वह अन्य उम्मीदवारों को लगातार कड़ी टक्कर दे रहे हैं.
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