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9 करोड़ के इंजेक्शन के लिए हाईकोर्ट पहुंची अनिका, कोर्ट ने सरकार से पूछा- क्या यह 'लाड़ली बहना' नहीं

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि 'लाड़ली बहना योजना' से सिर्फ ₹2-2 बचाकर भी मासूम की जान बचाई जा सकती है.

9 करोड़ के इंजेक्शन के लिए हाईकोर्ट पहुंची अनिका, कोर्ट ने सरकार से पूछा- क्या यह 'लाड़ली बहना' नहीं
अपनी जिंदगी के लिए 9 करोड़ के इंजेक्शन पर निर्भर है अनिका.

गंभीर बीमारी से जूझ रही अनिका के जीवन की डोर अब कानूनी और सरकारी मदद पर टिकी है. 9 करोड़ रुपये के जीवनरक्षक इंजेक्शन के लिए अनिका का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है. मामले में दूसरी बार सुनवाई के दौरान अनिका के वकीलों के तर्कों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सरकारी वकील से कड़े शब्दों में पूछा, "क्या यह बच्ची प्रदेश की लाड़ली बहना नहीं है?" अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 जून को होगी.

सुनवाई के मुख्य अंश और वकीलों का तर्क

अनिका की ओर से हाईकोर्ट में याचिका अधिवक्ता चंचल गुप्ता और अधिवक्ता लखन शर्मा ने दायर की है। 16 जून को हुई सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने एक बेहद मार्मिक और तार्किक दलील कोर्ट के सामने रखी.

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वकीलों ने तर्क दिया कि मध्य प्रदेश सरकार राज्य की सवा करोड़ 'लाड़ली बहनों' को हर माह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दे रही है. यदि सरकार इस योजना की राशि में से प्रति महिला सिर्फ दो रुपये कम कर दे तो अनिका के इलाज का पूरा खर्च आसानी से निकल जाएगा और एक बच्ची की जान बच जाएगी. इस दलील पर कोर्ट ने गंभीरता दिखाते हुए सरकारी वकील से सीधा सवाल किया, "ये बच्ची लाड़ली बहना नहीं है क्या?"

13 किलो वजन की शर्त और लिक्विड डाइट

  • लिक्विड डाइट: बच्ची पिछले कई महीनों से केवल लिक्विड डाइट (तरल आहार) पर जीवित है.
  • वजन की शर्त: अनिका को जो 9 करोड़ रुपये का इंजेक्शन लगना है, उसकी मेडिकल शर्त यह है कि बच्ची का वजन 13 किलो से अधिक नहीं होना चाहिए. इसलिए परिवार और डॉक्टरों के पास समय बेहद कम है.
  • एम्स का रुख: अनिका का यह इलाज दिल्ली स्थित एम्स (AIIMS) में होना है. हालांकि, 16 जून के कोर्ट ऑर्डर में स्पष्ट किया गया है कि मामले में अब तक दिल्ली एम्स की तरफ से कोई आधिकारिक जवाब पेश नहीं किया गया है.
  • धनराशि का गणित: 8 करोड़ जुटाए, अब भी मंजिल दूर

अनिका के परिवार और शुभचिंतकों ने दिन-रात एक करके अब तक 8 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि एकत्रित कर ली है. लेकिन इलाज के लिए कुल 9 करोड़ रुपये की आवश्यकता है. समय बीतने के साथ यह बची हुई राशि जुटाना और एम्स व सरकार की तरफ से हरी झंडी मिलना बच्ची की जान बचाने के लिए अत्यंत आवश्यक है.

कोर्ट के आदेश (Order) के हवाले से स्पष्ट किया गया है कि अदालत ने बच्ची की गंभीर स्थिति को संज्ञान में लिया है और सरकार व संबंधित पक्षों से जल्द से जल्द उचित कदम उठाने की अपेक्षा की है. अब सभी की निगाहें 22 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं.

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Tanushree Desai
रिपोर्टर
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