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एवरेस्ट से क्यों वापस नहीं लाया जा रहा हैदराबाद के पर्वतारोही का शव? परिवार ने बताया

Mountaineer Arun Kumar Tiwari : हैदराबाद के पर्वतारोही अरुण कुमार तिवारी की एवरेस्ट पर मौत हो गई थी. अब उनके परिवार ने बताया है कि उनका शव एवरेस्ट से नीचे क्यों नहीं लाया जाएगा.

एवरेस्ट से क्यों वापस नहीं लाया जा रहा हैदराबाद के पर्वतारोही का शव? परिवार ने बताया
पर्वतारोही अरुण कुमार तिवारी
  • तेलंगाना के पर्वतारोही अरुण कुमार तिवारी की मौत के बाद परिवार ने शव को पर्वत पर ही छोड़ने का निर्णय लिया है.
  • शव को नीचे लाने में तकनीकी जटिलताएं और आस्था के कारण यह निर्णय लिया गया है, जिससे शव खराब हो सकता है.
  • तिवारी की मौत हिलेरी स्टेप के पास हुई, जहां शव को निकालना जोखिम भरा और महंगा माना जाता है.

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट से पिछले सप्ताह उतरते समय जान गंवाने वाले तेलंगाना के पर्वतारोही अरुण कुमार तिवारी के परिवार ने शव को पर्वत पर ही छोड़ने का फैसला किया है. उनके परिजन सुधीर उपाध्याय ने बताया कि यह निर्णय आस्था और शव को वापस लाने में आने वाली तकनीकी जटिलताओं के कारण लिया गया.

सुधीर उपाध्याय ने बताया कि वह (तिवारी) वहां हैं जहां भगवान शिव रहते हैं. शव को जब तक लाया जाएगा तब तक वह बहुत बुरी तरह खराब हो चुका होगा. एवरेस्ट पर इस तरह के अभियान सफल नहीं माने जाते. नेपाल स्थित ‘पायनियर एडवेंचर्स' के निदेशक निवेश कार्की के अनुसार, तिवारी (53) की मौत पिछले सप्ताह शिखर के ठीक नीचे हिलेरी स्टेप के पास उस समय हुई, जब चार शेरपा पर्वतारोहियों की सहायता से उतरते समय उनकी तबीयत खराब हो गई थी.

हिलेरी स्टेप से शव को नीचे लाना जोखिम भरा

तिवारी एक कुशल पर्वतारोही थे और हैदराबाद की एक प्रमुख आईटी कंपनी में वरिष्ठ अधिकारी के पद पर थे. उन्होंने अतीत में माउंट एल्ब्रस (रूस), माउंट डेनाली (अमेरिका) और माउंट एकोनकागुआ (अर्जेंटीना) पर चढ़ाई की थी. सूत्रों के अनुसार, एवरेस्ट पर हिलेरी स्टेप से शव को नीचे लाना जोखिम भरा और बेहद खर्चीला अभियान है क्योंकि इसके लिए आठ से बारह कुशल शेरपाओं की टीम और बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है.

Mountaineer Arun Kumar Tiwari :  तिवारी का सपना रह गया अधूरा

तिवारी माउंट एल्ब्रस, डेनाली और एकॉनकागुआ जैसी ऊंची चोटियों पर चढ़ाई कर चुके थे. उन्होंने 2025 में भी एवरेस्ट पर चढ़ने की कोशिश की थी. लेकिन तबीयत खराब होने की वजह से लगभग 7,200 मीटर की ऊंचाई से ही वापस लौटना पड़ा था. इस साल उन्होंने फिर से कोशिश की और अपना सपना पूरा करने निकले. इसी अभियान के दौरान एक और पर्वतारोही, अमेरिका में रहने वाले संदीप अरे की भी मौत हो गई. बताया जाता है कि उन्हें हिम अंधता और ज्यादा थकावट की समस्या हो गई थी. उनकी मौत कैंप-III के पास हुई, जिससे उनका शव नीचे लाना संभव हो पाया और हेलीकॉप्टर के जरिए उसे बाहर निकाला गया.

यहां से शव निकालना बेहद खतरनाक

माउंट एवरेस्ट से किसी का शव निकालना बेहद खतरनाक काम माना जाता है, क्योंकि ‘डेथ ज़ोन' यानी 8,000 मीटर से ऊपर ऑक्सीजन बहुत कम होती है, जहां इंसान ज्यादा देर तक जीवित नहीं रह सकता. शिखर के पास हिलारी स्टेप जैसे इलाकों में पर्वतारोहियों और बचाव दल को बहुत जोखिम उठाना पड़ता है. यहां थकावट, जमाव (फ्रॉस्टबाइट), हिमस्खलन और ऊंचाई की बीमारी जैसी समस्याओं का खतरा रहता है. पतली हवा और बेहद ठंड की वजह से सामान्य काम भी बहुत मुश्किल हो जाते हैं.

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आलोक कुमार ठाकुर
Senior Sub Editor
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