बरेलवी ने अपनी बात की शुरूआत एक शेर से की
उन्होंने कहा- नफरत की उम्र कम है-कालिदास, प्रेमचंद्र और गालिब का वंशज हूं- मुल्क के मौजूदा हालात अपनी बात को एक शेर से खत्म करते हुए वसीम बोले-‘‘वह मेरे चेहरे तक अपनी नफरतें लाया था, मैंने उसके हाथ चूमे और बेबस कर दिया.’’
‘‘कौन सी बात कहा कैसे कही जाती है, यह सलीका है तो हर बात सुनी जाती है.’’
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