
प्रतीकात्मक चित्र
कश्मीर घाटी में दशकों तक चले संघर्ष की ‘‘सबसे बड़ी शिकार’’ वहां की महिलाएं हैं, ये कहना है कश्मीरी कवियत्री नसीम सैफई का. सैफई ने कहा कि इस संघर्ष की शिकार कई महिलाओं को अपने पतियों के पते-ठिकाने के बारे में कुछ नहीं पता था. इन लोगों को ‘‘अधूरी बेवा’’के तौर पर जाना जाने लगा.
साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित पहली कश्मीरी महिला सैफई ने कहा कि एक बेहद जटिल समस्या पर अब तक चल रहे दिशाहीन आंदोलन का समाधान सिर्फ घाटी के युवा ही दे सकते हैं.
जयपुर साहित्योत्सव में उन्होंने कहा कि इसके कई पक्षकारों और सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों ने इस विवाद का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया है.
इनपुट भाषा से
साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित पहली कश्मीरी महिला सैफई ने कहा कि एक बेहद जटिल समस्या पर अब तक चल रहे दिशाहीन आंदोलन का समाधान सिर्फ घाटी के युवा ही दे सकते हैं.
जयपुर साहित्योत्सव में उन्होंने कहा कि इसके कई पक्षकारों और सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों ने इस विवाद का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया है.
इनपुट भाषा से