आपने देखा होगा कि सर्दियों में कार या घर की खिड़कियों पर फॉग जम जाता है. लेकिन हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ते विमान की खिड़की हमेशा साफ रहती है. बाहर माइनस डिग्री तापमान, अंदर गर्म केबिन और फिर भी शीशे पर न धुंध, न बर्फ. आखिर ऐसा क्यों? क्या प्लेन की खिड़कियां किसी खास कांच से बनी होती हैं. या इसके पीछे कोई खास टेक्नोलॉजी काम करती है? दरअसल, प्लेन की खिड़की की डिजाइन, एयर कंडीशनिंग सिस्टम और कुछ स्मार्ट तकनीकों की वजह से फॉग बनने का सवाल ही नहीं उठता.
तीन परतों वाली खिड़की का कमाल
प्लेन की खिड़की आम खिड़की जैसी नहीं होती. इसमें तीन परतें होती हैं.
• बाहरी परत: ये बेहद मजबूत होती है और बाहर के कम एयर प्रेशर और ठंड को झेलती है.
• मध्य परत: यही सबसे अहम हिस्सा है. जिसमें एक छोटा सा ब्लीड होल होता है.
• अंदरूनी परत: ये यात्रियों के संपर्क में रहती है और इसे दबाव सहने की जरूरत नहीं होती.
ब्लीड होल क्यों है जरूरी?
मध्य परत में मौजूद छोटा सा ब्लीड होल दबाव को बैलेंस करने का काम करता है. ये केबिन के अंदर और बाहर के एयर प्रेशर को बराबर रखने में मदद करता है. साथ ही ये नमी को बाहर निकलने का रास्ता देता है. जब नमी बाहर चली जाती है. तो शीशे पर फॉग जमने की संभावना काफी कम हो जाती है.
एयर कंडीशनिंग सिस्टम की अहम भूमिका
प्लेन का एयर कंडीशनिंग सिस्टम केबिन की हवा को लगातार ड्राई बनाए रखता है. ये हवा से नमी निकालता है और उसे बार बार सर्कुलेट करता रहता है. फॉग बनने की असली वजह नमी होती है. और जब नमी ही कम हो तो धुंध जम ही नहीं पाती.
हीटिंग और एंटी फॉग कोटिंग
कुछ विमानों में खिड़की पर बेहद पतली हीटिंग लेयर या एंटी-फॉग कोटिंग भी होती है. ये हल्की गर्मी पैदा करती है और नमी को शीशे पर जमने नहीं देती. इससे अंदर और बाहर के तापमान का फर्क असर नहीं डाल पाता.
इसलिए दिखता है बाहर का नजारा साफ
तीन परतों की डिजाइन, ब्लीड होल, पावरफुल AC सिस्टम और एंटीसफॉग तकनीक इन सबके मेल से प्लेन की खिड़की हमेशा साफ रहती है. यही वजह है कि इतनी ऊंचाई और ठंड के बावजूद यात्रियों को बाहर का नजारा बिना किसी रुकावट के दिखाई देता है.
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