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कोट और ब्लेजर की आस्तीन पर बटन क्यों लगे होते हैं? जानें क्या होता है इनका काम

Coat and Blazer Sleeve Buttons Reason: क्या आपने कभी सोचा है कि कोट की स्लीव्स पर 3-4 बटन क्यों लगे होते हैं. ये बटन सिर्फ फैशन के लिए लगाए जाते हैं या इनका कोई काम भी होता है. जानिए इन बटनों के शुरुआत की कहानी और इन्हें लगाए जाने का दिलचस्प कारण.

कोट और ब्लेजर की आस्तीन पर बटन क्यों लगे होते हैं? जानें क्या होता है इनका काम
कोट और ब्लेजर की आस्तीन पर बटन क्यों होते हैं

शादी-पार्टी हो या ऑफिस की कोई जरूरी मीटिंग, खुद को स्मार्ट और डैशिंग दिखाने के लिए ज्यादातर लोग कोट या ब्लेजर पहनते हैं. ब्लेजर पहनते समय क्या आपने कभी उसकी आस्तीन (Sleeves) पर ध्यान दिया है. कलाई के पास हमेशा 3 या 4 छोटे-छोटे बटन लगे होते हैं. बहुत से लोगों को लगता है कि ये बटन सिर्फ डिजाइन या फैशन के लिए होते हैं. जब आस्तीन में कोई काज (छेद) ही नहीं होता, तो इन बटनों का काम क्या है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि जब इन बटनों को लगाने की शुरुआत हुई थी, तब इनका फैशन से कोई लेना-देना नहीं था. इसके पीछे की असली कहानी सैकड़ों साल पुरानी है. तो चलिए जानते हैं कोट और ब्लेजर की आस्तीन पर बटन क्यों लगे होते हैं और इनका क्या काम होता है.

आस्तीन पर बटन लगाने की शुरुआत कहां से हुई

कहा जाता है कि आस्तीन पर बटन लगाने की शुरुआत फ्रांस के मशहूर शासक नेपोलियन बोनापार्ट ने करवाई थी. युद्ध के मैदान में सैनिक बहुत थक जाते थे और पसीने से लथपथ रहते थे. उस जमाने में सैनिकों की एक गंदी आदत थी कि वे अपनी बहती नाक और चेहरे का पसीना साफ करने के लिए अपनी यूनिफॉर्म यानी कोट की आस्तीन का ही इस्तेमाल कर लेते थे.

इससे उनकी महंगी और शानदार यूनिफॉर्म कलाई के पास से बहुत गंदी हो जाती थी. नेपोलियन को अपनी सेना का यह गंदा लुक बिल्कुल पसंद नहीं था. सैनिकों को इस आदत से रोकने के लिए उसने उनकी आस्तीन पर पीतल के बड़े और चुभने वाले बटन लगवा दिए. अब जैसे ही कोई सैनिक नाक या पसीना पोंछने के लिए हाथ उठाता, बटन उसे चुभ जाते. यहीं से कोट पर बटन लगाने का ट्रेंड शुरू हो गया.

कोट की आस्तीन पर बटन होने की दूसरी कहानी

कोट की आस्तीन पर बटन होने की दूसरी कहानी डॉक्टरों यानी सर्जनों से जुड़ी है. पुराने जमाने में डॉक्टरों को भी मरीजों को देखते समय कोट पहनना जरूरी होता था. लेकिन जब किसी का इलाज करना हो या कोई सर्जरी करनी हो, तो कोट की लंबी आस्तीन काम में रुकावट बनती थी. बार-बार कोट उतारना भी मुश्किल था. इस परेशानी से बचने के लिए दर्जियों ने कोट की आस्तीन पर काज वाले बटन लगाने शुरू किए. ताकि जरूरत पड़ने पर डॉक्टर उन बटनों को खोलकर अपनी आस्तीन आसानी से ऊपर मोड़ (Roll-up) सकें. इसे आज भी फैशन की दुनिया में 'सर्जन कफ' (Surgeon's Cuff) कहा जाता है.

आज के समय में कोट-ब्लेजर की आस्तीन के बटन का क्या काम है

1. धीरे-धीरे यह जरूरत फैशन में बदल गई. आज के समय में ये बटन आपका स्टेटस बताते हैं. जो रेडीमेड और सस्ते ब्लेजर हम बाजार से खरीदते हैं, उनमें बटन तो होते हैं लेकिन वे खुलते नहीं हैं. उन्हें सिर्फ बाहर से टांक दिया जाता है. 

2. अगर आप किसी महंगे और बड़े टेलर (Bespoke Tailor) से अपना सूट सिलवाते हैं, तो वह आज भी आस्तीन में असली बटन और काज बनाता है जो खुल सकते हैं.

3. सूट और ब्लेजर में फिटिंग काफी मायने रखती है. आस्तीन पर लगे बटन स्लीव के डिजाइन को ज्यादा साफ और बैलेंस्ड लुक देते हैं. ये बटन कफ के आसपास एक तरह का विजुअल पैटर्न बनाते हैं. इसी वजह से सूट पहनने वाले व्यक्ति के हाथों की तरफ देखने पर भी आउटफिट ज्यादा प्रीमियम दिखाई देता है.

तो क्या स्लीव के बटन सिर्फ दिखावे के लिए होते हैं?

आज के समय में ज्यादातर मामलों में ये सिर्फ दिखावे के लिए ही होते हैं. कई मार्डन ब्लेजर में बटन सिर्फ सजावट और क्लासिक लुक बनाए रखने के लिए लगाए जाते हैं. खासकर रेडीमेड सूट में ये बटन स्लीव के डिजाइन को पूरा करते हैं. अगर ब्लेजर की आस्तीन पर बिल्कुल बटन न हों तो उसका लुक कुछ लोगों को अधूरा लग सकता है. इसलिए फैशन डिजाइन में इन छोटे बटनों की अपनी जगह बनी हुई है.

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