Longest Hunger Strike India: पेपर लीक और एजुकेशन से जुड़े मुद्दों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं. लगातार बिना कुछ खाए-पिए रहने की वजह से उनका शरीर कमजोर हो रहा है और डॉक्टर उनकी सेहत को लेकर चिंता जता रहे हैं. ऐसे में कहा जा रहा है कि उन्हें सरकार या कोर्ट के आदेश पर जबरन खाना खिलाया जा सकता है. इसे लेकर कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है. मणिपुर की 'आयरन लेडी' इरोम शर्मिला की को भी फोर्स फीडिंग कराई गई थी, जो 16 साल तक भूख हड़ताल पर रहीं. उन्हें नाक की नली के जरिए लिक्विड फूड दिया गया था. ये फोर्स फीडिंग का सबसे बड़ा मामला भी है. आइए जानते हैं 16 साल भूख हड़ताल करने वाली इरोम शर्मिला कौन थी और उनकी पूरी कहानी.
इरोम शर्मिला कौन हैं
इरोम शर्मिला मणिपुर की रहने वाली एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्हें लोग मजबूद इरादों के लिए 'आयरन लेडी ऑफ मणिपुर' कहते हैं. उनका नाम गिनीज बुक में दुनिया की सबसे लंबी भूख हड़ताल के लिए दर्ज है. उन्होंने ये लड़ाई अपने राज्य के आम लोगों के लिए लड़ी थी.
इरोम शर्मिला ने क्यों किया 16 साल का अनशन
साल 2000 में मणिपुर के मालोम इलाके में एक बस स्टैंड पर सुरक्षाबलों की फायरिंग में 10 आम नागरिकों की जान चली गई थी. इस दर्दनाक घटना ने 28 साल की इरोम शर्मिला को अंदर तक झकझोर कर रख दिया. उन्होंने ठान लिया कि जब तक सरकार मणिपुर से सेना को विशेष अधिकार देने वाला कानून (AFSPA) नहीं हटा लेती, तब तक वो न तो कुछ खाएंगी, न पानी पिएंगी और न ही अपने बालों में कंघी करेंगी. उन्होंने 5 नवंबर 2000 को अपना शांतिपूर्ण अनशन शुरू किया, जो पूरे 16 साल यानी करीब 5,793 दिन चला. उनकी भूख हड़ताल 9 अगस्त 2016 को खत्म हुई.
मुंह से एक निवाला नहीं खाया, फिर 16 साल जिंदा कैसे रहीं
जब इरोम शर्मिला भूख हड़ताल पर थीं, तब उस समय हमारे देश के कानून में आत्महत्या की कोशिश करना यानी धारा 309 के तहत अपराध माना जाता था. इसलिए जैसे ही इरोम भूख हड़ताल पर बैठतीं, पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर लेती और अस्पताल के एक कमरे में कैद कर देती. सरकार किसी भी हाल में उन्हें मरने नहीं देना चाहती थी. इसलिए डॉक्टरों ने उनकी नाक में एक प्लास्टिक की नली (ट्यूब) डाल दी थी. इसी नली के जरिए उन्हें लिक्विड डाइट जैसे सूप, जूस, विटामिन्स और जरूरी पोषक तत्व जबरदस्ती दिए जाते थे. यह दुनिया में जबरन खाना खिलाने (Force-Feeding) का सबसे बड़ा मामला बन गया. उन्होंने पूरे 16 साल तक अपनी मर्जी से मुंह से एक दाना भी नहीं खाया.
अनशन खत्म करने के बाद क्या हुआ
2016 में जब इरोम ने आखिरकार अपना अनशन तोड़ा, तो उन्होंने राजनीति में उतरने का फैसला किया. उन्होंने अपनी पार्टी बनाई और मणिपुर विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के खिलाफ मैदान में उतरीं, लेकिन उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली. राजनीति में कदम रखने से उनके समर्थक उनसे नाराज हो गए और विधानसभा चुनाव में इरोम शर्मिला को सिर्फ 90 वोट मिले.
इरोम शर्मिला अब कहां हैं
आज इरोम बेंगलुरु में अपने पति देसमोंद कौटिंहो के साथ रहती हैं. वो कहती हैं कि अब उनकी जिंदगी एक शांत बहती नदी जैसी है. राजनीति से उन्होंने दूरी बना ली है, लेकिन मानवाधिकार के मुद्दों पर आज भी आवाज उठाती रहती.
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