Correct Way To Hoist The Flag : 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस हर भारतीय के लिए गर्व और देशभक्ति से जुड़ा खास दिन है. स्वतंत्रता दिवस पर स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों से लेकर घरों और दफ्तरों तक तिरंगा शान से लहराता नजर आता है. लेकिन तिरंगा सिर्फ एक झंडा नहीं, बल्कि देश की आन, बान और शान का प्रतीक है. इसलिए इसे फहराने के लिए कुछ नियम तय किए गए हैं. भारतीय झंडा संहिता, 2002, जिसे 2021 और 2022 में संशोधित किया गया, राष्ट्रीय ध्वज के इस्तेमाल से जुड़े नियमों को निर्धारित करती है.आइए जानते हैं 15 अगस्त पर तिरंगा फहराते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
तिरंगा फहराते समय इन नियमों का रखें ध्यान
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज रेक्टेंगुलर होना चाहिए और इसकी लंबाई-चौड़ाई का अनुपात 3:2 निर्धारित है.
झंडे में ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा रंग होना चाहिए. सफेद पट्टी के बीच नीले रंग का अशोक चक्र होता है.
तिरंगा हमेशा ऐसी जगह लगाया जाए जहां वह साफ-साफ दिखाई दे और किसी दूसरी वस्तु या झंडे से ढका न हो.
क्षतिग्रस्त, फटा या अस्त-व्यस्त झंडा नहीं फहराना चाहिए.
एक अहम बदलाव के बाद अब आम नागरिक, प्राइवेट आर्गेनाईजेशन और शैक्षणिक संस्थान सभी दिनों और अवसरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा या लगा कर सकते हैं, लेकिन इस दौरान उसकी गरिमा और सम्मान बरकरार रहनी चाहिए. खुले में या किसी नागरिक के घर पर तिरंगा दिन-रात भी फहराया जा सकता है. झंडे के कपड़े को लेकर भी नियम बदले हैं. अब राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काते और बुने कपड़े के साथ-साथ मशीन से बने कॉटन, पॉलिएस्टर, ऊन, सिल्क या खादी बंटिंग से भी बनाया जा सकता है.
इन गलतियों से बचें, वरना पड़ सकता है भारी
तिरंगे को कभी जमीन, फर्श या पानी के संपर्क में नहीं आने देना चाहिए.
उसे उल्टा प्रदर्शित करना या ऐसी स्थिति में लगाना भी गलत है, जिससे उसकी गरिमा प्रभावित हो.
राष्ट्रीय ध्वज पर कुछ लिखना, चित्र बनाना या कोई निशान लगाना भी नियमों के खिलाफ है.
तिरंगे का इस्तेमाल सजावटी वस्तु, पोशाक या ऐसी किसी चीज के लिए नहीं किया जाना चाहिए, जिससे उसकी गरिमा कम हो.
किसी अन्य झंडे को तिरंगे से ऊपर या उसके बराबर ऐसी स्थिति में नहीं लगाया जाना चाहिए जिससे राष्ट्रीय ध्वज की सर्वोच्च स्थिति प्रभावित हो.
नियम न मानने पर क्या होगा?
तिरंगे का जानबूझकर अपमान करना महज अनुचित व्यवहार नहीं, बल्कि कानूनन अपराध भी बन सकता है. राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) के तहत पब्लिक प्लेस पर या लोगों की नजरों के सामने तिरंगे को जलाना, फाड़ना, नुकसान पहुंचाना, पैरों से रौंदना या उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाना दंडनीय अपराध है. ऐसे मामले में तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है. इसलिए तिरंगा फहराते समय देशभक्ति के साथ उसकी गरिमा और कानूनी नियमों का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है.
तिरंगा उतारते समय भी रखें खास सावधानी
ध्वज फहराने जितना ही जरूरी उसे सम्मानपूर्वक उतारना और सुरक्षित रखना है. झंडे को जमीन या पानी को छूने से बचाते हुए सावधानी से उतारा जाना चाहिए और उचित तरीके से रखा जाना चाहिए. अगर तिरंगा कागज का है और किसी राष्ट्रीय, सांस्कृतिक या खेल आयोजन में इस्तेमाल किया गया है, तो उसे कार्यक्रम के बाद जमीन पर फेंकना नहीं चाहिए.
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