प्लेन उड़ाने से जुड़े कई प्रोटोकॉल होते हैं. ये प्रोटोकॉल यात्रियों की सुरक्षा और विमान को किसी हादसे से बचाने के लिए बनाए जाते हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही प्रोटोकॉल के बारे में बताने जा रहे हैं, जो प्लेन के पायलट से जुड़ा होता है. एक प्लेन में अक्सर दो पायलट होते हैं. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि एक पायलट की अगर तबीतय खराब हो, तो दूसरा पायलट प्लेन को संभाल सके. वहीं पायलट को प्लेन उड़ाते समय कई सारे नियमों का पालन करना होता है. इन्हीं नियमों में से एक नियम खाने से जुड़ा होता है.
प्लेन में मौजूद दोनों पायलट एक साथ और एक जैसा खाना नहीं खा सकते हैं. दोनों पायलट को अलग-अलग खाना दिया जाता है. जो कि अलग-अलग समय पर खाते हैं. सुनने में ये नियम अजीब लगेगा लेकिन ये विमान की सुरक्षा के लिए बनाया गया है. 3 फरवरी, 1975 को जापान एयरलाइंस के एक विमान में सवार यात्रों का पेट खाना खाकर खराब हो गया था. हालांकि इस विमान को उड़ाने वाले पायलटों ने ये खाना नहीं खाया था. ऐसे में बड़ा हादसा होने से बच गया था. तभी से ये नियम बन गया है कि विमान के पायलट एक समय पर खाना नहीं खाएंगे. साथ ही उनका खाना भी अलग-अलग होगा. ताकि अगर कोई खाना खराब भी हो तो केवल एक ही पायलट की तबीयत बिगड़े और दूसरा प्लेन को संभाल सके.
शराब पीने से जुड़ा नियम
पायलटों के लिए शराब पीने से नियम भी है. 'एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937' के नियम 24 के अनुसार शराब पीने और विमान उड़ाने के बीच समय का अंतर 12 घंटे होना चाहिए. पायलट और क्रू मेंबर उड़ान भरने से 12 घंटे पहले तक शराब नहीं पी सकते हैं. वहीं उड़ान से पहले ब्रेथलाइजर जांच की जाती है. इस दौरान खून में शराब का स्तर शून्य होना चाहिए. यानी पायलट और क्रू मेंबर को विमान उड़ाने से ठीक 12 घंटे पहले किसी भी तरह के नशे से परहेज करना चाहिए.
पायलट के नशे से जुड़ा ताजा मामला 4 अगस्त का ही है, जब एअर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान में एक बड़ा हादसा होते हुए टल गया था. ये विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गया था. इस घटना में कम से कम 17 यात्री और क्रू मेंबर घायल हुए थे. जब इस मामले की जांच की गई तो पाया गया कि विमान के मेन पायलट (पायलट-इन-कमांड) ने मैरिजुआना का सेवन किया था. यानी वो नशे में था. विमानन नियामक डीजीसीए के नियमों के अनुसार, अगर कोई पायलट या उड्डयन कर्मी नशे की जांच में ‘पॉजिटिव' पाया जाता है, तो उसे नशा मुक्ति कार्यक्रम के लिए भेजा जाता है. अगर वही व्यक्ति दूसरी बार भी जांच में ‘पॉजिटिव' पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस तीन साल के लिए निलंबित कर दिया जाता है. वहीं तीसरी बार ऐसा होने पर लाइसेंस ही रद्द कर दिया जाता है.
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