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This Article is From Nov 06, 2025

सक्सेस स्टोरी: छोटे से गैराज से हुई Apple कंपनी की शुरुआत, कुछ ऐसी है स्टीव जॉब्स की कहानी

Steve Jobs Success Story: जिस एपल की कुल कमाई आज कई देशों की जीडीपी के बराबर है, उसे कभी स्टीव जॉब्स ने एक गैराज से शुरू किया था.

सक्सेस स्टोरी: छोटे से गैराज से हुई Apple कंपनी की शुरुआत, कुछ ऐसी है स्टीव जॉब्स की कहानी
स्टीव जॉब्स की कहानी

Steve Jobs Success Story: सफलता की कहानियां तो आपने कई बार सुनी होंगीं, जिनमें कोई साधारण सा दिखने वाला शख्स एक दिन दुनिया पर राज करने लगता है. कई लोग गरीबी से निकलकर कुछ ऐसा कर देते हैं, जिसे दुनिया याद रखती है. दुनियाभर में रोजाना ऐसे कई उदाहरण देखने के लिए मिलते हैं, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी सक्सेस स्टोरी बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे और इस पर यकीन करना भी मुश्किल हो जाएगा. हम अरबों डॉलर की एपल कंपनी को खड़ा करने वाले स्टीव जॉब्स के बारे में आपको बताएंगे कि कैसे उन्होंने एक छोटे से गैराज से इस कंपनी की नींव रखी और कुछ ऐसा कर दिया, जिसे लोग आज भी याद करते हैं. 

ऐसे बीता बचपन

स्टीव जॉब्स के माता पिता की शादी नहीं हुई थी, जिसके बाद वो चाहते थे कि कोई उनके बच्चे को गोद ले ले. जिसके बाद जॉब्स सरनेम वाले एक कपल ने स्टीव को गोद ले लिया. स्टीव को गोद लेने वाले पॉल जॉब्स एक मैकेनिक थे, यहीं से इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स में उनकी दिलचस्पी शुरू हुई. अपने पिता के गैराज में बैठकर वो चीजों को देखते थे और उन्हें ठीक करने की कोशिश करते थे. पढ़ाई में उनका मन कभी नहीं लगता था.

कॉलेज ड्रॉपआउट थे स्टीव

जिस एपल के फोन और लैपटॉप लेने के लिए आज दुनियाभर के लोग लाइनों में खड़े रहते हैं, उस कंपनी के फाउंडर स्टीव जॉब्स कॉलेज ड्रॉपआउट थे. इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी, क्योंकि उन्हें वक्त रहते ये समझ आ गया था कि उन्हें किस क्षेत्र में सफलता मिल सकती है. 1972 में स्टीव जॉब्स ने एक वीडियो गेमिंग कंपनी में नौकरी शुरू की, लेकिन मजा नहीं आया. इसके बाद वो बचे हुए पैसे लेकर भारत आ गए, करीब सात महीने वो हिमाचल प्रदेश में रहे और आध्यात्म की ऊर्जा से खुद को बैलेंस किया. 

दोस्त के साथ शुरू हुआ सफर

स्टीव जॉब्स जब वापस अमेरिका लौटे तो उनमें कई तरह के बदलाव हुए और एक फ्रेश माइंड के साथ वो कुछ नया करने निकल गए. इस दौरान उनकी स्टीव वोज्नियाक से दोस्ती हो गई, जो काफी स्मार्ट थे. दोनों की सोच मिलती गई और वो एक प्रोडक्ट बनाने की कोशिश करने लगे. स्टीव वोज्नियाक नए आइडिया और डिजाइन लेकर आते थे, वहीं स्टीव जॉब्स पैकेजिंग और मार्केटिंग में माहिर थे. 

गैराज में शुरू की कंपनी

स्टीव जॉब्स और स्टीव वोज्नियाक ने सबसे पहले एक वीडियो गेम के लिए सर्किट बॉक्स बनाया. इसके बाद दोनों ने ब्लू बॉक्स बनाया, जिसने एपल कंपनी की नींव रखी. यहां से एक कंप्यूटर बनाने वाली कंपनी की शुरुआत हुई. यानी एक गैराज में बैठे दो लोगों ने भविष्य की सबसे बड़ी कंपनी खड़ी करना शुरू कर दिया था. साल 1971 में महज 21 साल की उम्र में स्टीव जॉब्स ने एपल कंपनी को लॉन्च कर दिया था. 

एपल कंप्यूटर किया लॉन्च

स्टीव जॉब्स और स्टीव वोज्नियाक की इस कंपनी को इनवेस्टर मिलने के बाद गाड़ी चल पड़ी. स्टीव जॉब्स चाहते थे कि कंप्यूटर्स को घर-घर तक पहुंचाया जाए, उन्होंने यूजर फ्रेंडली कंप्यूटर बनाए और पहला कंप्यूटर एपल-1 लॉन्च किया. इसके बाद जब इसका दूसरा वर्जन एपल-2 लॉन्च हुआ तो स्टीव जॉब्स ने बंपर कमाई की और 25 साल की उम्र में फोर्ब्स की लिस्ट में उनका नाम आ गया. इसके बाद उनकी कंपनी एपल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और IBM और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों को पीछे छोड़ते हुए एपल का नाम दुनियाभर में मशहूर हो गया. 

आज एपल की मार्केट वैल्यू 4 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुकी है, जो भारत समेत दुनियाभर ते सैकड़ों देशों की GDP के बराबर या उससे कहीं ज्यादा है. एपल आज दुनिया की सबसे बड़ी पांच कंपनियों की लिस्ट में शामिल है और इसकी वैल्यू हर साल लगातार तेजी से बढ़ती जा रही है. 

लेखक के बारे में
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मुकेश बौड़ाई
Chief Copy Editor
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