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हिंदू और इस्लामिक न्यू ईयर कब से होता है शुरू? जानें कब मनाया जाता है नए साल का जश्न

1 जनवरी को पूरा देश नए साल का स्वागत करने के लिए तैयार है, लेकिन क्या आप जानते हैं हिंदू और मुसलमानों के लिए नया साल 1 जनवरी से शुरू नहीं होता है.

हिंदू और इस्लामिक न्यू ईयर कब से होता है शुरू? जानें कब मनाया जाता है नए साल का जश्न
कब मनाया जाता है इस्लामिक न्यू ईयर

New Year 2026: क्रिसमस के जश्न के बाद अब पूरा देश नए साल के जश्न में डूबने को तैयार है. साल 2026 आने में अब बस 1 ही दिन बाकी है. साल 2025 में ऐसे कई हादसे हुए जिसने लोगों को काफी मायूस किया, लेकिन अब लोग उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाला साल सबके लिए अच्छा साबित होगा. कोई अपने दोस्तों के साथ पार्टी की प्लानिंग कर रहा है, तो कोई परिवार के साथ घूमने निकल पड़ा है. वैसे अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से नया साल 1 जनवरी को मनाया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं हिंदू धर्म में और इस्लाम में 1 जनवरी से नहीं बल्कि किसी और दिन से नया साल शुरू होता है.

इस दिन होता है इस्लामिक न्यू ईयर

इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक मुहर्रम के पहले दिन मुस्लिम अपना न्यू ईयर मनाते हैं. ग्रेगोरियन कैलेंडर हर साल जनवरी से शुरू होता है. इस कैलेंडर के अनुसार चांद के हिसाब से हर साल न्यू ईयर का दिन बदलता है. आपको बता दें कि ईद-उल-अजहा के बाद मुहर्रम मनाया जाता है. इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार भारत में साल 2026 में 23 जून की शाम को मुहर्रम का चांद दिखाई देगा, जिसके बाद 24 जून से मुहर्रम का पाक महीना शुरू होगा और इस हिसाब से मुहर्रम का दसवां दिन यानी 'यौमे-ए-आशूरा' इस बार 2 जुलाई 2026 मनाया जाएगा. बता दें कि ये दिन इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है.

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हिंदू धर्म के हिसाब से कब मनाते हैं नया साल

ज्यातादर लोगों को लगता है कि हिंदू धर्म के हिसाब से भी नया साल 1 जनवरी से ही शुरू होता है, लेकिन ऐसा नहीं है जिस तरह इस्लाम में 1 जनवरी से नया साल शुरू नहीं होता ठीक उसी तरह हिंदू धर्म में भी 1 तारीख से नया साल शुरू नहीं होता है. सनातन परंपरा में हिंदू धर्म में नए साल की शुरुआत चैत्र के महीने से मानी जाती है. हिंदू पंचांग के मुताबिक चैत्र पहला महीना होता है और फाल्गुन आखिरी.

नया साल, नई उम्मीदें

कुल मिलाकर देखा जाए तो अलग-अलग धर्मों और परंपराओं में नए साल की शुरुआत भले ही अलग तारीखों पर होती हो, लेकिन भावनाएं एक जैसी रहती हैं. हर नया साल नई उम्मीद, नई सोच और बेहतर कल की कामना के साथ आता है. यही वजह है कि चाहे 1 जनवरी हो, मुहर्रम हो या चैत्र मास, नया साल लोगों की लाइफ में पॉजिटिव चेंज लेकर आता है.

लेखक के बारे में
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मुकेश बौड़ाई
Chief Copy Editor
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