नीट पेपर लीक और एजुकेशन सिस्टम में तमाम खामियों को लेकर देशभर में प्रदर्शन हुए. दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले हजारों छात्र जमा हुए और अपनी मांगों को मनवाकर ही दम लिया. इस दौरान पुलिस लाठीचार्ज से लेकर पैलेट गन और अब एके-47 की खूब चर्चा है. बिहार के सीवान से एक वीडियो सामने आया, जिसमें एक पुलिस का जवान प्रदर्शनकारियों पर एके-47 से फायर करते हुए दिख रहा है. अब इस जवान को सस्पेंड कर दिया गया है. प्रदर्शन के दौरान हथियारों के इस्तेमाल को लेकर हमने पूर्व दिल्ली पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार से बातचीत की और समझा कि आखिर इसके नियम क्या हैं. इसके अलावा सीनियर क्राइम जर्नलिस्ट से भी इसे लेकर बातचीत की.
क्या है हथियारों का नियम?
किसी भी प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों या सुरक्षाबलों के हथियार रखने के नियम को लेकर जब दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार से हमने सवाल किया तो उन्होंने कहा, जो भी प्रबंध होते हैं या फिर जो भी तैयारी होती है, वो इंटेलिजेंस रिपोर्ट के आधार पर होती है. अगर ये आशंका है कि क्राउड हिंसक हो सकता है तो उस हिसाब से जवानों की तैनाती की जाती है. इस दौरान रॉइट पुलिस की तैनाती भी होती है. इनके पास शील्ड, टियर गैस शेल, वॉटर कैनन जैसी चीजें होती हैं. किसी जमाने में रबर बुलेट रखी जाती थीं, लेकिन इन्हें अब बंद कर दिया गया है.
पूर्व पुलिस कमिश्नर ने बताया कि, भीड़ के ज्यादा ही उत्पात करने की आशंका होने पर एक आर्म्ड यानी हथियारों से लैस यूनिट भी तैनात होती है. हालांकि भीड़ के कंट्रोल में एके-47 का कोई प्रावधान नहीं है. आमतौर पर इन जवानों के पास नॉर्मल राइफल्स होती हैं. आमतौर पर छोटे प्रदर्शनों में हथियारों की जरूरत नहीं पड़ती है.
गोली चलाने के क्या हैं नियम?
सीनियर क्राइम जर्नलिस्ट ललित वत्स ने इस मामले पर एनडीटीवी से बातचीत में बताया, आमतौर पर प्रदर्शन के दौरान कमांडेंट और डिप्टी कमांडेंट की जिम्मेदारी होती है कि वो हर जवान की प्रॉपर ब्रीफिंग करे और बताए कि किस हाल में कौन सा एक्शन होना चाहिए. RAF के पास पैलेट गन्स होती हैं, इससे पहले भी कई बार इन्हें इस्तेमाल किया गया है. दिल्ली में इसके इस्तेमाल के आरोपों की जांच हो रही है, इसकी पुष्टि फॉरेंसिक जांच के बाद होगी.
ललित वत्स ने बताया कि, नॉर्मल प्रैक्टिस यही है कि अगर आपकी जान पर बन आए तो आप हथियार का इस्तेमाल कर अपना बचाव कर सकते हैं. सेल्फ डिफेंस के अधिकार के तहत ये आता है. किसी भी प्रदर्शन के दौरान जवानों के साथ एक या दो सीनियर अधिकारी जरूर होते हैं, जो बताते हैं कि कब क्या करना है. कोई जवान भीड़ से घिर जाए या फिर प्रदर्शन इतना उग्र हो कि आखिरी विकल्प गोली चलाने का हो तो माना जा सकता है, लेकिन सीधे दूर से प्रदर्शनकारियों पर गोली चला देना SOP में शामिल नहीं है.
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