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वैभव सूर्यवंशी से बाल मजदूरी कराने के आरोप, राजस्थान रॉयल्स पर बरसे एक्टिविस्ट; जानें क्या कहता है कानून

Vaibhav Sooryavanshi Child Labour Law: 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को राजस्थान रॉयल्स की ओर से IPL में खेलने पर चाइल्ड लेबर का आरोप लगा है. सोशल एक्टिविस्ट ने FIR तक दर्ज कराने की चेतावनी दी है. जानिए भारत का चाइल्ड लेबर कानून क्या कहता है.

वैभव सूर्यवंशी से बाल मजदूरी कराने के आरोप, राजस्थान रॉयल्स पर बरसे एक्टिविस्ट; जानें क्या कहता है कानून
Vaibhav Sooryavanshi Child Labour Law: वैभव सूर्यवंशी के खेलने को लेकर उठे सवाल

Vaibhav Sooryavanshi Child Labour Law: IPL 2026 में अपनी बल्लेबाजी से गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने वाले 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को लेकर एक और विवाद खड़ा हो गया है. राजस्थान रॉयल्स पर 'चाइल्ड लेबर' का आरोप लगया है. कहा जा रहा है कि वैभव को आईपीएल खिलाना बाल श्रम के दायरे में आता है. इस मामले को लेकर RR पर FIR दर्ज कराने की भी चेतावनी दी गई है. लेकिन क्या सच में क्रिकेट खेलना चाइल्ड लेबर है. भारत का कानून इस बारे में क्या कहता है और किन कामों में बच्चों को बिल्कुल काम नहीं कराया जा सकता है. आइए समझते हैं..

क्या है पूरा मामला?

बिहार के 15 साल के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) को राजस्थान रॉयल्स (RR) ने 1.10 करोड़ रुपए में खरीदा है. यही विवाद का मुख्य मुद्दा है. सोशल एक्टिविस्ट सीएम शिवकुमार नायक ने इसे लेकर टीम पर चाइल्ड लेबर का आरोप लगाया है. उनका तर्क है कि 15 साल की उम्र में वैभव को स्कूल में होना चाहिए, न कि प्रोफेशनल क्रिकेट की चकाचौंध में. इतनी कम उम्र में बच्चे से प्रोफेशनल काम कराना उसका शोषण (Exploitation) है.

भारत में चाइल्ड लेबर कानून क्या कहता है

भारत में बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए The Child Labour (Prohibition and Regulation) Act, 1986 बनाया गया है. इस कानून के मुताबिक, 14 साल से कम उम्र के बच्चे को 'चाइल्ड' माना जाता है. ऐसे बच्चों को खतरनाक और कुछ खास कामों में काम कराना पूरी तरह बैन है. यानी हर काम चाइल्ड लेबर नहीं होता, लेकिन कुछ काम ऐसे हैं जो पूरी तरह गैरकानूनी (illegal) हैं.

चाइल्ड लेबर कानून के अहम पॉइंट्स

1. कौन है 'बच्चा' 

कानून के मुताबिक, जिस व्यक्ति ने अपनी 14 साल की उम्र पूरी नहीं की है, वह 'बच्चा' है. 14 से 18 साल के बीच के बच्चों को 'किशोर' (Adolescent) कहा जाता है.

2. कहां काम करना एकदम मना है?

कानून के Schedule (Part A & B) में कुछ ऐसे कामों की लिस्ट है, जहां 14 साल से कम उम्र के बच्चों को रखना अपराध है. रेलवे (माल ढोना, राख साफ करना या चलती ट्रेन में सामान बेचना), खतरनाक फैक्ट्रियां (पटाखा फैक्ट्री, माचिस बनाना, बीड़ी बनाना, सीमेंट फैक्ट्री), भारी काम (खदानें, बूचड़खाने, ऑटोमोबाइल वर्कशॉप) और हानिकारक प्रोसेस (कालीन बुनाई, कपड़े की रंगाई, साबुन बनाना, ईंट के भट्टे) शामिल हैं.

3. खेल और मनोरंजन का क्या है

कानून में एंटरटेनमेंट और स्पोर्ट्स को लेकर कुछ छूट और नियम हैं. अगर कोई बच्चा अपने परिवार के साथ काम कर रहा है या किसी स्कूल या सरकारी मान्यता प्राप्त संस्था में है, तो वहां नियम थोड़े अलग हैं. यही कारण है कि क्रिकेट या फिल्मों को आमतौर पर शोषण नहीं बल्कि हुनर निखारना माना जाता है.

अगर काम बैन नहीं, तो क्या है नियम

  • अगर बच्चा किसी ऐसी जगह काम कर रहा है जहां मनाही नहीं है, तो कुछ शर्तें माननी होंगी.
  • बच्चा एक दिन में 6 घंटे से ज्यादा (आराम के समय को मिलाकर) वहां नहीं रह सकता.
  • हर 3 घंटे के काम के बाद 1 घंटे का आराम अनिवार्य है.
  • शाम 7 बजे से सुबह 8 बजे के बीच बच्चे से काम नहीं कराया जा सकता.
  • हफ्ते में एक दिन की पूरी छुट्टी देनी होगी.

अगर कोई नियम तोड़े तो क्या सजा है

अगर कोई इन कानूनों को तोड़ता है तो 3 महीने से 1 साल तक जेल हो सकती है या या 10,000 से 20,000 रुपए तक जुर्माना भरना पड़ सकता है या फिर दोनों की सजा भुगतनी पड़ सकती है. अगर कोई दोबारा गलती करता है, तो सजा 2 लास तक बढ़ सकती है.

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