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वो देश जो पक्षियों की 'बीट' से रातोंरात बन गया था दुनिया का सबसे अमीर मुल्क... आज कैसे हैं हालात?

प्रशांत महासागर में एक छोटी सा देश है- नाउरू, जिसके पास कभी फॉस्फेट का भंडार था. ये फॉस्फेट पक्षियों की बीट से बन गया था.

वो देश जो पक्षियों की 'बीट' से रातोंरात बन गया था दुनिया का सबसे अमीर मुल्क... आज कैसे हैं हालात?
नाउरू कभी दुनिया में सबसे अमीर बन गया था.
नई दिल्ली:

क्या किसी देश को पक्षियों की 'बीट' अमीर बना सकती है? शायद इसकी किसी ने कभी कल्पना भी न की हो. मगर ये बात सच है कि दुनिया में एक ऐसा देश भी है, जिसे एक समय चिड़िया की बीट ने इतना अमीर बना दिया था कि वहां के लोगों ने नौकरी करना ही छोड़ दिया था. और तो और एक समय में वह दुनिया का सबसे अमीर देश बन गया था.

यहां जिस देश की बात हो रहा है, उसका नाम नाउरू है जो एक आइलैंड कंट्री है. यह देश दक्षिणी-पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित है. ये सिर्फ 21 वर्ग किलोमीटर में फैला है और यह दुनिया का तीसरा सबसे छोटा देश है. यहां की आबादी कुछ 11 हजार के आसपास ही है. 

इस छोटे से देश पर कई मुल्कों ने राज किया है. कभी इस पर जर्मनी का कब्जा था तो कभी ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और ब्रिटेन का राज रहा. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान ने इस पर कब्जा कर लिया था. विश्व युद्ध में हार के बाद जापान तो चला गया लेकिन नाउरू दोबारा ऑस्ट्रेलिया के कब्जे में आ गया. आखिरकार 31 जनवरी 1968 को इसे ऑस्ट्रेलिया से आजादी मिली.

पक्षियों की बीट ने कैसे बना दिया था अमीर?

नाउरू एक ऐसा द्वीप था, जहां हजारों सालों से चिड़िया बीट करती थीं. ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (ABC) के अनुसार, नाउरू के ज्यादातर हिस्से के नीचे फॉस्फेट के बड़े भंडार थे,जो हजारों सालों में पक्षियों की बीट जमा होने से बने थे. 

जब इन भंडारों का पता चला और बड़े पैमाने पर इनकी खुदाई हुई, तो ये दुनिया भर की खेती के लिए बहुत कीमती हो गए, क्योंकि फॉस्फेट खाद का एक जरूरी हिस्सा है.

फॉस्फेट से होने वाली कमाई ने नाउरू के लिए सबकुछ बदल दिया. 1970 के दशक में फॉस्फेट के निर्यात से जबरदस्त कमाई हुई. सरकार ने विदेशों में संपत्ति जमा की, प्रॉपर्टी में निवेश किया और फंड बनाए. नाउरू अचानक से बहुत अमीर बन गया था.

ब्रिटानिका की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले फॉस्फेट इंडस्ट्री का मालिकाना हक और संचालन ऐसी कंपनियों के पास था जिसे ब्रिटिश, ऑस्ट्रेलियाई और न्यूजीलैंड की सरकारें मिलकर चलाती थीं. लेकिन आजादी के फॉस्फेट की खुदाई का पूरा कंट्रोल नाउरू के हाथ में आ गया. 

1980 के दशक में नाउरू कुछ समय के लिए पर कैपिटा जीडीपी के मामले में दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक बन गया. जमीन के मालिकों को फॉस्फेट की कमाई से रॉयल्टी मिलती थी और लोगों ने अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ दी थी.

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लेकिन फिर फॉस्फेट खत्म होने लगा

नाउरू जिस फॉस्फेट के दम पर रातों-रात अमीर हुआ था, वही फॉस्फेट यहां कुछ सालों बाद खत्म होने लगा. 

ब्रिटानिका के मुताबिक, 20वीं सदी के आखिर तक फॉस्फेट के भंडार तेजी से खत्म हो रहे थे, और नाउरू की कमाई में भारी गिरावट आई, जिससे 21वीं सदी की शुरुआत तक देश लगभग दिवालिया हो गया. आर्थिक दबाव बढ़ने के साथ, अच्छे दिनों में जमा की गई संपत्ति को धीरे-धीरे बेचा जाने लगा.

नाउरू ने फिर कमाई के लिए दूसरे स्रोत तलाशने शुरू किए. हालांकि, 2000 के दशक के पहले दशक के आखिर में देश को कुछ आर्थिक राहत मिली, जब माइनिंग से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत और सुधार से बचे हुए मुख्य फॉस्फेट भंडारों को निकालने और एक्सपोर्ट करने में तेजी आई और मुश्किल जगहों पर मौजूद फॉस्फेट भंडारों को निकालना भी संभव हो गया.

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आज कैसा है नाउरू?

21वीं सदी की शुरुआत में, नाउरू ऑस्ट्रेलिया जाने वाले सैकड़ों शरणार्थियों को कुछ समय के लिए अपने यहां रखने पर सहमत हुआ, जब तक कि उनके आवेदनों पर कार्रवाई पूरी न हो जाए. इसके बदले में, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने नाउरू को लाखों डॉलर की मदद दी.

नाउरू कुछ सालों तक गरीब हो गया था. लेकिन समंदर पर गहरी पकड़ ने इसे फिर से उठा दिया. नाउरू का एक 'एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन' है जो उसके तट से बहुत दूर तक फैला हुआ है. इन इलाकों में टूना मछली का कीमती भंडार है, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत मांग है. 

प्रशांत क्षेत्र के कई देशों के लिए, समंदर जमीन की तुलना में कहीं ज्यादा बड़ी आर्थिक संपत्ति है, और नाउरू को भी इससे फायदा हुआ. आज के समय में नाउरू मछली पकड़ने के राइट्स देता है, जिसके बदले में उसे अच्छा-खासा रेवेन्यू मिलता है.

मार्च 2025 में, नाउरू ने 'गोल्डन पासपोर्ट' की घोषणा की थी. इसका मकसद आइलैंड की 90% आबादी को ऊंची जमीन पर बनी एक नई बस्ती में बसाने के लिए पैसे जुटाना था. इस पासपोर्ट के जरिए नाउरू नागरिकता देता है और इसके लिए कम से कम 1.05 लाख डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. 

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, आज के समय में नाउरू की जीडीपी लगभग 18 करोड़ डॉलर है. आज नाउरू की पर कैपिटा जीडीपी 14,639 डॉलर है. 

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