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This Article is From Sep 24, 2025

मौत के कितनी देर बाद तक चलता रहता है दिमाग, इस दौरान क्या सोचता है इंसान?

Brain Function After Death: कई लोगों को इस बात में दिलचस्पी होती है कि जब इंसान की मौत होती है तो उसके दिमाग में क्या चल रहा होता है? इसे लेकर कई तरह की स्टडी हुई हैं.

मौत के कितनी देर बाद तक चलता रहता है दिमाग, इस दौरान क्या सोचता है इंसान?
मौत के वक्त दिमाग में क्या चल रहा होता है

इंसान अपनी पूरी जिंदगी में कई तरह की यादें अपने दिमाग में स्टोर करता है, इनमें कुछ उसके लिए खुशी देने वाली होती हैं तो कुछ काफी दर्दनाक भी हो सकती हैं. हर वक्त हमारे दिमाग में कुछ न कुछ चल रहा होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मौत के बाद दिमाग क्या सोचता है और कितनी देर तक एक्टिव रहता है? ये कुछ ऐसी बातें हैं, जिन्हें शायद ही ज्यादा लोग जानते हों और इसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे. 

चूहों पर की गई स्टडी

इंसान की मौत के बाद उसके दिमाग में क्या-क्या चलता है, इसे लेकर लगातार रिसर्च हो रही है और साइंटिस्ट कई बड़े खुलासे करने की तैयारी में हैं. इसे लेकर इंसानों से पहले चूहों के दिमाग को स्टडी किया गया, जिसमें चौंकाने वाली बात सामने आई. साल 2013 में चूहों पर हुई इस स्टडी में पता चला कि मौत के बाद दिमाग में कई तरह के केमिकल रिलीज हुए थे. जिनमें सेरोटोनिन, डोपामाइन और नोरेपाइनफ्राइन शामिल थे. 

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सेरोटोनिन दिमाग में तब रिलीज होता है जब हमें भ्रम जैसी स्थिति होती है. वहीं डोपामाइन तब रिलीज होता है जब हम अच्छा महसूस करते हैं, नोरेपाइनफ्राइन सतर्क होने के दौरान दिमाग में बनता है. इसके बाद 2015 में भी एक ऐसी ही स्टडी हुई थी, जिसमें भी यही बात सामने आई थी कि मौत के बाद भी चूहों का दिमाग काम कर रहा था और काफी देर तक एक्टिव था. 

इंसानों का दिमाग भी रहता है एक्टिव

ऐसा नहीं है कि इंसानों के दिमाग पर अब तक ऐसी स्टडी नहीं हुई है. साल 2023 में एक रिसर्च पब्लिश हुई थी, जिसमें कुछ ऐसे लोगों के दिमाग को टेस्ट किया गया जो कोमा में थे और मरने के बेहद करीब थे. उनके परिजनों की इजाजत से जब उनका लाइफ सपोर्ट हटाया गया तो पता चला कि ऐसा करने के बाद भी उनका दिमाग एक्टिव था. 

दिमाग में क्या चलता है?

नर्वस सिस्टम की स्टडी करने वालीं साइंटिस्ट जिमो बोरजीगिन ने बीबीसी से बातचीत में बताया था कि मौत के बाद इंसानों के दिमाग में टेम्पोरल लोब्स में एक्टिविटी देखने को मिली. ये वो हिस्सा होता है, जो दूसरों के लिए फीलिंग या फिर सहानुभूति को महसूस करवाता है. उन्होंने बताया कि मौत के करीब पहुंचते ही इंसान दूसरों के लिए ज्यादा संवेदनशील हो जाता है. मौत होने के बाद दिमाग कुछ सेकेंड तक लड़ता रहता है, लेकिन ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण ब्रेन डेड हो जाता है. 

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