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दिल्ली के तुर्कमान गेट पर गरजे थे इंदिरा सरकार के बुलडोजर, इमरजेंसी के दौरान मच गया था बवाल

Delhi Turkman Gate Bulldozer Action: दिल्ली के तुर्कमान गेट पर बुलडोजर एक्शन की काफी चर्चा हो रही है, हालांकि इस इलाके ने पहली बार ऐसा कुछ नहीं देखा है. इंदिरा गांधी के दौर में यहां एक ऐसी बुलडोजर कार्रवाई हुई थी, जिसकी यादें आज भी ताजा हैं.

दिल्ली के तुर्कमान गेट पर गरजे थे इंदिरा सरकार के बुलडोजर, इमरजेंसी के दौरान मच गया था बवाल
तुर्कमान गेट पर संजय गांधी ने चलवाया था बुलडोजर

Delhi Turkman Gate Bulldozer Action: दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद के नजदीक अचानक माहौल तनावपूर्ण हो गया. यहां अवैध अतिक्रमण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान अचानक लोगों की भीड़ जमा हो गई और पत्थरबाजी शुरू हुई. इस घटना के बाद इलाके में पुलिस और सुरक्षाबलों की भारी तैनाती है. तुर्कमान गेट के पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और किसी भी तरह की घटना से निपटने की पूरी तैयारी हो चुकी है. हालांकि तुर्कमान गेट ने ऐसा एक्शन और पुलिसबल पहली बार नहीं देखा है, इंदिरा गांधी के दौर में भी इस इलाके में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा था, जब यहां एक साथ कई बुलडोजर गरजने लगे. आज हम आपको दिल्ली में हुए इस पहले बुलडोजर एक्शन की पूरी कहानी बता रहे हैं. 

इमरजेंसी के बाद संजय गांधी की हनक

इंदिरा गांधी जब सत्ता में थीं, तब उन्होंने 1975 में देश में पहली बार इमरजेंसी लगा दी. इस दौरान कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और उठने वाली हर आवाज को दबाने की कोशिश हुई. इसके बाद इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी ने बिना किसी पद के कई चीजों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली थी, इसमें नसबंदी और दिल्ली की सूरत बदलना भी एक था. 

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तुर्कमान गेट पर पड़ी संजय गांधी की नजर

इसी दौरान एक दिन संजय गांधी की नजर तुर्कमान गेट पर बनी सैकड़ों झुग्गियों और बस्तियों पर गई, इस दौरान उनके साथ डीडीए के उपाध्यक्ष जगमोहन मल्होत्रा भी मौजूद थे. तब संजय गांधी ने उनसे कहा कि वो चाहते हैं तुर्कमान गेट से जामा मस्जिद का नजारा साफ दिखे. बॉस के ऐसे कहते ही जगमोहन मल्होत्रा ने हुकुम बजाना शुरू किया और तुर्कमान गेट इलाके में बड़ी कार्रवाई का खाका तैयार हो गया. ये बात साल 1976 की है. 

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दिल्ली में पहली बार गरजे बुलडोजर 

बुलडोजर एक्शन की आज काफी चर्चा होती है, लेकिन 1976 में पहली बार देश और राजधानी दिल्ली ने इसका असली रूप देख लिया था. 13 अप्रैल 1976 को पहली बार दिल्ली के तुर्कमान गेट की तरफ बुलडोजर बढ़ने लगे, जिन्हें देखकर वहां रहने वाले हजारों लोग सड़कों पर उतर आए, अगले कुछ दिन तक ये विरोध तेज हो गया और इलाके में कर्फ्यू लगाना पड़ा. इस दौरान कई लोगों की मौत भी हुई. देखते ही देखते बस्तियां मलबे में तब्दील हो गईं और यहां रहने वाले हजारों लोगों को दूसरे इलाकों में शरण लेनी पड़ी. 

क्या है मौजूदा मामला?

मौजूदा मामले की बात करें तो दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास स्थित फ़ैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण को ध्वस्त करने एमसीडी के करीब 30 बुलडोजर पहुंचे थे. दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद ये कार्रवाई शुरू हुई. इस एक्शन के दौरान स्थानीय लोगों की पुलिस के साथ झड़प शुरू हो गई और पत्थरबाजी की घटना भी हुई. इसके बाद पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा और इलाके में भारी पुलिसबल तैनात कर दिया गया. 

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