मुंबई नगर निगम यानी BMC के चुनाव जैसे ही नजदीक आते हैं या फिर उसके नतीजे आने लगते हैं. तब लोगों के बीच एक पुराना सवाल फिर उठने लगता है. वो सवाल ये कि आखिर शहर में ज्यादा ताकतवर कौन होता है, मेयर या विधायक? आमतौर पर लोग सोचते हैं कि मेयर शहर का मुखिया होता है. इसलिए वही सबसे बड़ा पद होगा. कुछ लोग सोचते हैं कि विधायक सीधे सरकार का हिस्सा होते हैं इसलिए वो ज्यादा ताकतवर होंगे. लेकिन ये तय कर पाना इतना आसान नहीं. असल में मेयर और विधायक दोनों की जिम्मेदारियां अलग होती हैं. उनका काम करने का तरीका भी अलग है.
मेयर कौन होता है और उसकी भूमिका क्या है?
मेयर नगर निगम का सबसे मुख्य प्रतिनिधि होता है. और उसे शहर का फर्स्ट पर्सन भी कहा जाता है. नगर निगम की बैठकों की अध्यक्षता करना, शहर के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कराना और उनके लिए प्लानिंग तैयार करवाना उसका मुख्य काम होता है. सफाई, पानी की सप्लाई, सड़कें, ट्रैफिक और शहर की बेसिक सुविधाओं में उसकी अहम भूमिका मानी जाती है. लेकिन प्रशासनिक और बजट से जुड़े बड़े फैसले नगर निगम के कमिश्नर लेते हैं. जिन्हें राज्य सरकार नियुक्त करती है. इसलिए कई बार मेयर का पद रिस्पेक्ट और रसूख तो हासिल करता है. लेकिन उसकी कार्यकारी शक्ति लिमिटेड ही रह जाती है.
विधायक क्या करता है और उसके पास क्या अधिकार होते हैं?
विधायक सीधे जनता के जरिए, वोटिंग से चुना जाता है. और, वो राज्य विधानसभा का सदस्य होता है. उसका काम कानून बनाना, सरकार से सवाल पूछना, नीतियों पर बहस करना और अपने क्षेत्र के विकास के लिए फंड लाना होता है. अगर विधायक रूलिंग पार्टी से जुड़ा हो. तो उसकी पहुंच मंत्रियों और मुख्यमंत्री तक आसान हो जाती है. ऐसे में उसकी राजनीतिक ताकत और प्रभाव काफी बढ़ जाता है.
फिर ज्यादा ताकतवर कौन माना जाता है?
कानूनी और राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तो विधायक को मेयर से ज्यादा शक्तिशाली माना जाता है. क्योंकि वो राज्य स्तर पर फैसलों में शामिल होता है. मेयर की भूमिका ज्यादातर शहर की सीमा तक ही रहती है. हालांकि मुंबई जैसे बड़े शहर में BMC बहुत अमीर और प्रभावशाली संस्था है. इसलिए यहां का मेयर भी पूरी तरह कमजोर नहीं माना जा सकता.
DAVOS का मतलब क्या होता है? जानें यहां क्यों जुटते हैं बिजनेस के दिग्गज
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं