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जीरो से लेकर शैंपू तक...भारत की खोजें और योगदान, जिनका इस्तेमाल आज पूरी दुनिया करती है

भारत को दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक माना जाता है. विज्ञान, गणित, चिकित्सा, दर्शन और संस्कृति के क्षेत्र में भारत ने सदियों से महत्वपूर्ण योगदान दिया है. क्‍या आप जानते हैं कि ऐसी कई चीजें हैं, जिनका उपयोग आज पूरी दुनिया करती है और जिनकी जड़ें भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़ी मानी जाती हैं.

जीरो से लेकर शैंपू तक...भारत की खोजें और योगदान, जिनका इस्तेमाल आज पूरी दुनिया करती है

भारत को दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक माना जाता है. विज्ञान, गणित, चिकित्सा, दर्शन और संस्कृति के क्षेत्र में भारत ने सदियों से महत्वपूर्ण योगदान दिया है. क्‍या आप जानते हैं कि ऐसी कई चीजें हैं, जिनका उपयोग आज पूरी दुनिया करती है और जिनकी जड़ें भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़ी मानी जाती हैं. इनमें शून्य (Zero), शतरंज (Chess) और शैंपू (Shampoo) जैसी चीजें शामिल हैं. 

भारत से दुनिया पहुंची ये चीजें 

शून्य (Zero)

भारतीय गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त ने 7वीं शताब्दी में शून्य के साथ गणित के नियमों को व्यवस्थित रूप से समझाया. बाद में यह अवधारणा अरब देशों के माध्यम से यूरोप पहुंची और आधुनिक गणित तथा कंप्यूटर विज्ञान की नींव बनी. आज बैंकिंग, इंजीनियरिंग, अंतरिक्ष विज्ञान, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक हर क्षेत्र में शून्य की महत्वपूर्ण भूमिका है. 

शैंपू (Shampoo)

आज लगभग हर घर में शैंपू का इस्तेमाल होता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि Shampoo शब्द हिंदी/हिंदुस्तानी के चांपो (मालिश करो) से निकला है. भारत में सदियों से रीठा, आंवला, शिकाकाई और विभिन्न औषधीय पौधों से बाल साफ करने की परंपरा रही है. ब्रिटिश शासन के दौरान यह शब्द अंग्रेजी भाषा में पहुंचा और धीरे-धीरे आधुनिक शैंपू उद्योग का हिस्सा बन गया. 

शतरंज (Chess)

दुनिया के सबसे लोकप्रिय बोर्ड गेम्स में शामिल शतरंज का प्रारंभिक रूप 'चतुरंग' माना जाता है, जिसकी शुरुआत लगभग 6वीं शताब्दी के आसपास भारत में हुई थी. बाद में यह खेल फारस पहुंचा, जहां इसे शतरंज कहा जाने लगा और फिर यूरोप होते हुए पूरी दुनिया में फैल गया. 

बटन (Buttons)

पुरातत्वविदों को सिंधु घाटी सभ्यता से लगभग 5,000 वर्ष पुराने सजावटी बटन मिले हैं. ये बटन मुख्य रूप से सीप (Shell) और अन्य प्राकृतिक पदार्थों से बनाए जाते थे. हालांकि, उस समय इनका उपयोग आधुनिक कपड़ों को बंद करने के बजाय सजावट के लिए अधिक किया जाता था. इसलिए इतिहासकार इसे आधुनिक बटन का सीधा आविष्कार नहीं, बल्कि उसके शुरुआती प्रमाणों में से एक मानते हैं. 

रूलर (Measuring Scale)

सिंधु घाटी सभ्यता से हाथीदांत (Ivory) और अन्य सामग्री से बने मापने वाले पैमाने (Rulers) मिले हैं. इन पर बेहद सटीक माप अंकित थे, जिससे पता चलता है कि उस समय के लोग निर्माण कार्य और व्यापार में मानकीकृत माप प्रणाली का उपयोग करते थे. यह उस दौर की उन्नत शहरी योजना और इंजीनियरिंग का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है. 

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कपास (Cotton Cultivation)

भारत और पाकिस्तान के वर्तमान क्षेत्र में स्थित सिंधु घाटी सभ्यता से दुनिया में कपास की शुरुआती खेती और सूती वस्त्रों के उपयोग के सबसे पुराने प्रमाण मिले हैं. हजारों साल पहले यहां के लोग कपास उगाकर उससे कपड़ा बनाते थे. 

भारत का योगदान केवल इन्हीं तक सीमित नहीं

इतिहासकारों के अनुसार, भारत ने आयुर्वेद, धातुकर्म, खगोल विज्ञान, गणित और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है. हालांकि, किसी भी ऐतिहासिक दावे को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि कई खोजें और तकनीकें अलग-अलग सभ्यताओं में समय के साथ विकसित हुईं. 

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