पूरे विश्व में मजदूर दिवस मनाया जा रहा है. वहीं बड़े-बड़े संगठन मजूदरों के विकास और रोजी-रोटी देने की बात की जा रही है. लेकिन मजदूरों की जमीनी हकीकत कितनी अच्छी है, उसका पता पलामू के मजदूरों से पता चलता है. जहां दूसरे जिले से पलामू कमाने आए मजदूरों को अब पलायन करना पड़ रहा है. अब मजदूर रोजी-रोटी की मजबूरी में अब दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को तैयार है.
दरअसल, पलामू जिले में निर्माण की रफ्तार थम सी गई है, वजह है-बालू. जिले के बालू घाटों की नीलामी न होने से अब इसका सीधा असर गरीब मजदूरों के पेट पर पड़ रहा है. न घर बन रहे हैं, न सड़कें, और न ही मजदूरों को काम मिल रहा है. नतीजा दो वक्त की रोटी के लिए मजदूर अब दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं. मेदिनीनगर में दिहाड़ी मजदूरी करने आने वाले मजदूरों को काम भी नहीं मिलता उन्हें वापस भी जाना पड़ रहा है.
-
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
रुपये की गिरती कीमत पर RBI गवर्नर का बड़ा बयान, कोई फिक्स लेवल नहीं, जानिए क्या है रिजर्व बैंक का एक्शन प्लान -
टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग अनिवार्य? RBI गवर्नर ने NDTV समिट में बताया ये क्यों है जरूरी -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
सरकारी फाइल अटकने का खामियाजा भुगत रहे मजदूर
पलामू के कोयल और अमानत नदी के तट आज सूने पड़े हैं. सरकारी फाइलों में बालू घाटों की नीलामी अटकी है, लेकिन जमीन पर इसका खामियाजा हजारों परिवार भुगत रहे हैं. जिले में बालू की भारी किल्लत की वजह से बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स से लेकर आम आदमी के घर बनाने के सपने तक, सब पर 'ब्रेक' लग गया है। जिससे मजदूर भी प्रभावित हैं.
सुबह होती है उम्मीद दोपहर होते-होते दम तोड़ देती
जहां हर सुबह सैकड़ों मजदूर इस उम्मीद में जुटते हैं कि कोई उन्हें काम पर ले जाएगा. लेकिन दोपहर होते-होते ये उम्मीदें दम तोड़ देती हैं. बालू नहीं है, तो राजमिस्त्री को काम नहीं मिल रहा, और राजमिस्त्री को काम नहीं मिल रहा, तो इन दिहाड़ी मजदूरों के हाथ खाली हैं. मजदूरों का कहना है बालू के करना काम नहीं मिल रहा. पहले रोज काम मिलता था.
पलामू में बालू संकट अब सिर्फ निर्माण की समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ी सामाजिक और आर्थिक चुनौती बन चुका है. अगर जल्द ही बालू घाटों की नीलामी कर उठाव शुरू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में पलायन का यह आंकड़ा और भी भयावह हो सकता है.
यह भी पढ़ेंः चतरा में नदी की गंदगी चूसकर प्यास बुझा रहे आदिवासी, बच्चे पड़े बीमार! DC का तुरंत एक्शन, देखें हकीकत
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं