- IIIT रांची में प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य कुमार की मौत पर शिक्षा मंत्रालय ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई है
- आदित्य कुमार का शव हॉस्टल के कमरे में मिला था, जहां दरवाजा अंदर से बंद था और पुलिस मामले की जांच कर रही है
- छात्र प्रदर्शन के दौरान संस्थान निदेशक के इस्तीफे की मांग की और हॉस्टल की अन्य सुविधाओं को लेकर नाराजगी जताई
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) रांची में प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य कुमार की मौत के बाद मामला लगातार चर्चा में है. अब शिक्षा मंत्रालय ने पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है. मंत्रालय का कहना है कि समिति छात्र की मौत से जुड़े हालात की समीक्षा करेगी और यह भी जांचेगी कि संस्थान में छात्रों के लिए जरूरी सुविधाएं ठीक तरह से उपलब्ध हैं या नहीं.
हॉस्टल के कमरे में मिला था छात्र का शव
बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले 20 वर्षीय आदित्य कुमार का शव 10 अक्टूबर की रात संस्थान के खेलगांव स्थित हॉस्टल के कमरे में मिला था. पुलिस के अनुसार कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था. अन्य छात्रों ने स्थिति संदिग्ध लगने पर प्रशासन को सूचना दी जिसके बाद दरवाजा खोला गया. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है.
छात्रों ने लगाए गंभीर आरोप
घटना के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. छात्रों का आरोप है कि आपात स्थिति में समय पर उचित चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी. प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने दावा किया कि हॉस्टल की लिफ्ट काम नहीं कर रही थी. इसके अलावा कैंपस में मौजूद एम्बुलेंस में ऑक्सीजन जैसी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं. कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि जरूरत के समय एम्बुलेंस चालक उपलब्ध नहीं था. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी.
डायरेक्टर के इस्तीफे की भी मांग
छात्रों का प्रदर्शन अगले कई दिनों तक जारी रहा. प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने संस्थान के निदेशक प्रोफेसर राजीव श्रीवास्तव के इस्तीफे की मांग की. उनका कहना है कि प्रशासन को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए. छात्रों ने हॉस्टल में भोजन की गुणवत्ता, पीने के पानी की व्यवस्था, बिजली आपूर्ति और परिवहन सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी जताई.
समिति किन मुद्दों की करेगी जांच
शिक्षा मंत्रालय द्वारा बनाई गई समिति की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय दक्षिण परिसर की निदेशक प्रोफेसर रजनी अब्बी करेंगी. समिति में एक वरिष्ठ मनोचिकित्सक और मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी शामिल किया गया है.
यह समिति संस्थान में मेडिकल सहायता व्यवस्था, हॉस्टल सुविधाएं, काउंसलिंग और मेंटरिंग सिस्टम, छात्रों की शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया तथा छात्रों के लिए उपलब्ध सहायता तंत्र की समीक्षा करेगी. समिति विभिन्न पक्षों से बातचीत करेगी और जरूरी दस्तावेजों की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी.
छात्रों के हितों को प्राथमिकता
शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि जांच के दौरान संस्थान का कामकाज सामान्य रूप से चलता रहे इसके लिए अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था भी की जा रही है. मंत्रालय का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा, सुविधा और मानसिक स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है. फिलहाल समिति की रिपोर्ट जमा करने की कोई समय सीमा तय नहीं की गई है लेकिन इसकी सिफारिशों के आधार पर आगे जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं.
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