Jharkhand politics: झारखंड के कोयलांचल में इन दिनों राजनीतिक पारा अपने चरम पर है. धनबाद और गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाकों में विवादों के केंद्र में हमेशा रहने वाले भाजपा सांसद ढुलू महतो एक बार फिर विपक्ष के निशाने पर हैं. निरसा के वामपंथी विधायक अरूप चटर्जी ने सांसद पर भ्रष्टाचार, रंगदारी और अवैध खनन जैसे गंभीर आरोप लगाकर राज्य की सियासत को हिलाकर रख दिया है. वहीं सांसद ने भी पलटवार करते हुए इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश करार दिया है.
45 रुपए दिहाड़ी से 40 हजार करोड़ कैसे?
विधायक अरूप चटर्जी ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि जो शख्स आज 40 हजार करोड़ की संपत्ति का मालिक बना बैठा है, वह कभी महज 40–45 रुपए की दिहाड़ी पर कोयला काटने का काम करता था. अरूप ने आरोप लगाया कि सांसद ने न केवल खुद अवैध वसूली का तंत्र खड़ा किया है, बल्कि अपने बेटे प्रशांत को भी इसमें शामिल कर लिया है. अरूप के शब्दों में— “लोग अपने बच्चों को पढ़ा कर IAS IPS या फिर अच्छे अधिकारी बनना चाहते है पर ढुल्लु अपने बेटे को गुंडा बना डाला”.
विधायक का दावा है कि महेशपुर साइडिंग से लेकर बाघमारा के कई इलाकों में बीसीसीएल और आउटसोर्सिंग कंपनियों के नाम पर बड़े पैमाने पर रंगदारी वसूली जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद के प्रभाव में छह भट्ठे सीधे उनके नाम पर और सात अन्य भट्ठे पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए चल रहे हैं, जिनसे प्रतिमाह 30–40 करोड़ की काली कमाई की जा रही है.
संरक्षण का खेल और एकजुट होता विपक्ष
ढुलू महतो के खिलाफ केवल अरूप चटर्जी ही नहीं, बल्कि सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों के कई नेता लामबंद हो गए हैं. इसमें डुमरी विधायक जयराम महतो, बेरमो विधायक अनूप सिंह, धनबाद भाजपा विधायक राज सिन्हा, झरिया विधायक रागिनी सिंह और जमशेदपुर पश्चिमी विधायक सरयू राय जैसे नाम प्रमुख हैं. इन सभी का एक ही सुर है कि सांसद की दबंगई और उनकी बेतहाशा संपत्ति की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए.
आरोप यह भी है कि महतो को राज्य से लेकर दिल्ली तक के प्रभावशाली लोगों का संरक्षण हासिल है, जिसके चलते जमीन अधिग्रहण और अवैध संपत्ति के खेल पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती. निरसा विधायक ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में गरीबों के मसीहा हैं तो कब्जायी गई 100 एकड़ जमीन वापस कर दें.
व्यक्तिगत टिप्पणी और शुरू हुआ विवाद
इस पूरे घमासान की शुरुआत सांसद द्वारा अरूप चटर्जी के दिवंगत पिता और पूर्व विधायक गुरुदास चटर्जी के बारे में की गई एक विवादित टिप्पणी से हुई. अरूप ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके पिता तीन बार विधायक रहे, जबकि ढुलू महतो 2009 में पहली बार राजनीति में आए.
दरअसल, ढुलू महतो का परिवारों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करना पुराना रिकॉर्ड रहा है. इससे पहले वे राजेंद्र सिंह, सूर्यदेव सिंह, जयराम महतो और राज सिन्हा जैसे नेताओं के परिवारों पर भी विवादित बयान दे चुके हैं.
सांसद का तीखा पलटवार
आरोपों की झड़ी के बीच ढुलू महतो ने भी करारा जवाब दिया है. उन्होंने अरूप चटर्जी के आरोपों को निराधार और संगठनबद्ध साजिश बताया. सांसद ने तंज कसते हुए कहा कि जिनका अपना बेटा नहीं है, वे दूसरों के दुख को नहीं समझ सकते.
उन्होंने निरसा विधायक पर बेहद निजी और गंभीर हमला करते हुए कहा “रेड लाइट एरिया में पकड़े जाने वाले विधायक मेरे चरित्र पर उंगली ना उठाये”. सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि निरसा विधायक का आसनसोल के रेड लाइट एरिया में जाना और वहां उनकी पिटाई होना जगजाहिर है.
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