रांची के करण-अर्जुन के अपहरण की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है. हालांकि, 12 दिन बाद भी सिर्फ अर्जुन को ही ढूंढ पाई, अभी भी करण और उसका दोस्त शिवा गायब है. रांची पुलिस ने उड़ीसा के पुरी रेलवे स्टेशन से अर्जुन को बरामद किया. आरपीएफ ने जब पूछताछ की तो पूरी कहानी ही पलट गई. मामला अपहरण का नहीं था, बल्कि कुछ और ही था. 12 साल के अर्जुन ने पुलिस को जो कुछ बताया, वो हैरान करने वाला था. पूछताछ में अर्जुन ने पहले अपना नाम गलत बताया. खुद को पुरी का ही निवासी भी बताने लगा. कुछ ही देर में पूरी सच्चाई बताते हुए कहा कि अगर वो झूठ नहीं बोलता तो उसे रांची भेज दिया जाता.
अर्जुन ने बताई पूरी कहानी
दरअसल, एक मई को धुर्वा के शालीमार बाजार से जुड़वा भाई करण और अर्जुन अपने दोस्त शिवा के साथ घर से निकल गए थे. तीनों दोस्त पुरी का समुद्र देखने के लिए घर से भाग गए थे. जबकि घरवालों को लगा कि उनका अपहरण हो गया है. इन बच्चों ने घर से कुछ पैसे लिए और फिर पुरी में खर्च कर दिए. अभी तक करण और शिवा के बारे में पता नहीं चल पाया है. रांची के सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि एक बच्चे को पूरी रेलवे स्टेशन पर बरामद कर लिया गया है. जबकि करण और शिवा नाम के दो बच्चे पुलिस को देखकर पूरी रेलवे स्टेशन से भाग गए थे. उन दोनों की तलाश जारी है.
सूचना देने वालों को 50 हजार का इनाम
अर्जुन का कहना है कि वो दोनों रांची वापस चले गए हैं. इधर, रांची पुलिस की अलग-अलग टीम हटिया रेलवे स्टेशन और अन्य जगहों पर करण और शिव की तलाश कर रही है. इससे पहले रांची पुलिस ने करण-अर्जुन की सूचना देने वालों को पहले 11 हजार और फिर ₹50 हजार का इनाम देने की घोषणा की थी.
पैसे खत्म हुए तो लोगों से खाना मांगकर खाया
अर्जुन ने बताया कि हटिया स्टेशन से तपस्वी एक्सप्रेस ट्रेन पकड़कर भाई करण और दोस्त शिवा के साथ पूरी पहुंचा. रांची से जो पैसे लेकर तीनों आए थे, उससे वह पूरी में घूमे. जब पैसे खत्म हो गया तो वह तीनों दूसरों से खाना मांग कर खा लेते थे.
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