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Jharkhand News: सिलेंडर की कमी भी रोक नहीं सकी देवघर के इन भोजनालयों का सेवा भाव, 5- 10 रु में गरीबों को खिला रहे भरपेट खाना

Jharkhand News: मिडिल ईस्ट संकट के कारण गैस की भारी किल्लत के बावजूद देवघर के समाजसेवी पीछे नहीं हटे. एलपीजी खत्म हुई तो लकड़ी पर खाना बनाकर मात्र ₹5 और ₹10 में गरीबों और मरीजों को भरपेट भोजन करा रहे हैं. पढ़िए ऋतुराज सिन्हा की ये रिपोर्ट.

Jharkhand News: सिलेंडर की कमी भी रोक नहीं सकी देवघर के इन भोजनालयों का सेवा भाव, 5- 10 रु में गरीबों को खिला रहे भरपेट खाना
गैस की जगह लकड़ी खरीद कर रहे है भूखे लोगों की सेवा
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Deoghar News: दुनिया भर में मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण पेट्रोलियम पदार्थों और एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत देखी जा रही है. इसका असर झारखंड के देवघर में भी साफ दिख रहा है, जहां कमर्शियल गैस की कमी के कारण कई होटल और समाजसेवी संस्थाओं के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं. लेकिन, देवघर के दो प्रमुख सेवा केंद्रों ने हार मानने के बजाय एक नई राह चुनी है. दो स्थानों ने अनोखी मिसाल पेश करते हुए लकड़ी पर भोजन बनाकर कर 5 और 10 रुपये में गरीबों के भरपेट भोजन खिला रहे है.

5 रुपये में मिलता है भरपेट खाना

5 रुपये में मिलता है भरपेट खाना
Photo Credit: NDTV

गैस की जगह लकड़ी खरीद कर रहे है भूखे लोगों की सेवा 

देवघर शहरी इलाकों में हर दिन दूर-दूर के राज्यों और इलाकों से बड़ी संख्या में मजदूर काम करने आते हैं ताकि अपना और अपने परिवार का गुजारा कर सकें. ऐसे में उनके खाने का एकमात्र जरिया शहर के सस्ते रेस्टोरेंट हैं जो उन्हें कम दामों पर भरपेट खाना देते हैं. लेकिन इस जंग की वजह से गैस संकट के कारण कई बंद हो गए कुछ ने अपने दाम बढ़ा दिए, जिसके कारण से मजदूरों की जेबें और हल्की होने लगी. ऐसे में समाजसेवी नागेंद्र नाथ बलियासे ने मजदूरों को अपने रेस्टोरेंट 'बाबूजी का प्यार शुद्ध स्वस्थ आहार' के जरिए सिर्फ 5 रुपये में भरपेट खाना देते हैं. उन्होंने इस होटल की शुरूआत करीब एक साल पहले की थी. तब से वह अभी तक इसी किमत में ही लोगों को खाना खिला रहे है. जिसमें वह चावल,दाल,सब्जी,मिठाई, पापड़,सलाद ,आचार देते  है.

चूल्हे पर बनता है खाना

चूल्हे पर बनता है खाना
Photo Credit: NDTV

चुनौती को अवसर समझकर बानाने लगे खाना 

गैस की कमी के बीच भी इतने सस्ते रेट पर खाने का इंतजाम पहले जैसा ही है. इस बारे में समाजसेवी नागेंद्र नाथ ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से गैस की कमी की वजह से उन्हें भी गरीबों को खाना देने में काफी दिक्कतें आ रही थीं. जिसकी वजह से कुछ समय के लिए खाने का प्रोग्राम रोकना पड़ा था, फिर गरीबों के खाने की चिंता में उन्होंने यह चैलेंज स्वीकार किया और चूल्हा बनवाया और बाजार से लकड़ी खरीदकर फिर से खाना देना शुरू कर दिया.

सदर अस्पताल परिसर

सदर अस्पताल परिसर
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सदर अस्पताल में मरीजों का सहारा बनीं श्रील फाउंडेशन 

सामजसेवी नगेंद्र नाथ जैसा ही जज्बा देवघर के ही सदर अस्पताल परिसर में भी 'श्रील फाउंडेशन' का भी देखने को मिला. यह संस्था भी  मरीजों और उनके परिजनों को मात्र ₹10 में दोपहर का भोजन (चावल,दाल, सब्जी, पापड़,भुजिया,सलाद ) और रात में रोटी-सब्जी करवाती है. बड़ी संख्या में लोगों का खाना बनाने के लिए भारी मात्रा में गैस चाहिए होती है, लेकिन सिलेंडर की कमी ने यहां भी चुनौती खड़ी की. ऐसे में इन्होंने इस चुनौती का सामना करते हुए  सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लकड़ी पर खाना बनाने का निर्णय लिया ताकि किसी मरीज और इनके परिजनों को भोजन के लिए कठिनाई नहीं उठानी पड़े.

स्वादिष्ट भोजन करते हुए लोग

स्वादिष्ट भोजन करते हुए लोग
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भीषण गर्मी और चूल्हे की आग में खाना बनाना एक चुनौती

श्रील फाउंडेशन एक कर्मी महिमा देव  ने बताया कि एक  तरफ उमस भरी गर्मी और ऊपर से लकड़ी की आग, इन दोनों चुनौतियों के बीच स्वस्थ और स्वादिष्ट भोजन तैयार करना किसी तपस्या से कम नहीं है.
 

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