
जम्मू के हीरानगर सान्याल इलाके में रविवार साढ़े सात बजे के बाद से कोई फायरिंग नही हुई हैं. हालांकि सेना, जम्मू कश्मीर पुलिस और सीमा सुरक्षा बल आतंकियों की तलाश में रविवार से ही लगे हुए हैं. रविवार को करीब शाम साढ़े पांच बजे इंटरनेशनल बोर्डर से 6 किलोमीटर अंदर सान्याल इलाके में एक महिला ने तीन से पांच संदिग्ध आतंकियो को देखा. इसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी. आतंकियों के साथ शाम 6.30 बजे से शाम 7.30 बजे तक सुरक्षा बलों की मुठभेड़ हुई.
आतंकियो की फायरिंग में एक एक छोटी बच्ची घायल
आतंकियो की फायरिंग में एक एक छोटी बच्ची घायल हुई, जिसके हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है. जब कल शाम साढ़े सात बजे से गोलाबारी बंद है और आतंकियो का अता पता नहीं है तो आशंका जताई जा रही है कहीं आतंकी भाग तो नहीं गए. वैसे सुबह होते ही सुरक्षाबलों ने आतंकियो की तलाशी में सघन अभियान चलाया है पर अभी तक कोई सफलता नही मिली है. हालांकि कल शाम साढ़े सात बजे से गोलीबारी बंद है, लेकिन सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर रखा है. सेना ने इसे ऑपरेशन सान्याल नाम दिया है.
सुरक्षाबल और आतंकियों के बीच गोलीबारी
सुरक्षा बलों का कहना है खुफिया जानकारी मिलने के बाद तलाशी अभियान शुरू किया और जब सुरक्षा बल इलाके में दाखिल हुए तो उन पर आतंकवादियों की ओर से भारी गोलीबारी शुरू हो गई. इसके बाद ही आतंकियो के साथ मुठभेड़ शुरू हुई. ऑपरेशन में मदद के लिए तुरंत अतिरिक्त बल भेजा गया, क्योंकि आतंकवादियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया गया था. इस बारे में कोई पक्की जानकारी नही मिल पाई है कि यह आतंकी किधर से घुसपैठ किये है ? एक थ्योरी है कि आतंकी शनिवार को खड्ड के रास्ते या आईबी पर किसी नई सुरंग के जरिए घुसपैठ करके आए हो. दूसरा इनपुट यह है कि शनिवार को 5-6 आतंकवादियों के दो समूहों ने घुसपैठ की थी.
लकड़ी लेने गई महिला ने सबसे पहले आतंकियों को देखा
रविवार शाम करीब पांच बजे सान्याल के ढोलका से सटे जंगली इलाके में लकड़ियां लेने गई महिला ने सबसे पहले आतंकियों को देखा. आतंकियों ने उन्हें बंधक बनाने का प्रयास किया. हालांकि दोनों मौके से जान बचाकर भाग निकले. इसके बाद उनकी सूचना पर एसओजी ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया. घेराबंदी देखते ही आतंकियों ने गोलियां चलानी शुरू कर दी, जिसका सुरक्षाबलों ने मुंहतोड़ जवाब दिया. वैसे पहले भी इंटरनेशनल बार्डर से घुसपैठ करने वाले आतंकी कठुआ के बिलावर से होते हुए किश्तवाड़ और फिर कश्मीर में दाखिल हो जाते है.
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