विज्ञापन
This Article is From Aug 06, 2016

सार्क सम्मेलन में पाकिस्तान के रवैये पर मोहन भागवत ने पड़ोसी देश पर साधा निशाना

सार्क सम्मेलन में पाकिस्तान के रवैये पर मोहन भागवत ने पड़ोसी देश पर साधा निशाना
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (फाइल फोटो)
  • शिवाजी के जीवन पर मराठी किताब की अनुवाद पुस्तक के लोकार्पण में बोले भागवत
  • पड़ोसी (पाकिस्तान) अपनी नाक कटवाकर भी भारत का बुरा चाहता है
  • पाकिस्तान ऐसी व्यवस्था करता है कि हम दोस्ती का हाथ न बढ़ा सकें
इंदौर: इस्लामाबाद में सार्क सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के रवैये की भारतीय संसद में निंदा के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने पड़ोसी मुल्क पर शुक्रवार को परोक्ष तौर पर निशाना साधा और कहा कि वह 'द्वेष की पराकाष्ठा' के चलते अपनी नाक कटवा कर भी भारत का बुरा चाहता है.

भागवत ने इंदौर में एक पुस्तक के लोकार्पण समारोह में पाकिस्तान की ओर सीधा इशारा करते हुए कटाक्षपूर्ण लहजे में कहा, 'द्वेष की पराकाष्ठा तो ऐसी है कि हमारी (पाकिस्तान की) अपनी हालत पतली है. लेकिन हम (पाकिस्तान) अपनी नाक कटवा कर भी पड़ोसी (भारत) के लिए अपशकुन करेंगे. हमारा पड़ोसी (पाकिस्तान) ऐसा ही बर्ताव कर रहा है.'
उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा, 'बन गए अलग (मुल्क) ..ठीक है बन गए. हम मदद करने के लिए तैयार हैं.. अपने बल पर खड़े हो जाओ. हम जब बार-बार दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं, तो वह (पाकिस्तान) ऐसी व्यवस्था करता है कि हम दोस्ती का हाथ न बढ़ा सकें.'

भागवत ने कहा कि दुनिया के मुल्कों में महाशक्ति (सुपर पॉवर) बनने के लिए स्पर्धा चल रही है, जिससे विकसित और विकासशील देश पिस रहे हैं. उन्होंने कहा, 'वैश्विक चिंतक सोच रहे हैं कि अगर ये स्पर्धा ऐसी ही चली, तो दुनिया बचेगी या नहीं. दुनिया अपने सवालों के जवाब के लिए भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है. इन प्रश्नों के उत्तर देकर हम दुनिया के सिरमौर राष्ट्र बन सकते हैं.'

भागवत, छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन चरित्र बताने वाली मराठी किताब 'शककर्ते शिवराय' के हिन्दी अनुवाद पर आधारित पुस्तक 'शकनिर्माता शिवराय' के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे. मराठी में यह किताब विजयराव देशमुख ने लिखी है, जबकि मोहन बांडे ने इसका हिन्दी अनुवाद किया है. संघ प्रमुख ने लोकार्पण समारोह में कहा कि शिवाजी के समय 'सांप्रदायिकता' और 'धर्मनिरपेक्षता' जैसे शब्द चलन में नहीं थे. लेकिन वह शासक के रूप में सभी मनुष्यों के प्रति समान भाव रखते हुए अपने कर्तव्य का पालन करते थे.

उन्होंने कहा कि इन दिनों देश में शासन करने वाले सभी लोगों को शिवाजी के राज से सुशासन की प्रेरणा लेनी चाहिए, भले ही मौजूदा शासनकर्ता किसी भी राजनीतिक दल से क्यों न ताल्लुक रखते हो. भागवत ने कहा, 'आज देश में धर्म की सुरक्षा के सामने कमोबेश वे ही चुनौतियां है, जो शिवाजी के समय थीं. इस सिलसिले में शिवाजी के समय और मौजूदा हालात में कोई विशेष अंतर नहीं है. यहां धर्म से मेरा तात्पर्य किसी संप्रदाय से नहीं है, बल्कि लोगों के उस स्वाभाविक कर्तव्य से है जिसके पालन से सब मनुष्य सुखी होते हैं और हमेशा एकजुट रहकर उन्नति के पथ पर आगे बढ़ते हैं.'

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
इस्लामाबाद, सार्क सम्मेलन, पाकिस्तान, भारतीय संसद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मोहन भागवत, RSS Chief Mohan Bhagwat, Islamabad, SAARC Conference, Parliament, Pakistan
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com