वैज्ञानिकों को बचाना है कि धरती को बचाना है तो इंसानों की आबादी को आधा करना होगा. पिछले 100 सालों में दुनिया की जनसंख्या 200 करोड़ से चार गुना बढ़कर 830 करोड़ पहुंच गई है. लेकिन 2070 तक विश्व की जनसंख्या बढ़कर 1240 करोड़ पार कर जाएगा. सस्टेनेबल डेवलपमेंट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि पृथ्वी इतनी बड़ी आबादी का बोझ नहीं सह पाएगी. लिहाजा इस सदी के अंत यानी सन 2100 तक जनसंख्या को घटाकर 4 अरब यानी 400 करोड़ के स्तर पर लाना होगा.
अगले 50-60 साल जनसंख्या नियंत्रण जरूरी
सस्टेनेबल डेवलपमेंट (Sustainable Development) जर्नल वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर अगले 100-200 सालों में वैश्विक जनसंख्या को रोका जा सका तो ही हम पर्यावरण, पानी और साफ हवा जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया करा पाएंगे. अंधाधुंध विकास, बढ़ता पैसा और शानोशौकत से बिजली, पानी, खाद्य पदार्थों का उपभोग कई गुना बढ़ चुका है. कचरा, जहरीली गैसों का उत्सर्जन भी धरती के लिए खतरा बन चुके हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि इन कारणों से धरती पर अंधाधुंध विकास और उपभोग खतरे के लेवल तक पहुंच गया है. इस सदी के अंत तक वैश्विक आबादी 1140 करोड़ तक पहुंच सकती है. फ्लाइंडर्स यूनिवर्सिटी का कहना है कि ये आंकड़ा 1240 करोड़ तक होगा. इस जनसंख्या वृद्धि से CO2 का उत्सर्जन अभी के स्तर से दोगुना पहुंच जाएगा.
50 साल में क्या बदला
- 50 साल में दुनिया की जनसंख्या दोगुना हो गई है
- 2 गुना कॉर्बन डाई आक्साइड का उत्सर्जन
- धरती पर पेड़-पौधे, पानी के स्रोत आधा हो गया
- 3 गुना हो गई बिजली की खपत दुनिया में
- 4 गुना बढ़ा खनिजों का खनन, कीटनाशकों का इस्तेमाल
अनाज, बिजली और पानी का संकट
अगर पॉपुलेशन ग्रोथ को रिवर्स नहीं किया गया हम उतना अनाज, बिजली या पानी नहीं दे पाएंगे, जितनी आबादी की जरूरत होगी. जिन देश में जनसंख्या बेकाबू दर से बढ़ रही है, वहां इस पर कंट्रोल से गरीबी में कमी और सभी तक सुविधाओं की पहुंच बढ़ाई जा सकती है.
इस्लामिक देश ईरान का उदाहरण
इस्लामिक देश ईरान में भी परिवार नियोजन सेवाओं से प्रति महिला बच्चों की दर 1992 में 4 से घटकर 2001 में दो पर आ गई है.साउथ कोरिया में 1972 में ही 12 सालों में यह 4 से घटकर 1.92 पर आ गई है. चीन, साउथ कोरिया जैसे कुछ देशों में जन्म दर 2 से नीचे के रिप्लेसमेंट लेवल से कम हो गई है.
परिवार नियोजन पर महिलाओं को मिले हक
इसके लिए जबरन नियम-कानून थोपने की बजाय सिर्फ गरीब देशों में महिलाओं को परिवार नियोजन और गर्भ निरोधक साधनों के इस्तेमाल से ही यह संभव हो सकता है. एक पॉजिटिव सिग्नल यह भी है कि चीन जैसे सबसे बड़ी आबादी वाले देश के बाद भारत में जनसंख्या चरम पर पहुंचने के साथ घटने का संकेत दे रही है. अगर महिलाओं को यह तय करने की आजादी होगी कि परिवार में कितने बच्चे होने चाहिए तो तस्वीर बदल सकती है.
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