- केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण कानून को आधिकारिक रूप से लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है.
- कानून के लागू होने के बाद भी पहले जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, तभी आरक्षण लागू होगा.
- बिना आधिकारिक अधिसूचना के महिला आरक्षण कानून में संशोधन करना संभव नहीं है, इसलिए यह कदम प्रक्रियागत है.
संसद के भीतर महिला आरक्षण को लेकर गरमागरम बहस चल रही थी, और उसी बीच सरकार ने चुपचाप एक बड़ा कदम उठा दिया. 2023 के महिला आरक्षण कानून को आधिकारिक तौर पर लागू (नोटिफाई) कर दिया. सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कानून लागू हुआ, बल्कि यह है कि ऐसे समय पर क्यों हुआ जब उसी कानून में बदलाव की चर्चा जारी है?
असल में हुआ क्या?
केंद्र सरकार ने संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जाता है, को 16 अप्रैल 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी. इसका मतलब ये है कि कानून अब 'कागज पर' पूरी तरह लागू हो गया है. लेकिन जमीन पर इसका असर अभी नहीं दिखेगा.
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फिर मौजूदा लोकसभा में क्यों नहीं मिलेगा फायदा?
यहीं से कहानी दिलचस्प होती है. सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, महिला आरक्षण सीधे लागू नहीं होगा. पहले जनगणना होगी फिर परिसीमन (सीटों का पुनर्निर्धारण) होगा. उसके बाद ही आरक्षण लागू किया जा सकेगा. यानी साफ है, 2024 या मौजूदा लोकसभा में इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.
तो फिर अभी नोटिफिकेशन क्यों?
यही सबसे बड़ा सवाल है और इसका जवाब पूरी तरह 'राजनीतिक' नहीं, बल्कि 'प्रक्रियागत' है.
1. बिना नोटिफिकेशन, संशोधन संभव नहीं
यहां ये समझ लेना जरूरी है कि किसी भी कानून में बदलाव करने के लिए जरूरी है कि वह पहले आधिकारिक रूप से लागू (notified) हो. इसलिए सरकार ने अधिसूचना जारी कर पहले महिला आरक्षण कानून लागू किया, ताकि उसमें संशोधन किया जा सके.

2. सरकार क्या बदलना चाहती है?
2023 के कानून में कहा गया था कि नई जनगणना के बाद उसके आधार पर परिसीमन होगा. फिर आरक्षण लागू किया जाएगा. लेकिन इसमें समस्या ये है कि जनगणना और परिसीमन में लंबा समय लग सकता है. इससे आरक्षण 2034 तक टल सकता था.
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3. नया प्रस्ताव क्या कहता है?
अब सरकार जो संशोधन ला रही है, उसका मकसद है कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाए. परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के बाद 2029 से ही महिला आरक्षण लागू कर दिया जाए. विपक्ष सरकार की इसी जल्दबाजी पर सवाल उठा रहा है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार नए संशोधन बिल के जरिए परिसीमन करना चाहती है जिससे दक्षिण के राज्य कमजोर होंगे.
अगर इसे सरल भाषा में समझें:
- 2023 में कानून पास हुआ
- 2026 में उसे नोटिफाई किया गया
- अब उसमें संशोधन लाने की तैयारी
- लक्ष्य: 2029 से आरक्षण लागू करना
सरकार का साफ कहना है कि यह सिर्फ तकनीकी प्रक्रिया है, बिना इसके संशोधन संभव नहीं है. यह कदम दिखने में भले अचानक और राजनीतिक लगे, लेकिन इसकी जड़ें कानूनी प्रक्रिया में हैं. सरकार पहले कानून को लागू करना चाहती है, ताकि उसमें बदलाव कर महिला आरक्षण को जल्दी लागू करने का रास्ता बनाया जा सके.
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