- दिल्ली शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत सभी आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया
- कोर्ट ने कहा कि सीबीआई आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश करने में विफल रही
- केजरीवाल ने बरी होने के बाद कहा कि वे भ्रष्ट नहीं हैं और इस फैसले को जनता के सामने एक मेडल की तरह पेश करेंगे
दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में निचली अदालत ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा कि सीबीआई आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सकी और चार्जशीट में गंभीर खामियां हैं. अरविंद केजरीवाल कोर्ट से बाहर निकले और मीडिया से बात करते हुए भावुक हो कर कहा कि मैं भ्रष्ट नहीं हूं जबकि उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल ने कहा कि सत्य की हमेशा जीत होती है. हालांकि CBI फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है.
मगर अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि अरविंद केजरीवाल के बरी होने पर आम आदमी पार्टी या अरविंद केजरीवाल की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? केजरीवाल ऐसे नेता हैं जो अदालत के इस फैसले को लेकर उसे तमगे या मेडल की तौर पर जनता के सामने प्रस्तुत करेंगे. कई जानकारों का मानना है कि जो नेरेटिव बीजेपी या केन्द्र सरकार ने बनाने की कोशिश की थी वह खत्म हो गई और केजरीवाल जिन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो अपनी पार्टी बनाई और अपनी राजनीति भी उसी के इर्द गिर्द की अब सबके सामने कहेंगे कि देखो मैं सच्चा था जिसे फंसाया गया.

अरविंद केजरीवाल के पुराने सहयोगी आशुतोष का कहना है कि यह पूरा केस फर्जी था, क्या यह सीबीआई को पता नहीं था. इसमें केजरीवाल की गिरफ़्तारी हुई, मनीष सिसोदिया डेढ़ साल जेल में रहे मगर अब बरी होने के बाद जरूर इसका फायदा उठाने की कोशिश करेंगे. आम आदमी पार्टी के लिए अगला चुनाव 2027 में पंजाब में है और फिर गुजरात लेकिन इस फैसले के बाद केजरीवाल को दिल्ली में अपनी खोई हुई जमीन वापस लेने में जबरदस्त मदद मिल सकती है.

आशुतोष का कहना है कि पिछले दिनों सोनिया गांधी को भी नेशनल हेराल्ड मामले में राहत मिली और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिन्दर सिंह हुड्डा को भी जमीन मामले में क्लीन चिट मिली. ऐसे में बीजेपी का यह नैरेटिव कि विपक्ष के नेता भ्रष्ट होते हैं, को बहुत बड़ा झटका लगा है. आशुतोष यह भी कहते हैं कि केजरीवाल को राजनैतिक रूप से शराब घोटाले से उतना नुकसान नहीं हुआ जितना शीशमहल, लाखों के परदे या कमोड प्रकरण से हुआ.

आम आदमी पार्टी पर नजर रखने वालों का मानना है कि अदालत का यह फैसला केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के लिए संजीवनी का काम करेगी क्योंकि दिल्ली का चुनाव हारने के बाद आम आदमी पार्टी की दिल्ली में गतिविधियां एकदम से कम हो गई थी. उम्मीद की जानी चाहिए कि इस नई संजीवनी के सहारे केजरीवाल दिल्ली के साथ साथ गुजरात, गोवा और अन्य राज्यों में अपनी गतिविधियों को बढ़ाने का काम करेंगे.
मगर इसी के साथ कांग्रेस के लिए जरूर खतरे की घंटी है क्योंकि केजरीवाल पंजाब, गुजरात और अन्य जगह भी कांग्रेस का ही नुकसान करेंगे, यही वजह है कि कांग्रेस इस पूरे मामले में आम आदमी पार्टी और बीजेपी की मिलीभगत देख रही है. राजनीति तो अपनी जगह चलती रहेगी मगर केजरीवाल के अगले कदम का इंतजार सभी को रहेगा.
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