किसान एक बार फिर आंदोलन कर रहे हैं. इस बार सड़कों पर नहीं, बल्कि रेल की पटरियों पर आंदोलन हो रहा है. गुरुवार को पंजाब में किसानों ने कई जगहों पर रेलवे ट्रैक पर कब्जा कर लिया. इस कारण कई ट्रेनें प्रभावित हुईं.
किसानों ने अपनी मांगों को लेकर गुरुवार दोपहर 12 बजे तक का अल्टीमेटम दिया था. जब 12 बजे के बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो उन्होंने रेलवे पटरियों पर धरना दे दिया.
पूरे पंजाब में यह 'रेल रोको' आंदोलन किसान मजदूर मोर्चा के बैनर के तहत हो रहा है. अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर किसानों और खेतीहर मजदूरों ने कई जगहों पर रेलवे ट्रैक पर कब्जा कर लिया, जिससे ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ा.
कहां-कहां दिखा असर?
किसानों के 'रेल रोको' आंदोलन का असर पंजाब के कई हिस्सों में दिखाई पड़ा. अमृतसर में प्रदर्शनकारी किसानों ने देवीदासपुरा में धरना दिया, जबकि ब्यास रेलवे स्टेशन पर शताब्दी एक्सप्रेस को रोक दिया गया.
इसके अलावा गुरदासपुर, मोगा, फिरोजपुर और संगरूर में भी ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुईं, जहां प्रदर्शनकारी अलग-अलग जगहों पर पटरियों पर बैठ गए थे.
फिरोजपुर में किसान मजदूर संघर्ष समिति ने मालावाला रेलवे स्टेशन पर फिरोजपुर-जालंधर रेलवे लाइन को ब्लॉक कर दिया.
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लेकिन मांगें क्या हैं?
किसान लंबे समय से आंदोलन करने की धमकी दे रहे हैं. उनका आरोप है कि सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है.
- भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील और किसानों पर इसके असर को लेकर रुख साफ किया जाए.
- बिजली संशोधन कानून पर सरकार अपना रुख साफ करे.
- आने वाले बीज अधिनियम पर भी सरकार अपना रुख साफ करे.
- इस बारे में सफाई दे कि क्या सहकारी केंद्र खत्म किए जा रहे हैं.
- शंभू-खनौरी आंदोलन के दौरान हुए कथित तौर पर लगभग 3.77 करोड़ रुपये के नुकसान का मुआवजा दिया जाए.
रेल रोकने से क्या होगा?
रेल रोकने का मकसद सरकार पर दबाव बनाना है. किसान मजदूर संघर्ष समिति की पंजाब यूनिट के अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सभरा ने कहा कि इस आंदोलन का मकसद केंद्र और पंजाब सरकार पर किसानों और मजदूरों से जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए दबाव बनाना था.
प्रशासन क्या कर रहा?
किसानों को मनाने के लिए प्रशासन ने किसानों से बातचीत शुरू कर दी है. अमृतसर में किसान नेता सरवन सिंह पंढेर, किसान प्रतिनिधियों, आईजी बॉर्डर रेंज और डिप्टी कमिश्नर के बीच बातचीत हुई.
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